विधायक बनने को मचल रहे भाजपाईयों के दिल
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12 विधायकों और एक विधानपरिषद सदस्य के सांसद बनने पर कइयों के दिल विधायक बनने को मचलने लगे हैं। इनमें कई भाजपा के हैं तो कुछ बाहर वाले भी हैं जो भाजपा की बढ़ती ताकत के मद्देनजर पार्टी में शामिल होकर माननीय कहलाने का मौका तलाशने में जुट गए हैं।
इसके लिए अपनी-अपनी तरह से प्रयास भी शुरू कर दिए हैं। दिलचस्प तथ्य यह भी है कि भाजपा के कई विधायक अपने त्यागपत्र से खाली होने वाली सीट का मोह नहीं छोड़ पा रहे हैं।
वे इस कोशिश में है कि खाली होने वाली सीट किसी न किसी रूप में उनके ही घर में रह जाए।
ये हैं खाली सीटें
विधानमंडल दल नेता हुकुम सिंह के सासंद चुने जाने से मुजफ्फरनगर की कैराना, पार्टी के वरिष्ठ नेता कलराज मिश्र के सांसद बनने से लखनऊ पूर्व, राघव लखन पाल के सांसद बनने से सहारनपुर, कुंवर सर्वेश सिंह के सासंद बनने से ठाकुरद्वारा (मुरादाबाद), डॉ. महेश शर्मा के सांसद बनने से नोएडा, अजय मिश्र टेनी के सांसद बनने से निघासन (लखीमपुरखीरी), उमा भारती के सांसद बनने से चरखारी (महोबा), साध्वी निरंजन ज्योति के सांसद बनने से हमीरपुर, केशव मौर्य के सांसद बनने सिराथू (कौशांबी), सावित्री बाई फुले के सांसद बनने से बलहा (बहराइच) सीट रिक्त हुई है।
भाजपा के सहयोगी अपना दल की अनुप्रिया पटेल के सांसद निर्वाचित होने से रोहनिया (वाराणसी) की सीट रिक्त हुई है। इसके अलावा डॉ. नैपाल सिंह के सांसद चुने जाने से विधानपरिषद में भाजपा की एक सीट खाली हुई है।
लखनऊ से लेकर सहारनपुर तक सक्रियता
विधानसभा की खाली हुई इन 12 सीटों में विधानसभा की 11 सीटें भाजपा की हैं। इन सीटों के उपचुनाव के जरिये लोगों ने विधायक बनने को दौड़भाग शुरू कर दी है। लखनऊ से लेकर सहारनपुर तक लोग सक्रिय हैं।
कलराज मिश्र की सीट लखनऊ पूर्व के दावेदार मुंह से भले ही कुछ न कह रहे हैं लेकिन इनकी होर्डिंग पर जिस तरह मोदी को बधाई देते हुए अपने नाम के साथ विधानसभा क्षेत्र का नाम लिखाया गया है, उससे इनकी इच्छा को समझा जा सकता है। हीरो वाजपेयी व राजीव मिश्र की होर्डिंग अपने आप में सब कुछ कह रही हैं। संतोष सिंह के प्रयास भी इसी तरह के दिखाई दे रहे हैं। अन्य कुछ नाम भी चर्चा में हैं।
अब चूंकि राजनाथ सिंह लखनऊ से सांसद हो चुके हैं और वे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं, इसलिए उनकी इच्छा भी पार्टी प्रत्याशी तय करने में विशेष भूमिका निभाएगी। साथ ही यहां से अभी तक विधायक रहे कलराज मिश्र की पसंद भी कहीं न कहीं फैसले को प्रभावित करेगी।
इस सीट पर पार्टी के कुछ बड़े नेताओं की दिलचस्पी भी चर्चा में है। पर, सूत्र इसकी पुष्टि नहीं करते। इनका तर्क है कि सभी सीटों पर उसी क्षेत्र के लोगों में से किसी को टिकट दिया जाएगा।
वंशवाद से भी शिकायत नहीं
नोएडा से विधायक डॉ. महेश शर्मा सांसद चुन लिए गए हैं। पर उनकी कोशिश यही है कि विरासत घर में ही रह जाए।
लखीमपुरखीरी से सांसद चुने गए अजय मिश्र टेनी भी चाहते हैं कि उनके त्यागपत्र से खाली होने वाली निघासन सीट पर उनके पुत्र आशीष या भाई विजय मिश्र में किसी को चुनाव लड़ा दिया जाए।
सावित्री बाई फुले की सीट पर उनके नजदीकी रिश्तेदार अक्षयवर कनौजिया के नाम की चर्चा है। सर्वेश सिंह चाहते हैं कि उनके त्यागपत्र से रिक्त सीट पर उनके पुत्र सुशांत सिंह को चुनाव लड़ाया जाए।
पर, वंशवाद की राजनीति के विरोधी नरेंद्र मोदी के रहते इन इच्छाओं के पूरी होने की संभावना काफी कम ही है।
राजनाथ के पुत्र लड़ सकते हैं चुनाव
इसके अलावा हरीश ठाकुर और महेश गुप्ता व अनिला सिंह के नाम भी नोएडा से चुनाव लड़ने वाले दावेदारों में शामिल हैं। पर, पंकज सिंह का मामला उनके अपने विवेक से ज्यादा उनके पिता भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के ऊपर निर्भर है।
महेश गुप्ता पार्टी के कार्यकर्ता के साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नजदीकी हैं। साथ ही कुछ लोग जाट समीकरणों के मद्देनजर अनिला सिंह का दावा भी बता रहे हैं।
इनका तर्क है कि अनिला सिंह लोकसभा चुनाव में अमरोहा से लोकसभा के टिकट की प्रबल दावेदार थीं। चुनाव में जिस तरह जाट मतदाताओं को समर्थन भाजपा को मिला है, उसके मद्देनजर नोएडा की इस सीट से अनिला को चुनाव लड़ाने का फैसला किया जा सकता है।
ये भी हैं दौड़ में
निघासन सीट पर अजय मिश्र के परिवार के अलावा जिन नामों की चर्चा है उनमें पूर्व मंत्री रामकुमार वर्मा और पूर्व जिलाध्यक्ष शरद वाजपेयी का नाम भी शामिल है।
केशव मौर्य के सांसद बनने से रिक्त हो रही सिराथू सीट से संजय गुप्त और अरुण केशरवानी दावेदार हैं तो राघव लखनपाल के त्यागपत्र से खाली हो रही सीट सहारनपुर से राजीव गुम्बर, दिनेश सेठी और हरीश मलिक टिकट पाने को सक्रिय हैं।
उमा भारती की सीट चरखारी से भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व महामंत्री लक्ष्मीनारायण सिंह राजपूत, क्षेत्रीय मंत्री रामहित राजपूत सहित चक्रपाणि त्रिपाठी और ओमप्रकाश राजपूत भी दावेदार हैं।
सावित्री बाई फुले की बलहा सीट पर उनके नजदीकी रिश्तेदार अक्षयवर कनौजिया के अलावा अक्षयवर लाल गोंड और पलटूराम के नाम की चर्चा है। पलटूराम गोंडा के रहने वाले हैं और कैसरगंज से सांसद चुने गए बृजभूषण सिंह के नजदीकी हैं।