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ट्रॉमा सर्जरी में बेड फुल, वार्ड के बाहर लाइन से पड़े मरीज्र
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केजीएमयू ट्रॉमा सर्जरी के बेड फुल, वार्ड के बाहर वेटिंग में पड़े मरीज
लखनऊ। केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में मरीजों को मुकम्मल इलाज मिलना मुश्किल होता जा रहा है। ट्रॉमा सर्जरी विभाग के बाहर कोई चार घंटे से कोई आठ घंटे से भर्ती होने के इंतजार में पड़ा था। बृहस्पतिवार दोपहर करीब दस मरीज वार्ड के बाहर वेटिंग में पड़े थे। तीमारदारों का आरोप था कि विभाग में जगह न होने से उन्हें बाहर रोका गया था। ऐसे में तमाम मरीजों की हालत बिगड़ता देख उन्हें तीमारदार निजी अस्पताल लेकर चले गए।
लखीमपुरखीरी का रहने वाले दिव्यांग अल्ताफ (40) को गंभीर हालत में बुधवार रात तीमारदार लाए थे। जहां बेड न होने का हवाला देकर जूनियर डॉक्टरों ने मरीज को बाहर कर दिया। बृहस्पतिवार दोपहर करीब दो बजे विभाग के बाहर आठ दस मरीज स्ट्रेचर पर भर्ती होने के इंतजार में पड़े थे। तीमारदारों का आरोप था कि सिफारिशी मरीजों को सीधे भर्ती किया जा रहा है, बाकी मरीज चार से छह घंटे तक इंतजार में पड़े थे। डॉक्टर सुनने को तैयार नहीं थे। तीमारदारों का आरोप था कि कर्मचारी उन्हें यहां की बजाए अपने निजी अस्पताल ले जाने की सलाह दे रहे थे। कई मरीजों को निजी अस्पताल भेज दिया गया था। प्रवक्ता डॉ. संदीप तिवारी का कहना है कि ट्रॉमा में मरीजों का बहुत अधिक लोड है। अति गंभीर मरीजों का प्राथमिकता से उपचार दिया जाता है।
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लखनऊ। केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर में मरीजों को मुकम्मल इलाज मिलना मुश्किल होता जा रहा है। ट्रॉमा सर्जरी विभाग के बाहर कोई चार घंटे से कोई आठ घंटे से भर्ती होने के इंतजार में पड़ा था। बृहस्पतिवार दोपहर करीब दस मरीज वार्ड के बाहर वेटिंग में पड़े थे। तीमारदारों का आरोप था कि विभाग में जगह न होने से उन्हें बाहर रोका गया था। ऐसे में तमाम मरीजों की हालत बिगड़ता देख उन्हें तीमारदार निजी अस्पताल लेकर चले गए।
लखीमपुरखीरी का रहने वाले दिव्यांग अल्ताफ (40) को गंभीर हालत में बुधवार रात तीमारदार लाए थे। जहां बेड न होने का हवाला देकर जूनियर डॉक्टरों ने मरीज को बाहर कर दिया। बृहस्पतिवार दोपहर करीब दो बजे विभाग के बाहर आठ दस मरीज स्ट्रेचर पर भर्ती होने के इंतजार में पड़े थे। तीमारदारों का आरोप था कि सिफारिशी मरीजों को सीधे भर्ती किया जा रहा है, बाकी मरीज चार से छह घंटे तक इंतजार में पड़े थे। डॉक्टर सुनने को तैयार नहीं थे। तीमारदारों का आरोप था कि कर्मचारी उन्हें यहां की बजाए अपने निजी अस्पताल ले जाने की सलाह दे रहे थे। कई मरीजों को निजी अस्पताल भेज दिया गया था। प्रवक्ता डॉ. संदीप तिवारी का कहना है कि ट्रॉमा में मरीजों का बहुत अधिक लोड है। अति गंभीर मरीजों का प्राथमिकता से उपचार दिया जाता है।
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