यूपी के बजट में भगवा एजेंडे को धार, अयोध्या-मथुरा-काशी पर खास ध्यान
‘सांस्कृतिक सरोकारों पर नजर, एजेंडे को धार।’ भगवा टोली की वैचारिक प्रतिबद्धताओं पर अगर योगी आदित्यनाथ के पहले बजट की समीक्षा करें तो यही सारांश निकलता है।
मथुरा-व़ंदावन और अयोध्या-फैजाबाद को मिलाकर दो नए नगर निगम बनाकर, कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए अनुदान 50 हजार से बढ़ाकर एक लाख करके तथा मुख्यमंत्री के हाथों सरयू आरती की शुरुआत के जरिये सांस्कृतिक सरोकरों पर प्रतिबद्धता का संदेश दे चुकी भाजपा सरकार अपने पहले बजट में इसी संकल्प पर और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ती दिखी।
अयोध्या, मथुरा और काशी तो घोषित रूप से भगवा टोली के एजेंडे का हिस्सा थे। इसलिए योगी सरकार के पहले बजट में इनके लिए अगर एक के बाद एक योजनाएं लाकर धन की व्यवस्था की गई है तो इसमें कुछ भी ताज्जुब नहीं।
लेकिन बजट में इन स्थानों के अलावा नैमिषारण्य, गोरखपुर, चित्रकूट, विंध्याचल, गोला गोकरणनाथ, इलाहाबाद व कानपुर के साथ गाय-गंगा और क्षेत्रीय लोक कलाओं व संगीत के लिए योजना या कार्यक्रम के लिए धन की व्यवस्था कर संदेश दिया है कि वैचारिक अधिष्ठान के हर पहलू पर भी उसकी नजर है।
बजट के पीछे ये है सरकार का मकसद
कुल मिलाकर बजट के जरिये यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि हिंदुत्व व हिंदुओं की आस्था से जुड़े हर छोटे-बड़े स्थान का सरकार ख्याल रखेगी। साथ ही भारतीय संस्कृति की विरासत को सहेजने, संरक्षित करने और इनसे जुड़े लोगों को प्रोत्साहित करने का भी इरादा है।
बजट में कब्रिस्तानों की चारदीवारी के निर्माण के लिए सरकारी मदद को खत्म करके यह साफ कर दिया गया है कि आलोचना कुछ भी हो, लेकिन भाजपा सरकार अपने एजेंडे से डिगने वाली नहीं है।
बाराबंकी के देवाशरीफ के बस स्टेशन के नवनिर्माण और उसे उच्चीकृत करने की बात कहकर भले ही सांकेतिक तौर पर ही सही यह बताने की कोशिश की गई है कि योगी सरकार तुष्टीकरण तो नहीं करेगी, लेकिन लोगों की श्रद्धा का सम्मान करने से भी नहीं चूकेगी।
राम नाम से शुरू किया बजट
भाजपा के रणनीतिकार बजट से यह संदेश देने से भी नहीं चूके कि राम नाम की महिमा को उनसे ज्यादा कोई नहीं जानता। इसीलिए भाजपा की फर्श से अर्श तक यात्रा में मुख्य कारण रहे राम का नाम योगी सरकार के इस पहले बजट पर भी छाया रहा।
वित्त मंत्री राजेश अग्रवाल ने यह कहते हुए, ‘राष्ट्र की अस्मिता के प्रतीक मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम का स्मरण करना हमारी प्रतिबद्धता है। उनको नमन करते हुए मैं बताना चाहता हूं..’ बजट भाषण शुरू किया।
अग्रवाल ने जब राम नाम से भाषण शुरू किया तो सत्तापक्ष के सदस्य काफी देर तक मेजें थपथपाते रहे। बजट भाषण एक तरह से विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा नेताओं के राजनीतिक भाषणों को विस्तार देते और भगवा एजेंडे पर किए गए वादों को पूरा करते ही दिखा।
अग्रवाल ने बजट भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गुणगान किया तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उन पर पूरी तरह आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता भी जताई।
हर जगह के काम पर ध्यान
मथुरा-वृंदावन के सौंदर्यीकरण एवं पर्यटन विकास की बड़ी कार्ययोजना पर काम की प्रतिबद्धता व्यक्त करके, अयोध्या में रामलीला के मंचन में बाधा न आने देने के लिए बजट देकर, चित्रकूट में सांस्कृतिक धरोहरों को संरक्षित करते हुए परिक्रमा पथ के निर्माण तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन और भजन संध्या स्थल बनवाने की घोषणा करके सरकार ने यह बताने की कोशिश की है कि वह उन भावों को भूली नहीं है जो उसे सत्ता में पहुंचाने में मददगार बने हैं।
इसीलिए सरयू नदी पर बने घाटों को न सिर्फ ठीक करने, बल्कि उन्हें सुंदर और श्रद्धालुओं के लिए आरामदायी बनाने की बात कही गई है।
तीर्थ स्थलों तक सुगम यातायात
प्रदेश के सभी प्रमुख तीर्थ स्थलों को चार लेन सड़कों से जोड़ने की घोषणा की गई है। केंद्र सरकार की रीजनल कनेक्टिविटी योजना के तहत आगरा-लखनऊ-वाराणसी, लखनऊ-इलाहाबाद-गोरखपुर को सम्मिलित करते हुए सस्ती वायुसेवा शुरू करने का एलान किया गया है।
गाय और गंगा पर ध्यान
यही वजह है कि अर्धकुंभ को आस्था के साथ वैश्विक सभ्यता और संस्कृति का समागम बताते हुए गंगा को सिर्फ नदी नहीं, बल्कि ऊर्जा का अक्षय स्रोत बताया गया। वित्त मंत्री ने कहा कि गंगा की स्वच्छता भारतीय संस्कृति की प्राण रक्षा का अनिवार्य उपक्रम है।
यही नहीं गायों के संरक्षण व संवर्धन के लिए ‘कान्हा गोशाला एवं बसहारा पशु आश्रय योजना’ के तहत कांजी हाउस/ पशु शेल्टर होम्स की स्थापना की घोषणा भी की गई है।
नाम के सहारे एजेंडे के काम
बजट में नाम के सहारे भी एजेंडे के काम साधने की कोशिश की गई है। चुनाव के दौरान आंचलिक भाषाओं एवं लोक विधाओं के विकास का वादा करने वाली भाजपा सरकार ने पहले ही बजट में इसे पूरा करते हुए कबीर अकादमी की स्थापना की घोषणा की है।
इसी तरह गर्भवती महिलाओं को कुपोषण से बचाने के लिए चल रही योजना का नाम शबरी संकल्प अभियान रखकर, राजकीय महाविद्यालयों में ‘परमवीर चक्र’ विजेताओं के चित्र और उनका जीवन परिचय लिखाने, विद्यालयों व चिकित्सालयों के नाम शहीदों के नाम पर रखने, हर महीने की 5 तारीख को बचपन दिवस, 15 तारीख को लाडली दिवस और 25 तारीख को ममता दिवस मनाने, बालिकाओं के आत्मरक्षा कार्यक्रम को रानी लक्ष्मीबाई के नाम पर रखकर, बालिकाओं की स्नातक तक मुफ्त शिक्षा योजना का नाम अहिल्याबाई के नाम पर रखकर, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और भाऊराव देवरस के नाम पर कई योजनाएं शुरू करके सरोकारों व एजेंडे पर ध्यान दिया गया है।
राजनीतिक निहितार्थ
एजेंडे पर भाजपा की फिक्र का अंदाज वित्तमंत्री के इन शब्दों से भी हो जाता है जिसमें उन्होंने कहा कि प्राचीन संस्कृति के पोषक और वाहक प्रदेश के युवा सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व के स्थलों से धीरे-धीरे दूर होते जा रहे हैं। इसलिए सरकार ने सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक महत्व के स्थलों के रखरखाव पर फोकस किया है।
समझा जा सकता है कि भाजपा सरकार न सिर्फ यह संदेश देना चाहती है कि संस्कृति के सहारे ही सही, एजेंडे पर उसका पूरा ध्यान है। कहीं न कहीं वह युवा पीढ़ी को भी संस्कृति और सांस्कृतिक स्थलों के सहारे भाजपा से जोड़कर आगे की राजनीतिक यात्रा की तैयारी कर लेना चाहती है।
ये की गई प्रमुख घोषणाएं
- गोरखपुर में ‘लोक मल्हार’ और अयोध्या में ‘सावन झूला’ के विशिष्ट कार्यक्रम कराने की घोषणा।
- मथुरा में गीता शोध संस्थान और कृष्ण संग्रहालय की स्थापना का फैसला।
- ‘स्वदेश दर्शन योजना’ की घोषणा करते हुए अयोध्या में रामायण सर्किट, वाराणसी में बौद्ध सर्किट एवं मथुरा में कृष्ण सर्किट के निर्माण को 1240 करोड़ रुपये का प्रस्ताव।
- ‘प्रासाद योजना’ की घोषणा करते हुए अयोध्या, वाराणसी, एवं मथुरा में अवस्थापना सुविधाओं के विकास को 800 करोड़ रुपये।
- वाराणसी में सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना के लिए 200 करोड़ रुपये।
- अयोध्या व चित्रकूट में भजन संध्या स्थल का निर्माण, चित्रकूट में प्ररिक्रमा पथ का पुनर्विकास।
- विंध्याचल के पर्यटन विकास के लिए 10 करोड़ रुपये।
- रामायण कॉन्क्लेव के आयोजन के लिए 3 करोड़ रुपये।
- गाजियाबाद में कैलाश मानसरोवर भवन के निर्माण के लिए 20 करोड़ रुपये।
- इलाहाबाद में अर्धकुंभ मेले के लिए 500 करोड़ रुपये।
- सिंधु दर्शन के लिए 10 हजार रुपये प्रति यात्री अनुदान।