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यूपी पीडब्ल्यूडी में खेल: चहेते ठेकेदारों को फायदा पहुंचाकर सरकार को चूना लगा रहे अधिकारी, ऐसे हुआ खुलासा
Tue, 01 Nov 2022 08:28 AM IST
शाहरुख खान
अजीत बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ
अजीत बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 01 Nov 2022 08:28 AM IST
सार
लखनऊ में पीडब्ल्यूडी मुख्यालय के भीतर भी काम कराने में प्राइवेट मशीनों और प्लांट का प्रयोग किया गया। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि क्षेत्रीय मुख्य अभियंता इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि जिन जिलों में विभागीय प्लांट हैं, उनमें प्लांट की परिधि के50 किमी के अंदर इन्हें से कार्य कराए जाएं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
यूपी पीडब्ल्यूडी में सड़क निर्माण में निजी ठेकेदारों की मशीनों के इस्तेमाल का बड़ा खेल चल रहा है। विभागीय हॉटमिक्स प्लांट और सहायक मशीनें खाली खड़े हैं लेकिन निजी ठेकेदारों से इन्हें किराए पर लेकर सरकार को भारी-भरकम चूना लगाया जा रहा है। स्थिति का अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि चालू वित्त वर्ष में अभी तक इन प्लांट व मशीनरी की कुल क्षमता के महज 15.65 फीसदी हिस्से का ही इस्तेमाल हुआ है।
वहीं, लखनऊ में पीडब्ल्यूडी मुख्यालय के भीतर भी काम कराने में प्राइवेट मशीनों और प्लांट का प्रयोग किया गया। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि क्षेत्रीय मुख्य अभियंता इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि जिन जिलों में विभागीय प्लांट हैं, उनमें प्लांट की परिधि के50 किमी के अंदर इन्हें से कार्य कराए जाएं।
हकीकत में तमाम खंडों में स्थिति इसके उलट है। इन सरकारी आदेशों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, वर्तमान में विभिन्न जोनों में उसके पास चालू हालत में कुल 30 हॉटमिक्स प्लांट हैं। इनके अलावा रोलर, टिपर, ट्रक व ट्रैक्टर और पानी के टैंकर आदि हैं, जो प्लांट के साथ ही प्रयोग में आते हैं।
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लखनऊ मध्य क्षेत्र में कुल आठ प्लांट हैं और इस वित्त वर्ष में अभी तक इनकी क्षमता का मात्र 25.14 प्रतिशत का ही इस्तेमाल हुआ है। इसके बावजूद हाल ही में पीडब्ल्यूडी विभागाध्यक्ष कार्यालय में ही निजी प्लांट व मशीनों से काम कराया गया। इतना ही नहीं अक्तूबर मेंं ही यहां के निर्माण खंड में विभिन्न कार्य निजी मशीनों से कराने के लिए ही टेंडर आमंत्रित किए गए हैं।
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वहीं, लखनऊ में पीडब्ल्यूडी मुख्यालय के भीतर भी काम कराने में प्राइवेट मशीनों और प्लांट का प्रयोग किया गया। शासन के स्पष्ट निर्देश हैं कि क्षेत्रीय मुख्य अभियंता इस बात को सुनिश्चित करेंगे कि जिन जिलों में विभागीय प्लांट हैं, उनमें प्लांट की परिधि के50 किमी के अंदर इन्हें से कार्य कराए जाएं।
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हकीकत में तमाम खंडों में स्थिति इसके उलट है। इन सरकारी आदेशों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक, वर्तमान में विभिन्न जोनों में उसके पास चालू हालत में कुल 30 हॉटमिक्स प्लांट हैं। इनके अलावा रोलर, टिपर, ट्रक व ट्रैक्टर और पानी के टैंकर आदि हैं, जो प्लांट के साथ ही प्रयोग में आते हैं।
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लखनऊ मध्य क्षेत्र में कुल आठ प्लांट हैं और इस वित्त वर्ष में अभी तक इनकी क्षमता का मात्र 25.14 प्रतिशत का ही इस्तेमाल हुआ है। इसके बावजूद हाल ही में पीडब्ल्यूडी विभागाध्यक्ष कार्यालय में ही निजी प्लांट व मशीनों से काम कराया गया। इतना ही नहीं अक्तूबर मेंं ही यहां के निर्माण खंड में विभिन्न कार्य निजी मशीनों से कराने के लिए ही टेंडर आमंत्रित किए गए हैं।
इसी तरह से आगरा क्षेत्र में कुल क्षमता का 1.88 प्रतिशत, बरेली में 30.04 प्रतिशत, प्रयागराज में 4.85 प्रतिशत, अयोध्या में 25.37 प्रतिशत, गोरखपुर में 1.46 प्रतिशत, झांसी में 0.77 प्रतिशत, कानपुर में 7.83 प्रतिशत, मुरादाबाद में 39.22 प्रतिशत, सहारनपुर में 8.28 प्रतिशत और वाराणसी क्षेत्र में 9.51 प्रतिशत क्षमता का ही अभी तक इस्तेमाल किया गया है।
अलीगढ़ और आजमगढ़ में खड़े 2-2 प्लांट से इस वित्त वर्ष में कोई काम ही नहीं लिया गया है। विभाग के ही कुछ इंजीनियरों का कहना है कि अगर निजी ठेकेदारों की मशीनों से काम कराने की जांच करा ली जाए तो पूरा खेल खुलते देर नहीं लगेगी। इसमें उच्चाधिकारियों की मिलीभगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
विभागीय प्लांट व मशीनरी के शत-प्रतिशत उपयोग के निर्देश दिए गए हैं। जहां लापरवाही सामने आएगी, वहां संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।-संदीप कुमार, विभागाध्यक्ष, पीडब्ल्यूडी
अलीगढ़ और आजमगढ़ में खड़े 2-2 प्लांट से इस वित्त वर्ष में कोई काम ही नहीं लिया गया है। विभाग के ही कुछ इंजीनियरों का कहना है कि अगर निजी ठेकेदारों की मशीनों से काम कराने की जांच करा ली जाए तो पूरा खेल खुलते देर नहीं लगेगी। इसमें उच्चाधिकारियों की मिलीभगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
विभागीय प्लांट व मशीनरी के शत-प्रतिशत उपयोग के निर्देश दिए गए हैं। जहां लापरवाही सामने आएगी, वहां संबंधित के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।-संदीप कुमार, विभागाध्यक्ष, पीडब्ल्यूडी