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शासनादेश जारी होते ही जिलाधिकारी ने भुगतान पर लगाई रोक
Fri, 04 Sep 2020 06:18 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुल्तानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुल्तानपुर
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 04 Sep 2020 06:18 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : सोशल मीडिया
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सुल्तानपुर जिले में ग्राम पंचायतों नगर पंचायतों में कोरोना नियंत्रण के लिए खरीदे गए पल्स ऑक्सीमीटर व थर्मल स्कैनर समेत मेडिकल किट शासन से रेट जारी होने के पहले ही खरीद लिए गए थे। शासन से 2800 रुपये के भुगतान का निर्देश जारी होने के बाद डीएम ने इससे ज्यादा के भुगतान पर रोक लगा दी है। लंभुआ भाजपा विधायक देवमणि द्विवेदी की ओर मुख्यमंत्री कार्यालय में शिकायत का मामला संज्ञान में आने के बाद डीएम सी. इंदुमती ने पूरे प्रकरण की जानकारी दी है।
शासन से आरआई स्कैनर व पल्स ऑक्सीमीटर समेत मेडिकल किट का रेट जारी होने के बाद जिलाधिकारी सी. इंदुमती ने इसे गंभीरता से लिया था। डीएम ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि शासन से रेट जारी होने के बाद डीएम ने इससे अधिक भुगतान पर रोक लगा दिया है। इसके साथ ही आपूर्ति, भुगतान समेत अन्य मामलों की जांच का निर्देश दिया है। जांच के लिए अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व उमाकांत त्रिपाठी व जिला पंचायतराज अधिकारी केके सिंह चौहान को नामित किया है। डीएम ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि 304 ग्राम पंचायतों ने रेट का शासनादेश जारी होने के पहले ही भुगतान कर दिया है, जबकि 682 के भुगतान पर रोक लगाते हुए फर्मों के साथ भुगतान के संबंध में जांच का निर्देश दिया गया है।
विधायक का आरोप निराधार: डीएम
डीएम ने कहा कि लंभुआ विधायक का आरोप निराधार है। उनके आरोप अपुष्ट तथ्यों व जानकारी के अभाव में लगाया गया है। जिले में शासनादेश का अक्षरश: पालन कराया जा रहा है। खरीद में कहीं भ्रष्टाचार नहीं हुआ है।
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भुगतान रोकने में क्यों हुआ विलंब: विधायक
भाजपा विधायक लंभुआ देवमणि द्विवेदी का कहा कि जिलाधिकारी झूठा तथ्य पेश कर रही हैं। रेट का शासनादेश 24 जुलाई को जारी किया गया और भुगतान रोकने में 17 अगस्त तक इंतजार किया गया। इस अवधि में भुगतान होता रहा।
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शासन से आरआई स्कैनर व पल्स ऑक्सीमीटर समेत मेडिकल किट का रेट जारी होने के बाद जिलाधिकारी सी. इंदुमती ने इसे गंभीरता से लिया था। डीएम ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहा कि शासन से रेट जारी होने के बाद डीएम ने इससे अधिक भुगतान पर रोक लगा दिया है। इसके साथ ही आपूर्ति, भुगतान समेत अन्य मामलों की जांच का निर्देश दिया है। जांच के लिए अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व उमाकांत त्रिपाठी व जिला पंचायतराज अधिकारी केके सिंह चौहान को नामित किया है। डीएम ने बताया कि प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि 304 ग्राम पंचायतों ने रेट का शासनादेश जारी होने के पहले ही भुगतान कर दिया है, जबकि 682 के भुगतान पर रोक लगाते हुए फर्मों के साथ भुगतान के संबंध में जांच का निर्देश दिया गया है।
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विधायक का आरोप निराधार: डीएम
डीएम ने कहा कि लंभुआ विधायक का आरोप निराधार है। उनके आरोप अपुष्ट तथ्यों व जानकारी के अभाव में लगाया गया है। जिले में शासनादेश का अक्षरश: पालन कराया जा रहा है। खरीद में कहीं भ्रष्टाचार नहीं हुआ है।
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भुगतान रोकने में क्यों हुआ विलंब: विधायक
भाजपा विधायक लंभुआ देवमणि द्विवेदी का कहा कि जिलाधिकारी झूठा तथ्य पेश कर रही हैं। रेट का शासनादेश 24 जुलाई को जारी किया गया और भुगतान रोकने में 17 अगस्त तक इंतजार किया गया। इस अवधि में भुगतान होता रहा।