यूपी: बैंकों में हड़ताल से सवा लाख करोड़ रुपये का लेनदेन प्रभावित
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यूपी में मंगलवार को बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के कारण सभी राष्ट्रीकृत बैंक बंद रहे। राजधानी में बैंककर्मियों ने केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ रैली निकाली, विभिन्न बैंकों के क्षेत्रीय मुख्यालयों पर प्रदर्शन किए तो हजरतगंज के इलाहाबाद बैंक परिसर, गोमतीनगर के विभूति खंड में स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा के अंचल कार्यालय समेत कई जगहों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली के खिलाफ जमकर नारेबाजी हुई।
यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के प्रवक्ता अनिल तिवारी ने दावा किया कि हड़ताल से अकेले राजधानी में 10 करोड़ रुपये और पूरे प्रदेश में लगभग 1.20 लाख करोड़ रुपये के चेकों का भुगतान व खाता से लेन-देन का काम नहीं हो सका।
हजरतगंज स्थित इलाहाबाद बैंक परिसर में आयोजित सभा में यूएफबीयू के प्रदेश संयोजक वाईके अरोरा ने कहा कि केंद्र सरकार बैंक कर्मियों के खिलाफ न सिर्फ गलत नीतियां ला रही है, बल्कि वार्ता के दौरान समाधान के लिए कोई बात भी नहीं कर रही है। इसलिए हड़ताल करनी पड़ी।
वहीं, कर्मचारी नेता केके सिंह और वीके सेंगर ने कहा कि वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नोटबंदी के दौरान बैंककर्मियों से पूरा सहयोग लिया, अब जब उसका बदला चुकाने के लिए कहा जा रहा है तो वे बात तक नहीं कर रहे। ऐसे में बैंक कर्मचारियों की नाराजगी है।
कई निजी बैंकों ने भी किया सांकेतिक समर्थन
यूएफबीयू के प्रवक्ताअनिल तिवारी ने दावा किया कि हड़ताल पूरे प्रदेश में सफल रही। इसमें सभी बैंकों के कर्मचारियों और संगठनों सहित सहकारी बैंकों ने भी पूरा सहयोग दिया।
वहीं, कई निजी बैंकों में कर्मचारियों ने सांकेतिक रूप से दोपहर में काम बंद रखकर अपना समर्थन जताया। इससे लोगों को बैंक सेवाएं नहीं मिल सकीं।
विभिन्न बैंकों की 14 हजार शाखाएं रहीं बंद
बैंकों की सभी संगठनों के हड़ताल में शामिल होने से 14 हजार शाखाएं बंद रहीं। इनमें लखनऊ की 800 शाखाएं भी शामिल हैं।
पूरे प्रदेश में करीब 60 हजार बैंक कर्मचारियों ने कामकाज ठप रखा। लखनऊ में लगभग 10 हजार कर्मचारियों ने काम नहीं किया। सहकारी बैंकों के प्रदेश में 12 क्षेत्रीय कार्यालय और 704 शाखाएं भी पूरी तरह हड़ताल में शामिल रहीं।
इन मांगों के लिए की हड़ताल
- सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के अनुसार बैंकिंग क्षेत्र में ग्रेच्युटी 20 लाख की जाए।
- नोटबंदी में किए ओवरटाइम का भत्ता दिया जाए।
- आईबीए से 11वें वेतन समझौते के लिए प्रक्रिया शुरू हो।
- बैंकों के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में खाली पदों को तुरंत भरा जाए।
- बैंक कर्मियों को केंद्रीय कर्मचारियों की तरह अनुकंपा नियुक्तियों का प्रावधान हो, पेंशन व फैमिली पेंशन बढ़ाई जाए। रिक्त पद भरे जाएं, आउटसोर्सिंग बंद हो।
- बैंकों से सैकड़ों करोड़ कर्ज लेकर न चुकाने वालों पर तत्काल कानूनी कार्रवाई हो।