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Lucknow News: एफडी घोटाले के आरोपी बैंक मित्र का मददगार गिरफ्तार
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लखनऊ। एफडी और खातों से ग्राहकों के करोड़ों रुपये हड़पने के आरोपी बैंक ऑफ बड़ौदा के बैंक मित्र शिवा राव का सहयोग देने के आरोपी पूर्व सिक्योरिटी गार्ड दीपक को पारा पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के पास से 2.38 लाख रुपये और बैंक संबंधी अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं। पुलिस को शिवा के डेढ़ करोड़ के आलीशान मकान का भी पता चला है।
इंस्पेक्टर सुरेश सिंह ने बताया कि शकुंतला विश्वविद्यालय परिसर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा में शिवा बैंक मित्र था। उसका सहयोगी दुबग्गा के दौलतखेड़ा निवासी दीपक काफी समय पहले उसी बैंक परिसर में बने एटीएम बूथ का सिक्योरिटी गार्ड था। वर्ष 2019 में हटाए जाने के बाद से वह बैंक में चाय पिलाने और बैंक खोलने-बंद करने का काम करने लगा। तभी से दोनों ने फर्जीवाड़े की योजना बनानी शुरू कर दी थी।
योजना के तहत शिवा ने वर्ष 2020 से ग्राहकों को जाली एफडी थमानी शुरू की थी। दीपक फर्जी दस्तावेज तैयार करने और रकम इधर-उधर करने में मदद करता था। इसके साक्ष्य शिवा के मोबाइल में थे, इसलिए उसने फोन तोड़ दिया। पुलिस ने उसके मोबाइल फोन के डाटा की रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। दीपक के मोबाइल से भी ट्रांजेक्शन के साक्ष्य मिले हैं। इंस्पेक्टर ने बताया कि तफ्तीश में सामने आया है कि वर्ष 2020 से अब तक बैंक में चार मैनेजर तैनात रहे हैं। इनसे पूछताछ की जाएगी।
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शिवा पर हो सकी है गैंगस्टर की कार्रवाई
इंस्पेक्टर ने बताया कि शिवा का राजाजीपुरम के सरीपुरा में आलीशान मकान है। पुलिस यह भी पता कर रही है कि शिवा ने यह कब और कैसे बनाया। मकान किसके नाम है, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। मकान अपराध से अर्जित रकम से बना होगा तो इसकी कुर्की होगी। शिवा पर गैंगस्टर की भी कार्रवाई होगी। इंस्पेक्टर ने कहा कि शिवा के पिता कानपुर में रेलवे विभाग में हैं। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि बैंक में 70 हजार रुपये से अधिक की रकम की जमा-निकासी सीधे नहीं हो सकती थी। इस कारण उसने फर्जी दस्तावेज का सहारा लिया था।
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इंस्पेक्टर सुरेश सिंह ने बताया कि शकुंतला विश्वविद्यालय परिसर स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा में शिवा बैंक मित्र था। उसका सहयोगी दुबग्गा के दौलतखेड़ा निवासी दीपक काफी समय पहले उसी बैंक परिसर में बने एटीएम बूथ का सिक्योरिटी गार्ड था। वर्ष 2019 में हटाए जाने के बाद से वह बैंक में चाय पिलाने और बैंक खोलने-बंद करने का काम करने लगा। तभी से दोनों ने फर्जीवाड़े की योजना बनानी शुरू कर दी थी।
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योजना के तहत शिवा ने वर्ष 2020 से ग्राहकों को जाली एफडी थमानी शुरू की थी। दीपक फर्जी दस्तावेज तैयार करने और रकम इधर-उधर करने में मदद करता था। इसके साक्ष्य शिवा के मोबाइल में थे, इसलिए उसने फोन तोड़ दिया। पुलिस ने उसके मोबाइल फोन के डाटा की रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर दी है। दीपक के मोबाइल से भी ट्रांजेक्शन के साक्ष्य मिले हैं। इंस्पेक्टर ने बताया कि तफ्तीश में सामने आया है कि वर्ष 2020 से अब तक बैंक में चार मैनेजर तैनात रहे हैं। इनसे पूछताछ की जाएगी।
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शिवा पर हो सकी है गैंगस्टर की कार्रवाई
इंस्पेक्टर ने बताया कि शिवा का राजाजीपुरम के सरीपुरा में आलीशान मकान है। पुलिस यह भी पता कर रही है कि शिवा ने यह कब और कैसे बनाया। मकान किसके नाम है, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। मकान अपराध से अर्जित रकम से बना होगा तो इसकी कुर्की होगी। शिवा पर गैंगस्टर की भी कार्रवाई होगी। इंस्पेक्टर ने कहा कि शिवा के पिता कानपुर में रेलवे विभाग में हैं। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि बैंक में 70 हजार रुपये से अधिक की रकम की जमा-निकासी सीधे नहीं हो सकती थी। इस कारण उसने फर्जी दस्तावेज का सहारा लिया था।