भाजपा ने स्वतंत्र देव के बहाने खेला पिछड़ा कार्ड, 2022 के विधानसभा चुनाव पर नजर
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भाजपा ने स्वतंत्र देव सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर पिछड़ा कार्ड खेला है। पिछड़ों में यादवों के बाद सबसे बड़ी सात प्रतिशत आबादी वाले कुर्मी समाज को पार्टी के साथ लामबंद करने की कोशिश की है। इसके पीछे कहीं न कहीं 2022 का विधानसभा चुनाव भी है।
भाजपा ने उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाकर अभी से इसकी तैयारी के संकेत दे दिए हैं। स्वतंत्र देव भाजपा के ऐसे तीसरे कुर्मी नेता हैं जिन्हें प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनसे पहले ओमप्रकाश सिंह और विनय कटियार प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं।
दरअसल, प्रदेश में पिछड़ों में कुर्मी जनसंघ के समय से ही भाजपा का समर्थक माना जाता रहा है। वर्ष 2014 में भाजपा ने प्रदेश में गैर यादव पिछड़ों के समीकरण पर नजर गड़ाते हुए ही अपना दल नेता अनुप्रिया पटेल से गठबंधन किया था।
लोकसभा के हाल ही हुए चुनाव में भाजपा ने जिन 26 पिछड़ों को उम्मीदवार बनाया, उनमें सात कुर्मी थे। अब स्वतंत्र देव को अध्यक्ष बनाकर कुर्मी समाज के बीच भाजपा की पकड़ व पहुंच और मजबूत बनाने की कोशिश की गई है।
ये हैं समीकरण
मिलनसार और प्रदेश के सभी जिलों में प्रमुख भाजपा कार्यकर्ताओं से व्यक्तिगत रूप से परिचित स्वतंत्र देव पिछड़े चेहरे होने के बावजूद अगड़ों और अनुसूचित जाति कार्यकर्ताओं के बीच भी समान रूप से भरोसा प्राप्त नेता हैं।
उन्हें जिलों के प्रमुख कार्यकर्ताओं की क्षमता की भी जानकारी है। ऐसे में केंद्र व प्रदेश सरकार में यूपी से लिए गए चेहरों के साथ स्वतंत्र देव की नियुक्ति को जोड़ें तो भाजपा का यह फैसला 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए प्रदेश में अगड़ा, पिछड़ा और अनुसूचित जाति के बीच भाजपा का समीकरण दुरुस्त करता नजर आता है। साथ ही भाजपा के एजेंडे चुनावी लड़ाई को 60 बनाम 40 की बनाने की कड़ी दिखता है।
यह भी रही वजह
हाल ही हुए लोकसभा चुनाव के दौरान और उससे पहले सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के नेता ओमप्रकाश राजभर तथा अपना दल की अनुप्रिया पटेल ने अलग सुर बुलंद किए थे। अनुप्रिया की तो प्रियंका गांधी वाड्रा से मुलाकात भी चर्चा में रही थी। राजभर की भी सपा नेता अखिलेश यादव से करीबी चर्चा में आई थी। उसी के बाद संकेत मिलने लगे थे कि भाजपा अब अपने पिछड़े नेताओं को आगे बढ़ाएगी।
संयोगों का समीकरण तो नहीं
खास तौर से जब भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय को केंद्रीय मंत्री बना दिया गया और अनुप्रिया पटेल को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली, तभी लगने लगा था कि भाजपा अब किसी पिछड़े नेता को ही प्रदेश अध्यक्ष बनाएगी।
भाजपा ने 2014 का लोकसभा चुनाव डॉ. लक्ष्मीकांत वाजपेयी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में ब्राह्मण चेहरे पर लड़ा और सफलता पाई। पिछला विधानसभा चुनाव पिछड़े वर्ग के चेहरे केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर लड़ा और चुनाव जीता।
अभी हाल ही लोकसभा का चुनाव फिर डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय के रूप में ब्राह्मण अध्यक्ष बनाकर लड़ा और शानदार जीत हासिल की। संभवत: इन समीकरणों का ध्यान रखते हुए 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए स्वतंत्रदेव सिंह के रूप में फिर पिछड़ा कार्ड खेला है।