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बीबीएयू : छात्रों का निलंबन रुका, आईसीसी करेगी प्रकरण की जांच
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लखनऊ। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के निलंबन पर रोक लग गई है। अनुशासनात्मक समिति की ओर से छात्रों की अलग-अलग सुनवाई के बाद विवि प्रशासन ने बृहस्पतिवार शाम यह निर्णय लिया।
छात्रों के मामले की जांच इंटरनल कंप्लेंट कमेटी (आईसीसी) को सौंप दी गई है। इसकी रिपोर्ट के बाद आगे कार्रवाई होगी। छात्रा से छेड़छाड़ की भी जांच आईसीसी कर रही है। छात्रों के निलंबन के मुद्दे को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था।
बीबीएयू प्रशासन ने बीते दिनों नारायण कनौजिया, खुशबू, नम्रता, अखिलेश, आलोक, अंजली, ज्योति, मृत्युंजय, शुभम को अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया था। इसके साथ ही पांच अन्य छात्रों को कार्रवाई की चेतावनी देते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके बाद नाराज छात्रों ने प्रदर्शन शुरू किया था।
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बुधवार को छात्र रातभर धरने पर बैठे रहे। बृहस्पतिवार को कुलपति प्रो. राजकुमार मित्तल ने छात्रों की समस्या सुनने का आश्वासन दिया था। शुक्रवार को अनुशासनात्मक समिति ने मामले की सुनवाई की।
छात्र बोले-शिकायत वापस लेने का बनाया जा रहा दबाव
निलंबित छात्रों का कहना है कि बीते दिनों विश्वविद्यालय के संघमित्रा विस्तार महिला छात्रावास में छात्रा से कर्मचारी ने छेड़छाड़ की थी। इसके लिए उन्होंने आवाज उठाई तो उसी आरोप में अनुशासनहीनता बताकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें निलंबित कर दिया। छात्रों का आरोप है कि अब विश्वविद्यालय की ओर से छात्रा से छेड़छाड़ मामले की शिकायत को वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है।
छात्रों के मामले की जांच इंटरनल कंप्लेंट कमेटी (आईसीसी) को सौंप दी गई है। इसकी रिपोर्ट के बाद आगे कार्रवाई होगी। छात्रा से छेड़छाड़ की भी जांच आईसीसी कर रही है। छात्रों के निलंबन के मुद्दे को अमर उजाला ने प्रमुखता से उठाया था।
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बीबीएयू प्रशासन ने बीते दिनों नारायण कनौजिया, खुशबू, नम्रता, अखिलेश, आलोक, अंजली, ज्योति, मृत्युंजय, शुभम को अनुशासनहीनता के आरोप में निलंबित कर दिया था। इसके साथ ही पांच अन्य छात्रों को कार्रवाई की चेतावनी देते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसके बाद नाराज छात्रों ने प्रदर्शन शुरू किया था।
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बुधवार को छात्र रातभर धरने पर बैठे रहे। बृहस्पतिवार को कुलपति प्रो. राजकुमार मित्तल ने छात्रों की समस्या सुनने का आश्वासन दिया था। शुक्रवार को अनुशासनात्मक समिति ने मामले की सुनवाई की।
छात्र बोले-शिकायत वापस लेने का बनाया जा रहा दबाव
निलंबित छात्रों का कहना है कि बीते दिनों विश्वविद्यालय के संघमित्रा विस्तार महिला छात्रावास में छात्रा से कर्मचारी ने छेड़छाड़ की थी। इसके लिए उन्होंने आवाज उठाई तो उसी आरोप में अनुशासनहीनता बताकर विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें निलंबित कर दिया। छात्रों का आरोप है कि अब विश्वविद्यालय की ओर से छात्रा से छेड़छाड़ मामले की शिकायत को वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है।