अयोध्या के राजा विमलेंद्र मोहन बने रामजन्मभूमि न्यास के ट्रस्टी, कमिश्नर ने छोड़ा रिसीवर का चार्ज
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श्रीरामजन्मभूमि/बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर अधिग्रहीत की गई चल अचल संपत्तियों समेत रामलला को चढ़ावे के रूप में प्राप्त हुई धनराशि, सोना-चांदी को नए ट्रस्ट की घोषणा के साथ उसके ट्रस्टी बनाए गए राजा अयोध्या बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र को बुधवार शाम हस्तांरित कर दी गई। यह कार्रवाई कमिश्नर आवास पर अधिग्रहीत परिसर के रिसीवर व मंडलायुक्त एमपी अग्रवाल ने की। ट्रस्ट की समस्त संपत्तियों पर कब्जा देने के साथ इसकी रिपोर्ट जिला प्रशासन ने गृह मंत्रालय भारत सरकार को भेज दी गई है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रामलला का भव्य मंदिर बनाने के लिए श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का बुधवार को विधिवत गठन के साथ संपत्तियों पर कब्जा भी दे दिया गया। संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए ट्रस्ट के गठन का प्रस्ताव पेश किया, इसके बाद कैबिनेट की बैठक में ट्रस्ट के स्वरूप, नियमावली, कार्यक्षेत्र और सदस्यों के नाम तय करते हुए अधिसूचना जारी की।
अधिसूचना के अनुपालन में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रामलला के पक्ष में आए फैसले के बाद भी अधिग्रहीत परिसर समेत रामलला के चढ़ावे, दान-दक्षिणा आदि की जिम्मेदारी संभाल रहे कमिश्नर एमपी अग्रवाल ने ट्रस्टी बनाए गए राजा अयोध्या बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र को अपने आवास पर बुलाया। इसके बाद स्टांप पेपर पर रामलला का विभिन्न बैंक अकाउंट में जमा धनराशि समेत विराजमान रामलला की चल अचल संपत्ति को विधिवत हस्तांतरित कर दिया।
ये बातें कही गई हैं दस्तावेज में
रिसीवर/कमिश्नर की ओर से ट्रस्ट को दिए गए कब्जा दस्तावेज में कहा गया है कि अयोध्या में कतिपय क्षेत्र अर्जन अधिनियम 1993 द्वारा श्रीरामजन्मभूमि/बाबरी मस्जिद परिसर अयोध्या का अधिग्रहण करने के उपरांत भारत सरकार के पत्र संख्या-71013/26/92-अयोध्या दिनांक-8-1-1993 द्वारा आयुक्त फैजाबाद मंडल ( अब अयोध्या) को अधिगृहीत क्षेत्र का रिसीवर नामित किया गया था। तत्पश्चात अधिग्रहीत क्षेत्र अयोध्या को कब्जे में लेकर इन्वेंट्री तैयार कराई गई थी।
चढ़ावे में धातुएं जिस रूप में प्राप्त हुई हैं, उसी रूप में राजकीय कोषागार अयोध्या में संरक्षित हैं। रिसीवर की ओर से कहा गया है कि आदेश के अनुपालन में गृह मंत्रालय भारत सरकार नई दिल्ली द्वारा नवगठित ट्रस्ट श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र अयोध्या के पक्ष में अयोध्या वाद से संबंधित अपीलों में सर्वोच्च न्यायालय के नौ नवंबर के आदेश के अनुपालन में विवादित स्थल के अंदर व बाहर के हिस्सों के साथ-साथ अयोध्या एक्ट द्वारा अधिगृहीत भूमि/भवन व श्रीरामलला विराजमान को दर्शनार्थियों द्वारा समर्पित धनराशि व मूल्यवान वस्तुओं का कब्जा हस्तांतरण बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र ट्रस्टी को कर दी गई।
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंपी गई संपत्तियां
-अचल संपत्ति-अधिगृहीत क्षेत्र अयोध्या को कब्जे में लेकर तैयार इन्वेंट्री
-बचत खाता-भारतीय स्टेट बैंक शाखा अयोध्या खाता संख्या-10294091088 में जमा 28110264.83 ( दो करोड़ इक्यासी लाख दस हजार दो सौ चौसठ रूपए तिरासी पैसे)
- सावधि जमा- भारतीय स्टेट बैंक शाखा अयोध्या - कुऱ्ल 87 फिक्स डिपॉजिट 87554058( आठ करोड़ पचहत्तर लाख चौवन हजार अट्ठावन रूपए)
- धातुएं-राजकीय कोषागार अयोध्या में रखी गई सोना 230.42 ग्राम, चांदी-50 19.98ग्राम व अन्य 1531.52 ग्राम
राजा अयोध्या विमिलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र ने कहा कि रिसीवर ने ट्रस्ट को समस्त संपत्तियां हस्तांतरित कर दी है। अब भव्य राममंदिर निर्माण अतिशीघ्र शुरू करेगा। ट्रस्ट पूरी तरह स्वायत्तशासी है। इसकी समस्त गतिविधियां पारदर्शी होंगी। कमिश्नर एमपी अग्रवाल ने कहा कि बतौर रिसीवर उन्होंने अधिगृहित क्षेत्र समेत रामलला की समस्त चल-अचल संपत्तियां श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी विमिलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र को विधिवत बुधवार शाम को सौंप दी है।