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भूमि और कृषि समस्याओं का समाधान करेगा बीबीएयू

Sat, 09 Jan 2021 01:56 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Sat, 09 Jan 2021 01:56 AM IST
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BBAU will resolve agriculture related problems
उत्तर प्रदेश के साथ उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के गांवों तक पहुंचाई जाएगी जैविक खेती
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बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भूमि और कृषि संबंधी समस्याओं के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी का उपयोग कर समाधान तलाशेगा। इसके लिए विवि के पर्यावरण विज्ञान विभाग को विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग-इक्विटी, एम्पावरमेंट एंड डेवलपमेंट विभाग की ओर से प्रोजेक्ट मिला है। इसके तहत विवि उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात क्षेत्र, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के छह-छह गांवों में मिट्टी के सुधार और अन्य कृषि आधारित मौलिक समस्याओं के समाधान के लिए काम करेगा।
पर्यावरण विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा की टीम के अलावा, संबंधित राज्यों के तीन एनजीओ भी इस परियोजना में साझीदार होंगे। परियोजना के प्रधान अन्वेषक प्रो. अरोड़ा गांवों में उचित पैदावार के लिए तीनों साझीदारों का नेतृत्व करेंगे। उनकी टीम जैविक खेती, कृषि अपशिष्ट प्रबंधन, उत्पादों में मूल्यवर्धन और किसानों की मूलभूत समस्याओं के समाधान में मदद करेंगे। जैव उर्वरक और प्रौद्योगिकी के माध्यम से जागरूकता प्रदान करेंगे एवं जैविक खेती को इन गांवों तक पहुंचाएंगे।
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विवि की प्रवक्ता डॉ. रचना गंगवार ने बताया कि प्रो. अरोड़ा ने पहले से ही विकसित जैव उर्वरक के उपयोग के माध्यम से क्षारीय मिट्टी को उपजाऊ बनाने में सफलता प्राप्त की है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, नई दिल्ली से प्रो. अरोड़ा को इस परियोजना के लिए सहायता राशि प्राप्त हुई। इस बार इस परियोजना के माध्यम से प्रो. अरोड़ा का उद्देश्य इस तकनीक को व्यापक पैमाने पर विस्तारित करना और किसानों को मदद करना हैं। इससे किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। परियोजना का मुख्य उद्देश्य जैविक तरीकों का विकास करना है।
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बीबीएयू में बनेगा सामान्य सुविधा केंद्र
परियोजना के तहत विवि में एक सामान्य सुविधा केंद्र भी विकसित होगा। इसका काम गुणवत्ता वाली और प्रमाणित बीज प्रदान करने, स्वदेशी किस्मों के संरक्षण पर प्रशिक्षण, जैव उर्वरक का निर्माण करना हैै। इसके अलावा केंद्र का काम फसल कटाई के बाद के नुकसान की रोकथाम के लिए प्रौद्योगिकी, संसाधन प्रबंधन, जल और कृषि अपशिष्ट प्रबंधन, खाद्य प्रसंस्करण और उत्पाद विकास, जैविक कृषि के लाभों के साथ-साथ आधुनिक कृषि उपकरणों के उपयोग के बारे में जागरूकता प्रदान करना होगा। इसके के तहत, एक किसान उत्पादन संगठन भी बनाया जाएगा जो बागवानी और जैविक उत्पाद बनाने के लिए कृषि उपज के उपयोग में मदद करेगा। केंद्र का लक्ष्य इन ही गांवों से उद्यमियों को विकसित करना और प्रत्येक तीन राज्यों में स्टार्ट-अप शुरू करना भी होगा।

किसानों और वैज्ञानिक प्रयोगशाला के बीच स्थापित होंगे संबंध
बीबीएयू इस परियोजना के माध्यम से किसानों एवं आईसीएआर और सीएसआईआर जैसी प्रयोगशालाओें के बीच संबंध स्थापित करेगा। इसके माध्यम से किसानों को स्थिर फसलों की किस्में, स्वदेशी जर्मप्लाज्म, किस्मों का संरक्षण और प्रशिक्षण कार्यक्रमों की सुविधा दी जाएगी।
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