सपा-बसपा की काट को भाजपा ने छेड़ा अभियान, ये है मास्टर प्लान
स्थापना दिवस के बहाने भाजपा शुक्रवार से सपा और बसपा की काट के लिए अभियान चलाएगी। पार्टी नेता और कार्यकर्ता बूथों पर कार्यक्रम कर एससी व एसटी एक्ट पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद हुई घटनाओं पर दोनों पार्टियों को कठघरे में खड़ा करेंगे।
साथ ही मोदी और योगी सरकार की दलितों, पिछड़ों और महिलाओं के कल्याण के लिए किए गए काम बताएंगे। लोगों को यह बताया जाएगा कि कैसे गलत तथ्यों पर हिंसक घटनाएं कर आम जन के लिए परेशानी खड़ी की गई। इसके साथ पार्टी का दिसंबर तक छह बार बूथों पर जाने का अभियान भी शुरू हो जाएगा।
भाजपा प्रदेश के लगभग डेढ़ लाख बूथों पर स्थापना दिवस मनाने के साथ ही पार्टी का झंडा लगाकर जनसंघ से आज तक पार्टी की राजनीतिक यात्रा की चर्चा की जाएगी। साथ ही भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए पार्टी कार्यकर्ताओं से कमर कसने का आह्वान किया जाएगा।
दलितों के मुद्दे पर सपा व बसपा की तरफ से भाजपा को दलित विरोधी बताने के आरोपों का भी जवाब देने की तैयारी की गई है। पार्टी की तरफ से सभी जिलों को डॉ. आंबेडकर से जुड़े स्थलों के विकास और उनके नाम से किए गए कामों का ब्यौरा भेजकर उन्हें सभी को बताने का आग्रह किया गया है।
इस तरह साधेंगे समीकरण
पार्टी के प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक कहते हैं कि जनसंघ काल से आज तक भाजपा ने फर्श से अर्श तक सफर तय किया है। आज 19 राज्यों में सरकार में हैं। पार्टी को इतना समर्थन सबका साथ और सबका विकास की नीति पर ही मिला है। इसमें दलित और पिछड़े भी शामिल हैं।
भाजपा पर दलितों और पिछड़ों की उपेक्षा का आरोप लगाने वाले सपा और बसपा से हम पूछना चाहते हैं कि इन्होंने अपनी सरकारों में इनके लिए क्या किया? सपा, बसपा और कांग्रेस के सत्ता में रहने पर डॉ. आंबेडकर से जु़ड़े स्थलों को महत्व क्यों नहीं मिला। भाजपा ने जब एक दलित को राष्ट्रपति की कुर्सी पर बैठाने का फैसला किया तो उस पर क्यों सहमत नहीं हुए?
बूथों पर होंगे ये छह कार्यक्रम
14 अप्रैल को डॉ. आंबेडकर जयंती
23 जून को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी बलिदान दिवस
25 सितंबर पं. दीनदयाल उपाध्याय की जंयती पर सेवा दिवस
25 दिसंबर अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर सुशासन दिवस