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Lucknow News: हौसले को मिली पदक की उड़ान
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लखनऊ। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विवि के सातवें दीक्षांत समारोह में बुधवार को पदक पाकर मेधावियों के हौसले को उड़ान मिल गई। भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष पद्मश्री चमू कृष्ण शास्त्री के साथ उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय और राज्य मंत्री रजनी तिवारी की उपस्थिति में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उनको पदक प्रदान किए। बीए ऑनर्स अरबी की छात्रा नूर फातिमा ने 93.29 फीसदी अंकों के साथ ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती पदक व कुलाधिपति पदक प्राप्त किया तो वहीं बीएड पाठ्यक्रम में टॉप करने वाले कार्तिकेय तिवारी ने 87.85 फीसदी अंक के साथ कुलपति पदक हासिल किया। राज्यपाल ने अवधी, भोजपुरी, ब्रज व बुंदेली भाषाओं के लोक गीतों के संग्रह व दीक्षांत स्मारिका के विमोचन के साथ विवि परिसर के नवनिर्मित पार्किंग स्थल का लोकार्पण भी किया। 890 विद्यार्थियों को उपाधि प्रदान की गई। साथ ही 47 छात्र व 63 छात्राओं को 110 स्वर्ण, रजत व कांस्य पदक प्रदान किए गए। 110 पदकों में एक ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती पदक, एक कुलाधिपति पदक, एक कुलपति पदक, स्नातक पाठ्यक्रमों में 27 स्वर्ण, 21 रजत, 19 कांस्य, परास्नातक पाठ्यक्रमों में 17 स्वर्ण, 13 रजत व 13 कांस्य पदक शामिल हैं। कुलपति प्रो. एनबी सिंह ने सभी को धन्यवाद दिया। संचालन डॉ. नीरज ने किया।
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मातृभाषा में पढ़ाई हर विद्यार्थी का अधिकार : चमू कृष्ण शास्त्री
पद्मश्री चमू कृष्ण शास्त्री ने कहा है कि मातृभाषा में शिक्षा पाना हर विद्यार्थी का अधिकार है। नई शिक्षा नीति में भी क्षेत्रीय और भारतीय भाषाओं की बात की गई है। इसलिए हमारी जिम्मेदारी है कि हम भारतीय भाषाओं में पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि भारत एक बहुभाषाओं के परिवार वाला देश है। भाषाओं की बहुलता यहां की सांस्कृतिक विशेषता है। यह विशेषता ही भारत का सौंदर्य है। भाषा और संस्कृति को अलग नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हर पेशे की जरूरत के हिसाब से कोर्स संचालित करने चाहिए। ऐसा करने पर हमारी भाषा रोजगार से भी जुड़ जाएगी। कहा कि हमें देश में अंग्रेजी के प्रति बना हुआ ईकोसिस्टम खत्म करना होगा। तभी देश और भारतीय भाषाओं का विकास होगा।
विश्वविद्यालयों में भारतीय भाषाओं में तैयार होंगी किताबें : राज्यपाल
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों को भारतीय भाषाओं में पाठ्य पुस्तकें तैयार करने का निर्देश दिया जा रहा है। बुधवार सुबह ही विवि अनुदान आयोग से इस संबंध में पत्र प्राप्त हुआ है। इसे देखते हुए पाठ्य पुस्तकों के अनुवाद के लिए कहा गया है। भाषा विवि को इसमें अहम भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को सरकारी योजनाओं पर काम करना चाहिए। दीक्षांत में पदक विजेताओं में बेटियों का वर्चस्व देखकर उन्होंने कहा कि इसी तरह मेहनत करते रहिए। उन्होंने अल्लूनगर डिगुरिया के सरकारी स्कूल के बच्चों को बैग और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बच्चों के लिए खिलौने दिए।
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पारंपरिक शिक्षा से हटने का नतीजा है टुकड़े-टुकड़े गैंग
दीक्षांत समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि यह देश राम और कृष्ण का है। शिव ने इसे उत्तर से लेकर दक्षिण तक एकता के सूत्र में पिरोया है। अपने अतीत और पारंपरिक शिक्षा से अलग होने का नतीजा ही टुकड़े-टुकड़े गैंग के रूप में सामने आ रहा है। उन्होंने कहा, अगर शिक्षा दिग्भ्रमित होती रहेगी तो जेएनयू जैसी स्थितियां सामने आती रहेंगी। हमें चाहिए कि एक तरफ हम आधुनिकता की बात करें, साथ ही अतीत को भी जोड़ते चलें। शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने विद्यार्थियों को दिल की आवाज सुनकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
भाषा विवि में शुरू होंगे आम की खेती पर आधारित पाठ्यक्रम
भाषा विवि के कुलपति प्रो. एनबी सिह ने बताया कि विवि ने थोड़े ही समय में अलग मुकाम हासिल किया है। इसे और बेहतर बनाने के लिए विवि में अगले सत्र से एलएलबी और फॉर्मा की पढ़ाई शुरू की जाएगी। नई शिक्षा नीति के तहत विवि में आम की खेती और इसके विपणन पर आधारित पाठ्यक्रमों का संचालन शुरू किया जाएगा।
मानद उपाधि के स्थान पर दिया मानपत्र
विवि के दीक्षांत समारोह में पूर्व के वर्षों में मुख्य अतिथि को मानद उपाधि दिए जाने की परंपरा रही है। इसके बावजूद मुख्य अतिथि पद्मश्री चमू कृष्ण शास्त्री को मानद उपाधि के बजाय मानपत्र दिया गया। असल में इसके पीछे एक विशेष वजह रही। विवि में अभी तक एक भी विद्यार्थी को पीएचडी की उपाधि नहीं मिली है। इसी वजह से विवि प्रशासन ने मानद उपाधि भी न देने का फैसला किया।
मेधावियों से बातचीत -
प्रोफेसर बन शिक्षा के क्षेत्र में करूंगी काम
टीचिंग से प्रेम है, खाली समय में बच्चों को पढ़ाती थी। परिवार में कोई उच्च शिक्षा हासिल न कर पाया तो मैंने आगे पढ़ने की ठानी। प्रोफेसर बनकर शिक्षा के क्षेत्र में शोधपरक कार्य करना चाहती हूं। पापा इशरत गांव के प्रधान होने के साथ ही खेती करते है। मां निशा अहमद गृहिणी हैं।
- नूर फातिमा एमए अरेबिक, कुलाधिपति पदक, ख्वाजा मुईनुद्दीन पदक, संकाय पदक और विभाग पदक
एसडीएम बन करूंगा सेवा
यूपी पीसीएस की तैयारी कर रहा हूं। एसडीएम बनकर जनता की सेवा करने सपना है। पिता जगदीश नारायण तिवारी सरकारी चिकित्सक थे। मां पवन तिवारी गृहिणी हैं।
कार्तिकेय तिवारी, बीएड- कुलपति पदक, संकाय पदक और विभागीय पदक
शिक्षक बनकर पूरा करूंगी सपना
प्राइमरी स्कूल में शिक्षक बनकर काम करने का सपना है। ग्रामीण अंचल के बच्चों को बेहतर शिक्षा प्राप्त हो, इस पर काम करना है। पापा कौशल किशोर दीक्षित प्राॅपर्टी डीलर हैं। मां सरला गृहिणी हैं।
प्रतिमा दीक्षित, स्वर्ण पदक- बीए हिंदी
जहां से पढ़ी, वहीं पढ़ाना है
पीएचडी करके प्रोफेसर बनना है। दिली इच्छा है कि जिस विवि से पढ़ी हूं, वहीं पर पढ़ाऊं। पापा रफीक शेख राजकीय पीजी कॉलेज भोपाल में लाइब्रेरियन हैं तो शिक्षा का परिवेश हमेशा से ही घर पर रहा।
अलीजा शेख, स्वर्ण पदक- बीए अंग्रेजी
सिविल सेवा में जाना है
भविष्य में सिविल सेवक बनकर देश और प्रदेश का नाम रोशन करना है। कोई भी सरकारी अधिकारी किसी गरीब का शोषण न करने पाए ये भी सुनिश्चित करवाना है। पापा सलाउद्दीन सिद्दीकी दर्जी का काम करते हैं। मां अफरोजजहां सामान्य गृहिणी हैं।
नुसरत जहां, स्वर्ण पदक- बीए राजनीतिक शास्त्र
शिक्षक बनकर लाना है बदलाव
शिक्षक बनकर समाज में बदलाव लाने का सपना है। बेटियां पढ़ाई के लिए आगे आएं, इसके लिए प्रेरणा बनना है। पापा मुईन अहमद चिकन कारीगर हैं, मां भी उनका हाथ बंटाती हैं। मुझे परिवार का नाम रोशन करना है।
बुसरा सिद्दिकी, स्वर्ण पदक- बीएससी गृह विज्ञान
पत्रकारिता में करना है शोध
पत्रकारिता में मौजूदा विषयों पर शोध करना है। इसी क्षेत्र में शिक्षक बनना है। नवाचार को बढ़ावा देते हुए ऐसा साहित्य लिखना है जो लंबे समय तक चलन में रहे। मां रानी बानो अंसारी निजी अस्पताल में नर्स हैं।
मुस्कान बानो, स्वर्ण पदक- एमए पत्रकारिता एवं जनसंचार
सरकारी अफसर बनकर करूंगा सेवा
सरकारी अफसर बनकर देश और क्षेत्र के लोगों की सेवा करना चाहता हूं। यह सिविल सेवा से ही संभव है। इसलिए तैयारी कर रहा हूं। पापा रियाज खान सरकारी शिक्षक व मां सूफिया गृहिणी हैं।
मो. अयाज खान, स्वर्ण पदक- बीए इतिहास
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मातृभाषा में पढ़ाई हर विद्यार्थी का अधिकार : चमू कृष्ण शास्त्री
पद्मश्री चमू कृष्ण शास्त्री ने कहा है कि मातृभाषा में शिक्षा पाना हर विद्यार्थी का अधिकार है। नई शिक्षा नीति में भी क्षेत्रीय और भारतीय भाषाओं की बात की गई है। इसलिए हमारी जिम्मेदारी है कि हम भारतीय भाषाओं में पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराएं। उन्होंने कहा कि भारत एक बहुभाषाओं के परिवार वाला देश है। भाषाओं की बहुलता यहां की सांस्कृतिक विशेषता है। यह विशेषता ही भारत का सौंदर्य है। भाषा और संस्कृति को अलग नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हर पेशे की जरूरत के हिसाब से कोर्स संचालित करने चाहिए। ऐसा करने पर हमारी भाषा रोजगार से भी जुड़ जाएगी। कहा कि हमें देश में अंग्रेजी के प्रति बना हुआ ईकोसिस्टम खत्म करना होगा। तभी देश और भारतीय भाषाओं का विकास होगा।
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विश्वविद्यालयों में भारतीय भाषाओं में तैयार होंगी किताबें : राज्यपाल
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों को भारतीय भाषाओं में पाठ्य पुस्तकें तैयार करने का निर्देश दिया जा रहा है। बुधवार सुबह ही विवि अनुदान आयोग से इस संबंध में पत्र प्राप्त हुआ है। इसे देखते हुए पाठ्य पुस्तकों के अनुवाद के लिए कहा गया है। भाषा विवि को इसमें अहम भूमिका निभानी होगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय को सरकारी योजनाओं पर काम करना चाहिए। दीक्षांत में पदक विजेताओं में बेटियों का वर्चस्व देखकर उन्होंने कहा कि इसी तरह मेहनत करते रहिए। उन्होंने अल्लूनगर डिगुरिया के सरकारी स्कूल के बच्चों को बैग और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को बच्चों के लिए खिलौने दिए।
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पारंपरिक शिक्षा से हटने का नतीजा है टुकड़े-टुकड़े गैंग
दीक्षांत समारोह में उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि यह देश राम और कृष्ण का है। शिव ने इसे उत्तर से लेकर दक्षिण तक एकता के सूत्र में पिरोया है। अपने अतीत और पारंपरिक शिक्षा से अलग होने का नतीजा ही टुकड़े-टुकड़े गैंग के रूप में सामने आ रहा है। उन्होंने कहा, अगर शिक्षा दिग्भ्रमित होती रहेगी तो जेएनयू जैसी स्थितियां सामने आती रहेंगी। हमें चाहिए कि एक तरफ हम आधुनिकता की बात करें, साथ ही अतीत को भी जोड़ते चलें। शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी ने विद्यार्थियों को दिल की आवाज सुनकर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
भाषा विवि में शुरू होंगे आम की खेती पर आधारित पाठ्यक्रम
भाषा विवि के कुलपति प्रो. एनबी सिह ने बताया कि विवि ने थोड़े ही समय में अलग मुकाम हासिल किया है। इसे और बेहतर बनाने के लिए विवि में अगले सत्र से एलएलबी और फॉर्मा की पढ़ाई शुरू की जाएगी। नई शिक्षा नीति के तहत विवि में आम की खेती और इसके विपणन पर आधारित पाठ्यक्रमों का संचालन शुरू किया जाएगा।
मानद उपाधि के स्थान पर दिया मानपत्र
विवि के दीक्षांत समारोह में पूर्व के वर्षों में मुख्य अतिथि को मानद उपाधि दिए जाने की परंपरा रही है। इसके बावजूद मुख्य अतिथि पद्मश्री चमू कृष्ण शास्त्री को मानद उपाधि के बजाय मानपत्र दिया गया। असल में इसके पीछे एक विशेष वजह रही। विवि में अभी तक एक भी विद्यार्थी को पीएचडी की उपाधि नहीं मिली है। इसी वजह से विवि प्रशासन ने मानद उपाधि भी न देने का फैसला किया।
मेधावियों से बातचीत -
प्रोफेसर बन शिक्षा के क्षेत्र में करूंगी काम
टीचिंग से प्रेम है, खाली समय में बच्चों को पढ़ाती थी। परिवार में कोई उच्च शिक्षा हासिल न कर पाया तो मैंने आगे पढ़ने की ठानी। प्रोफेसर बनकर शिक्षा के क्षेत्र में शोधपरक कार्य करना चाहती हूं। पापा इशरत गांव के प्रधान होने के साथ ही खेती करते है। मां निशा अहमद गृहिणी हैं।
- नूर फातिमा एमए अरेबिक, कुलाधिपति पदक, ख्वाजा मुईनुद्दीन पदक, संकाय पदक और विभाग पदक
एसडीएम बन करूंगा सेवा
यूपी पीसीएस की तैयारी कर रहा हूं। एसडीएम बनकर जनता की सेवा करने सपना है। पिता जगदीश नारायण तिवारी सरकारी चिकित्सक थे। मां पवन तिवारी गृहिणी हैं।
कार्तिकेय तिवारी, बीएड- कुलपति पदक, संकाय पदक और विभागीय पदक
शिक्षक बनकर पूरा करूंगी सपना
प्राइमरी स्कूल में शिक्षक बनकर काम करने का सपना है। ग्रामीण अंचल के बच्चों को बेहतर शिक्षा प्राप्त हो, इस पर काम करना है। पापा कौशल किशोर दीक्षित प्राॅपर्टी डीलर हैं। मां सरला गृहिणी हैं।
प्रतिमा दीक्षित, स्वर्ण पदक- बीए हिंदी
जहां से पढ़ी, वहीं पढ़ाना है
पीएचडी करके प्रोफेसर बनना है। दिली इच्छा है कि जिस विवि से पढ़ी हूं, वहीं पर पढ़ाऊं। पापा रफीक शेख राजकीय पीजी कॉलेज भोपाल में लाइब्रेरियन हैं तो शिक्षा का परिवेश हमेशा से ही घर पर रहा।
अलीजा शेख, स्वर्ण पदक- बीए अंग्रेजी
सिविल सेवा में जाना है
भविष्य में सिविल सेवक बनकर देश और प्रदेश का नाम रोशन करना है। कोई भी सरकारी अधिकारी किसी गरीब का शोषण न करने पाए ये भी सुनिश्चित करवाना है। पापा सलाउद्दीन सिद्दीकी दर्जी का काम करते हैं। मां अफरोजजहां सामान्य गृहिणी हैं।
नुसरत जहां, स्वर्ण पदक- बीए राजनीतिक शास्त्र
शिक्षक बनकर लाना है बदलाव
शिक्षक बनकर समाज में बदलाव लाने का सपना है। बेटियां पढ़ाई के लिए आगे आएं, इसके लिए प्रेरणा बनना है। पापा मुईन अहमद चिकन कारीगर हैं, मां भी उनका हाथ बंटाती हैं। मुझे परिवार का नाम रोशन करना है।
बुसरा सिद्दिकी, स्वर्ण पदक- बीएससी गृह विज्ञान
पत्रकारिता में करना है शोध
पत्रकारिता में मौजूदा विषयों पर शोध करना है। इसी क्षेत्र में शिक्षक बनना है। नवाचार को बढ़ावा देते हुए ऐसा साहित्य लिखना है जो लंबे समय तक चलन में रहे। मां रानी बानो अंसारी निजी अस्पताल में नर्स हैं।
मुस्कान बानो, स्वर्ण पदक- एमए पत्रकारिता एवं जनसंचार
सरकारी अफसर बनकर करूंगा सेवा
सरकारी अफसर बनकर देश और क्षेत्र के लोगों की सेवा करना चाहता हूं। यह सिविल सेवा से ही संभव है। इसलिए तैयारी कर रहा हूं। पापा रियाज खान सरकारी शिक्षक व मां सूफिया गृहिणी हैं।
मो. अयाज खान, स्वर्ण पदक- बीए इतिहास