UPTU: ऐसे रुकेगा नंबर बढ़वाने का दोनंबरी खेल
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उत्तर प्रदेश प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) की कॉपियों में अब हेराफेरी करने की बिल्कुल गुंजाइश नहीं होगी।
न तो परीक्षक को पता चल पाएगा कि वे किस स्टूडेंट की कॉपी जांच रहा है और न ही स्टूडेंट पता लगा पाएगा कि उसकी कॉपी कहां चेक हो रही है।
परीक्षा कॉपियों की कोडिंग और डी-कोडिंग का मैन्युअल काम अब नहीं होगा। परीक्षा की सभी कॉपियों पर अब इंटेलीजेंट केरेक्टर रिकॉग्नेशन (आईसीआर) बार कोड डाला जाएगा।
इस बार कोड की डी-कोडिंग भी ऑनलाइन यूपीटीयू प्रशासन ही अपनी मॉस्टर फाइल से करेगा। इससे दूसरा फायदा यह होगा कि स्टूडेंट की कॉपियों का मूल्यांकन होने के बाद रिजल्ट तैयार करने का काम भी जल्दी हो सकेगा।
यानी, स्टूडेंट को अब रिजल्ट के लिए लंबा इंतजार भी नहीं करना होगा। कहीं पर रोलनंबर का झंझट ही नहीं रहेगा।
ऐसे में अब सेमेस्टर परीक्षाओं में कॉपियां पूरी तरह गोपनीय हो जाएंगी। इसके बाद हमें कॉपियों की कोडिंग से डी-कोडिंग करना भी बेहद आसान होगा।
वे कहते हैं कि रिजल्ट निकालने के काम में अब हमें आसानी होगी। अभी तक रिजल्ट निकालने में काफी मेहनत करनी पड़ती है लेकिन आगे यह काम बेहद आसान हो जाएगा।
परीक्षा की कॉपियां ढूंढ़ना भी होगा आसान
कॉपियों में आईसीआर बार कोड होने के कारण अब स्टूडेंट्स की कॉपियां ढूंढ़ने में भी आसानी होगी। चैलेंज इवैल्यूएशन और सूचना के अधिकार के तहत अभी स्टूडेंट कॉपियां देखने आते हैं तो उन्हें एक निश्चित समय दिया जाता है।
यानी उन्हें कम से कम दो बार चक्कर लगाना पड़ता है। यूपीटीयू से जुड़े इंजीनियरिंग व मैनेजमेंट कॉलेजों के स्टूडेंट्स को कॉपियां दिखाना चुनौती भरा काम है लेकिन अब नई व्यवस्था के बाद स्टूडेंट्स की कॉपियां बंडलों में से ढूंढना भी बहुत आसान हो जाएगा।