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बैंक-बीमा और वामपंथी यूनियनों की दो दिनी हड़ताल आज से, काम होगा प्रभावित

Tue, 08 Jan 2019 01:04 AM IST
MANISH sachan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: MANISH sachan Updated Tue, 08 Jan 2019 01:04 AM IST
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bank and insurance employee will be on strike
हड़ताल - फोटो : amar ujala

आठ व नौ जनवरी को प्रस्तावित देशव्यापी आम हड़ताल को बैंक, बीमा और वामपंथी यूनियनों ने भी समर्थन का एलान किया है। हड़ताल में 10 प्रमुख संगठनों, केंद्र व राज्य कर्मचारियों के अलावा बिजली यूनियन भी शामिल होंगी। इससे प्रदेश में कामकाज प्रभावित होने की आशंका है।

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माकपा, भाकपा, माले, फारवर्ड ब्लॉक, लोकतांत्रिक जनता दल और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने सोमवार को बैठक करके भाजपा सरकार की कथित मजदूर व जनविरोधी नीतियों के खिलाफ मैदान में उतरने का एलान किया है। माकपा के राज्य सचिव डॉ. हीरा लाल यादव ने कहा कि  बेरोजगारी, महंगाई, श्रम कानूनों को खत्म करने, न्यूनतम वेतन 18000 रुपये करने की मांग जैसे मुद्दों को लेकर यह हड़ताल की जा रही है।
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केंद्र सरकार तेजी से निजीकरण कर रही है। इससे मौजूदा कर्मचारियों और आने वाली पीढ़ियों का भी काफी नुकसान होगा। भाकपा के राज्य सचिव डॉ. गिरीश, फॉरवर्ड ब्लॉक के एसएन सिंह, राष्ट्रवादी कांग्रेस के डॉ. रमेश दीक्षित ने कहा कि अब यह संघर्ष मुकाम हासिल करके ही थमेगा। उधर, राज्य कर्मचारी महासंघ ने भी आम हड़ताल को समर्थन देने की घोषणा की है।
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महासंघ के प्रदेश प्रवक्ता सीपी श्रीवास्तव ने कहा कि अगर दो दिवसीय हड़ताल के बावजूद सरकार ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया तो 21 फरवरी को पूरे देश के लाखों राज्य कर्मचारी/शिक्षक नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर एकत्र होकर पुरानी पेंशन बहाली, संविदा प्रथा, आउट सोर्सिंग भर्ती बंद करने, कर्मचारियों को नियमित करने को लेकर प्रदर्शन कर संसद का घेराव करेंगे।

बिजलीकर्मियों ने कार्य बहिष्कार वापस लेने की अपील ठुकराई

इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल-2018 के विरोध में बिजली कर्मचारी भी 8- 9 जनवरी को हड़ताल पर रहेंगे। बिजली कर्मचारियों की राष्ट्रीय समिति नेशनल को-ऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ  इलेक्ट्रिसिटी इंप्लाइज एंड इंजीनियर्स (एनसीसीओईईई) ने केंद्रीय बिजली मंत्रालय की कार्य बहिष्कार वापस लेने की अपील ठुकरा दी है। समिति का दावा है कि हड़ताल में देश के करीब 15 लाख बिजली कर्मचारी व इंजीनियर शामिल होंगे। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उप्र के पदाधिकारी शैलेंद्र दुबे, राजीव सिंह, गिरीश पांडेय व सदरुद्दीन राना ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि प्रस्तावित बिल को वापस लेने का ठोस आश्वासन न मिलनेे से कार्य बहिष्कार पर जाने का फैसला किया गया है। बड़े उत्पादन गृहों 400 व 765 केवी ट्रांसमिशन व सिस्टम ऑपरेशन के  शिफ्ट के कर्मचारियों को इससे अलग रखा गया है, जिससे आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित न हो। कार्य बहिष्कार के दौरान मंगलवार को शक्ति भवन पर 12 बजे से विरोध सभा होगी। उन्होंने कहा कि कार्य बहिष्कार के दौरान बिजली कर्मचारी कोई काम नहीं करेंगे और फाल्ट होने पर उसे दो दिन बाद ही ठीक किया जाएगा।

पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन हड़ताल से अलग

उप्र पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन ने हड़ताल से अलग रहने का एलान किया है। फील्ड हॉस्टल में सोमवार को एसोसिएशन की आपात बैठक के बाद अध्यक्ष केबी राम व कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि प्रदेश के दलित अभियंता व आठ लाख आरक्षण समर्थक 8 व 9 जनवरी को होने वाले कार्य बहिष्कार से अलग रहेंगे। लेकिन इलेक्ट्रिसिटी अमेंडमेंट बिल-2018 के निजीकरण वाले संशोधन का विरोध किया जाएगा। इस मामले में केंद्रीय व राज्य के ऊर्जा मंत्रियों से वार्ता की जाएगी।   विद्युत कर्मचारी मोर्चा संगठन ने भी कार्य बहिष्कार से अलग रहने का एलान किया है।

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