केजीएमयू में कोरोना वारयस पर बीसीजी टीके का ट्रायल शुरू, DCGI ने भी दी मंजूरी
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बीसीजी (बैसिलस कैलमेटी गुएरिन) का टीका कोरोना वायरस को रोकने में कितना कारगर है, इसका पता लगाने के लिए केजीएमयू में ट्रायल शुरू हो गया है। चिकित्सा विश्वविद्यालय कोरोना के मरीजों के संपर्क में आने वाले लोगों को बीसीजी का टीका लगाकर उसका असर जांचेगा।
यह ट्रायल 3 से 6 महीने में पूरा होगा। इसके लिए ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से भी हरी झंडी मिल गई है। केजीएमयू की एथिकल कमेटी ने भी इसे मंजूरी दे दी है। ट्रायल वैक्सीन निर्माता कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सहयोग से किया जा रहा है।
देश में बीसीजी का टीका जन्म के बाद हर बच्चे को लगाया जाता है। चीन, अमेरिका सहित विभिन्न देशों में किए गए अध्ययन में यह सामने आया था कि जिनको बीसीजी का टीका लगा है, उन्हें कोरोना वायरस का खतरा कम है। ऑस्ट्रेलिया के मर्डोक चिल्ड्रन इंस्टीट्यूट भी चार हजार लोगों पर बीसीजी का ट्रायल कर रहा है। इसे बेस स्टडी का नाम दिया गया है।
यूपी में यह जिम्मेदारी केजीएमयू को मिली है। केजीएमयू में कोरोना वायरस के संक्रमित मरीजों की जांच से लेकर इलाज तक की व्यवस्था है। यहां गंभीर मरीज भी भर्ती हैं। गर्भवती महिला से लेकर बच्चे तक भर्ती हैं। इन दिनों 15 मरीज यहां भर्ती हैं। यहां के लैब में करीब 20 हजार लोगों की जांच की जा चुकी है।
तीन ग्रुप होंगे... 170 लोगों पर करेंगे ट्रायल
संक्रामक रोग नियंत्रण यूनिट के प्रभारी डॉ. हिमांशु बताते हैं कि ट्रायल में 170 लोगों को शामिल किया जा रहा है। इन्हें तीन ग्रुप में बांटा गया है। ट्रायल में शामिल होने वालों की उम्र 18 वर्ष से अधिक होगी और वह किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित नहीं होगा। पहले ग्रुप में कोरोना मरीजों के सीधे संपर्क में आए लोग, दूसरे ग्रुप में कम संपर्क में आए और तीसरे ग्रुप में स्वास्थ्य कर्मियों को रखा गया है।
सभी की ली जाएगी सहमति
ट्रायल के लिए सभी की सहमति ली जाएगी। उनकी काउंसलिंग की जाएगी। इसके बाद टीका लगाया जाएगा। इस दौरान देखा जाएगा कि जिन लोगों को टीका लगा, उन पर कोरोना वायरस का असर कितना हुआ। इसका विस्तृत अध्ययन कर नतीजे को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया को भेजा जाएगा।