13 हजार समितियों में लगेंगी बायोगैस इकाइयां
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प्रादेशिक कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (पीसीडीएफ) की 13 हजार से अधिक दुग्ध
पहले चरण में लखनऊ मंडल में मॉडल के तौर पर इनकी स्थापना होगी। सबसे पहले गोकुल पुरस्कार विजेताओं व दुग्ध उत्पादन में दूसरे व तीसरे स्थान वाले उत्पादकों को मौका मिलेगा।
कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक
रंजन ने हाल ही में सड़ने योग्य कूड़े-कचरे का उपयोग करते हुए बायो गैस
उत्पादन योजना को पीसीडीएफ की सभी सहकारी समितियों में लागू करने का आदेश
जारी किया था।
अब पीसीडीएफ ने चरणबद्ध तरीके से सभी 13 हजार दुग्ध उत्पादक
सहकारी समितियों में इसकी स्थापना का फैसला किया है।
तय हुआ है कि
समितियों में नियोजन विभाग द्वारा विकसित बीईएमसी (बायो इनर्जी मिशन
सेल)-यूनीसेफ मॉडल से बायोगैस इकाइयों की स्थापना की जाएगी।
ये बायोगैस
पूर्व के प्रचलित बायोगैस की खामियों से मुक्त हैं और प्रयोग में खाना
पकाने के लिए गैस व प्रकाश की व्यवस्था करने में सक्षम हैं।
साथ ही ऑफ
ग्रिड मोड में समितियों के बल्क मिल्क कूलर संचालित करने के लिए बिजली
भी प्राप्त हो सकेगी।
पीसीडीएफ ने आयुक्त
के आदेश के क्रम में सबसे पहले लखनऊ मंडल के जिलों की 1500 दुग्ध सहकारी
समितियों में मॉडल बायोगैस इकाइयों को स्थापित करने की योजना बनाई है।