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सैनिक स्कूलों में किसानों के बेटे ज्यादा इसलिए इसके प्रति भाजपा का रवैया उपेक्षापूर्ण : अखिलेश
Sat, 17 Aug 2019 09:33 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Sat, 17 Aug 2019 09:33 PM IST
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अखिलेश यादव
- फोटो : अमर उजाला
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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि प्रदेश में स्थापित सैनिक स्कूलों के प्रति भाजपा सरकार का रवैया पूरी तरह उपेक्षापूर्ण है। इन स्कूलों से जल, थल और वायुसेना के लिए प्रशिक्षु जांबाज तैयार होते हैं। सेना में किसानों के बेटे ही ज्यादा जाते हैं और भाजपा की गांव, खेती-किसानी में कोई दिवचस्पी नहीं है। इसलिए भाजपा किसान और जवान से दूरी बनाए रखती है।
अखिलेश ने कहा कि सरकार लखनऊ के सरोजनी नगर क्षेत्र में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. संपूर्णानन्द द्वारा स्थापित सैनिक स्कूल में प्रशिक्षुओं की संख्या 400 से 800 करने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री को मालूम होना चाहिए कि अमेठी, मैनपुरी, और झांसी में भी सैनिक स्कूल हैं। इन सभी में भी 800 सीटें करने का निर्णय होना चाहिए। इस तरह उत्तर प्रदेश में कुल 3200 प्रशिक्षुओं को प्रवेश मिल सकेगा।
उन्होंने कहा, झांसी, अमेठी और मैनपुरी में सैनिक स्कूलों की स्थापना समाजवादी सरकार में हुई थी। भाजपा सरकार को एक साथ सभी सैनिक स्कूलों में सीटें बढ़ानी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के मंत्रिमंडल ने बिना राग-द्वेष के दायित्व निर्वहन की संवैधानिक शपथ ली है। पर, उनका आचरण इसके प्रतिकूल है। वे दुर्भावना से काम कर रहे हैं। लोकतंत्र में असहिष्णुता की भावना नहीं होनी चाहिए। स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सहिष्णु होना आवश्यक है और नैतिक भी।
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अखिलेश ने कहा कि सरकार लखनऊ के सरोजनी नगर क्षेत्र में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. संपूर्णानन्द द्वारा स्थापित सैनिक स्कूल में प्रशिक्षुओं की संख्या 400 से 800 करने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री को मालूम होना चाहिए कि अमेठी, मैनपुरी, और झांसी में भी सैनिक स्कूल हैं। इन सभी में भी 800 सीटें करने का निर्णय होना चाहिए। इस तरह उत्तर प्रदेश में कुल 3200 प्रशिक्षुओं को प्रवेश मिल सकेगा।
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उन्होंने कहा, झांसी, अमेठी और मैनपुरी में सैनिक स्कूलों की स्थापना समाजवादी सरकार में हुई थी। भाजपा सरकार को एक साथ सभी सैनिक स्कूलों में सीटें बढ़ानी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के मंत्रिमंडल ने बिना राग-द्वेष के दायित्व निर्वहन की संवैधानिक शपथ ली है। पर, उनका आचरण इसके प्रतिकूल है। वे दुर्भावना से काम कर रहे हैं। लोकतंत्र में असहिष्णुता की भावना नहीं होनी चाहिए। स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सहिष्णु होना आवश्यक है और नैतिक भी।