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Lucknow News: बीबीएयू में संरक्षित किया जाएगा बारिश का पानी
Fri, 31 May 2024 05:35 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Fri, 31 May 2024 05:35 AM IST
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लखनऊ। भूगर्भ जल के कम होते स्तर को बढ़ाने के लिए बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू) परिसर में बारिश के पानी को संरक्षित किया जाएगा। परिसर में इसके लिए तालाब बनाए जाएंगे। यहां पहले से पांच छोटे तालाब हैं। दो बड़े तालाबों का और निर्माण होगा। इन तालाबों में मछली पालन होगा और कृषि कार्य में भी बारिश के पानी का उपयोग किया जाएगा।
विवि में पर्यावरण विभाग के अध्यक्ष प्रो. नरेंद्र कुमार ने बताया कि भूगर्भ जल का स्तर बढ़े, इसके लिए बीबीएयू ने बारिश के पानी को संरक्षित करने की पहल की है। यही नहीं, अनावश्यक पानी की बर्बादी को रोकने के लिए परिसर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी बनाया जाएगा। बारिश के पानी को छत पर एकत्रित कर के तालाब, खाई के जरिये सीधे जमीन के भीतर भेजा जाएगा। पर्यावरण विभाग के अनुसार, जल संरक्षण के लिए बड़ी संख्या में पौधरोपण हो रहा है। उन्होंने बताया कि बारिश के पानी की निकासी बाहर करने की बजाय परिसर में ही इसे संरक्षित किया जाएगा।
नए भवन निर्माण में रेनवाटर हार्वेस्टिंग का होना जरूरीबीबीएयू में जलस्तर को बढ़ाने के लिए जगह-जगह रेनवाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था होगी। परिसर के नए भवन में बन रहे नए छात्रावास में इसकी व्यवस्था की जा रही है। पर्यावरण विभाग के प्रोफेसर डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया कि वर्षा जल संचयन एक सरल तकनीकी प्रक्रिया है। इसके अंतर्गत छतों, पार्कों व खुले मैदानों से जमा वर्षा जल को संरक्षित किया जाता है। इस पानी का उपयोग तालाबों में मछली पालन के साथ ही पौधों व जानवरों के लिए किया जाता है। साथ ही विभिन्न कोशिकीय गतिविधियों के लिए पानी की आवश्यकताओं की पूर्ति भी होती है।
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विवि में पर्यावरण विभाग के अध्यक्ष प्रो. नरेंद्र कुमार ने बताया कि भूगर्भ जल का स्तर बढ़े, इसके लिए बीबीएयू ने बारिश के पानी को संरक्षित करने की पहल की है। यही नहीं, अनावश्यक पानी की बर्बादी को रोकने के लिए परिसर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम भी बनाया जाएगा। बारिश के पानी को छत पर एकत्रित कर के तालाब, खाई के जरिये सीधे जमीन के भीतर भेजा जाएगा। पर्यावरण विभाग के अनुसार, जल संरक्षण के लिए बड़ी संख्या में पौधरोपण हो रहा है। उन्होंने बताया कि बारिश के पानी की निकासी बाहर करने की बजाय परिसर में ही इसे संरक्षित किया जाएगा।
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नए भवन निर्माण में रेनवाटर हार्वेस्टिंग का होना जरूरीबीबीएयू में जलस्तर को बढ़ाने के लिए जगह-जगह रेनवाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था होगी। परिसर के नए भवन में बन रहे नए छात्रावास में इसकी व्यवस्था की जा रही है। पर्यावरण विभाग के प्रोफेसर डॉ. नरेंद्र कुमार ने बताया कि वर्षा जल संचयन एक सरल तकनीकी प्रक्रिया है। इसके अंतर्गत छतों, पार्कों व खुले मैदानों से जमा वर्षा जल को संरक्षित किया जाता है। इस पानी का उपयोग तालाबों में मछली पालन के साथ ही पौधों व जानवरों के लिए किया जाता है। साथ ही विभिन्न कोशिकीय गतिविधियों के लिए पानी की आवश्यकताओं की पूर्ति भी होती है।
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