'नागरिकता के अधिकार पर हमला है नागरिकता संशोधन विधेयक व एनआरसी, खुलकर विरोध करेंगे'
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विभिन्न संगठनों से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नागरिकता संशोधन विधेयक (सीएबी) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) को संविधान विरोधी करार देते हुए इसे नागरिकता के अधिकार पर हमला बताया। कार्यकर्ताओं में केंद्र की भाजपा सरकार के संविधान विरोधी इस कदम का खुलकर विरोध करने पर सहमति बनी।
तय हुआ कि विपक्षी दल लोकसभा व राज्यसभा में इस विधेयक का विरोध करने के साथ ही इसके खिलाफ वोट भी करें। जो सियासी दल वोटिंग से वाकआउट करेगा, उनका भी विरोध किया जाएगा।
निशातगंज की पेपरमिल कॉलोनी स्थित कैफी आजमी अकादमी में रविवार को आयोजित कार्यक्रम में सामाजिक कार्यकर्ता अमीक जामई ने कहा कि सरकार बुनियादी मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए इस तरह के गैर सांविधानिक विधेयक लेकर आ रही है। सरकार देश में सांप्रदायिक विभाजन पैदा करना चाहती है।
ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि बिल का विरोध करने के लिए हमें सभी विपक्षी दलों से बात करनी चाहिए। राष्ट्रीय स्तर पर एनआरसी को लागू करना संभव नहीं है। हमें भारत के संविधान और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करना चाहिए।
प्रो. अली खान महमूदाबाद ने कहा कि सीएबी संविधान और भारत के विचार की हत्या है। लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति डॉ. रूप रेखा वर्मा ने कहा कि यह बिल केवल मुसलमानों के बारे में नहीं है बल्कि हमारे सांविधानिक मूल्य खतरे में हैं। अब्दुल हफीज गांधी ने कहा कि सरकार का प्रयास नागरिकता को धर्म केंद्रित बनाने का है।
प्रो. रमेश दीक्षित ने कहा कि सीएबी संविधान के धर्मनिरपेक्ष दर्शन के साथ ही संविधान के अनुच्छेद 14 का भी उल्लंघन करता है। डॉ. पवन राव अंबेडकर ने कहा कि सभी नागरिकों को अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कतार में नहीं लगाया जा सकता है। ओवैस सुल्तान खान ने कहा कि एनआरसी एक निरर्थक प्रयास है जैसा असम के मामले में साबित हुआ।
मानवाधिकार कार्यकर्ता खालिद चौधरी ने कहा कि सीएबी और एनआरसी अल्पसंख्यकों के साथ ही दलितों, आदिवासियों, झुग्गी-झोपड़ी में रहने वालों और महिलाओं को भी प्रभावित करेगा।
रिहाई मंच के तारिक शफीक, संत कबीरनगर के जिला पंचायत सदस्य मोहम्मद अहमद, पूर्व मंत्री मुईद अहमद, ताहिरा हसन, सदफ जाफर, पूर्व जस्टिस बीडी नकवी, अतहर हुसैन सिद्दीकी, सुमय्या राना, एएमयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. मशकूर अहमद उस्मानी, सुहैब अंसारी ने भी विचार रखे।