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लखनऊ विवि के एसोसिएट प्रोफेसर के समर्थन में आए भीम आर्मी चीफ
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लखनऊ विवि के शिक्षक के समर्थन में आए भीम आर्मी चीफ।
- फोटो : ??? ?????
काशी विश्वनाथ मंदिर पर विवादित बयान देने वाले लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. रविकांत के समर्थन में भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर आजाद आए हैं।
उन्होंने न सिर्फ इस मामले में डॉ. रविकांत से फोन पर बात की बल्कि ट्वीट करके भी अपना समर्थन जताया है।
चंद्रशेखर ने ट्वीट कर कहा है कि क्या ज्ञान का ठेका चंद जातियों ने ही ले रखा है? वंचितों के मुद्दे पर मुखर लविवि शिक्षक के खिलाफ इस तरह का विरोध बहुजन विचार की हत्या है।
हम साथ खड़े हैं, किसी कीमत पर अन्याय नहीं होने देंगे। अराजकता फैलाने वालों को गिरफ्तार किया जाए। उनके इस ट्वीट पर कई अन्य लोगों ने समर्थन में ट्वीट किया है।
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डॉ. रविकांत की इस मुद्दे पर चंद्रशेखर से फोन पर भी बात हुई है। उन्होंने सुरक्षा आदि मुद्दों पर बात की और कहा कि वह उनके साथ हैं। दलितों, आदिवासियों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता है।
इस पर मिलकर संघर्ष किया जाएगा। वहीं, डॉ. रविकांत ने एबीवीपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ तहरीर देने के बाद भी मुकदमा दर्ज न होने पर नाराजगी जताई और इस मामले में उन्होंने पुलिस आयुक्त से भी मुलाकात की है।
उधर, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष एसआर दारापुरी ने भी डॉ. रविकांत के विरोध में हुए इस तरह के प्रदर्शन की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
कहा कि रविकांत ने डिबेट में कोई गलत बात नहीं कही है। बता दें कि रविवार को एक डिबेट में डॉ. रविकांत ने इतिहासकार पट्टाभि सीतारमैया की किताब का हवाला देते हुए टिप्पणी की थी।
इसका एबीवीपी की ओर से विश्वविद्यालय में तीखा विरोध दर्ज कराया गया था और अभी भी कार्यकर्ता उनके निलंबन की मांग पर अड़े हैं।
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उन्होंने न सिर्फ इस मामले में डॉ. रविकांत से फोन पर बात की बल्कि ट्वीट करके भी अपना समर्थन जताया है।
चंद्रशेखर ने ट्वीट कर कहा है कि क्या ज्ञान का ठेका चंद जातियों ने ही ले रखा है? वंचितों के मुद्दे पर मुखर लविवि शिक्षक के खिलाफ इस तरह का विरोध बहुजन विचार की हत्या है।
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हम साथ खड़े हैं, किसी कीमत पर अन्याय नहीं होने देंगे। अराजकता फैलाने वालों को गिरफ्तार किया जाए। उनके इस ट्वीट पर कई अन्य लोगों ने समर्थन में ट्वीट किया है।
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डॉ. रविकांत की इस मुद्दे पर चंद्रशेखर से फोन पर भी बात हुई है। उन्होंने सुरक्षा आदि मुद्दों पर बात की और कहा कि वह उनके साथ हैं। दलितों, आदिवासियों की आवाज को दबाया नहीं जा सकता है।
इस पर मिलकर संघर्ष किया जाएगा। वहीं, डॉ. रविकांत ने एबीवीपी कार्यकर्ताओं के खिलाफ तहरीर देने के बाद भी मुकदमा दर्ज न होने पर नाराजगी जताई और इस मामले में उन्होंने पुलिस आयुक्त से भी मुलाकात की है।
उधर, आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के राष्ट्रीय अध्यक्ष एसआर दारापुरी ने भी डॉ. रविकांत के विरोध में हुए इस तरह के प्रदर्शन की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
कहा कि रविकांत ने डिबेट में कोई गलत बात नहीं कही है। बता दें कि रविवार को एक डिबेट में डॉ. रविकांत ने इतिहासकार पट्टाभि सीतारमैया की किताब का हवाला देते हुए टिप्पणी की थी।
इसका एबीवीपी की ओर से विश्वविद्यालय में तीखा विरोध दर्ज कराया गया था और अभी भी कार्यकर्ता उनके निलंबन की मांग पर अड़े हैं।