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बहराइच हिंसा: घरों के ध्वस्तीकरण मामले में सुनवाई अब 18 नवंबर को, आज नहीं हुई कार्रवाई
Mon, 11 Nov 2024 04:05 PM IST
ishwar ashish
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Mon, 11 Nov 2024 04:05 PM IST
सार
बहराइच के महाराजगंज में हुई हिंसा के बाद आरोपियों के घरों को ध्वस्त करने के मामले में सुनवाई के लिए अगली तारीख 18 नवंबर दे दी गई है। बीती सुनवाई में कोर्ट ने सरकार को कई सवालों के जवाब देने का आदेश दिया था।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बहराइच के महाराजगंज में प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुए हिंसा के आरोपियों के ध्वस्तीकरण मामले में सोमवार को सुनवाई नहीं हो सकी। कोर्ट ने सुनवाई के लिए नई तारीख 18 नवंबर दी है। बता दें कि ध्वस्तीकरण की नोटिसें जारी होने के बाद इन्हें चुनौती देने वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई होनी थी पर कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख दे दी।
न्यायमूर्ति एआर मसूदी और न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने एसोसिएशन फार प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स संस्था की जनहित याचिका पर बीते बुधवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से कई बिंदुओं पर जवाब दाखिल करने का मौखिक आदेश दिया था।
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कोर्ट ने पूछे थे ये सवाल
बीती सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से मौखिक रूप से पूछा था कि क्या नोटिस जारी करने से पहले वहां कोई सर्वे किया गया था या नहीं? क्या जिन्हें नोटिस जारी हुआ वे लोग निर्मित परिसरों के स्वामी हैं या नहीं?
नोटिस जारीकर्ता प्राधिकारी इन्हें जारी करने को सक्षम था या नहीं। इन बिंदुओं के अलावा कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा है कि महराजगंज बाजार की जिस सड़क पर बने निर्माणों को ढहाने का नोटिस जारी हुहा, क्या पूरा निर्माण या उसका कोई हिस्सा अवैध निर्माण था या नहीं? सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की थी कि फिलहाल राज्य सरकार ऐसी कोई कार्रवाई न करे जो कानून सम्मत न हो।
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न्यायमूर्ति एआर मसूदी और न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की खंडपीठ ने एसोसिएशन फार प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स संस्था की जनहित याचिका पर बीते बुधवार को सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से कई बिंदुओं पर जवाब दाखिल करने का मौखिक आदेश दिया था।
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बीती सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से मौखिक रूप से पूछा था कि क्या नोटिस जारी करने से पहले वहां कोई सर्वे किया गया था या नहीं? क्या जिन्हें नोटिस जारी हुआ वे लोग निर्मित परिसरों के स्वामी हैं या नहीं?
नोटिस जारीकर्ता प्राधिकारी इन्हें जारी करने को सक्षम था या नहीं। इन बिंदुओं के अलावा कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा है कि महराजगंज बाजार की जिस सड़क पर बने निर्माणों को ढहाने का नोटिस जारी हुहा, क्या पूरा निर्माण या उसका कोई हिस्सा अवैध निर्माण था या नहीं? सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी की थी कि फिलहाल राज्य सरकार ऐसी कोई कार्रवाई न करे जो कानून सम्मत न हो।