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शुजा-उद-दौला के बहुत करीब थे 'इस' बाग वाले बाबा

Tue, 10 Sep 2013 03:33 PM IST
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क Updated Tue, 10 Sep 2013 03:33 PM IST
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bagh baba hajara park

बाग बाबा हजारा पार्क हर साल पुराने लखनऊ में दस दिन तक चलने वाले रामलीला मंचन का गवाह बनता है। यह बाग इमामबाड़ा के मोगुल साहेबा से कुछ ही दूरी पर स्थित है।

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लखनऊ के लिए बाबा हजारा का रूख नवाबों के शहर में धर्मनिरपेक्षता की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण रहा जिसकी बदौलत दो धर्मो के लोग आपस में आसानी से एक दूसरे के साथ जुडऩे लगे।
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बाबा हजारा मूल रूप से पंजाब के जालंधर प्रांत से थे जो 1753-1775 में अवध के नवाब शुजा-उद-दौला के शासनकाल में आए थे।

नीम का सूखा पेड़ हो गया हरा
बाबा हजारा को लेकर कहा जाता है कि नवाब शुजा-उद-दौला ने पाया कि बाबा जिस नीम के पेड़ के नीचे योग लगाते थे वो पूरी तरह से सूख चुका था लेकिन जब से बाबा हजारा पेड़ के नीचे ध्यान योग लगा रहे थे तभी से उसमें हरियाली फूट पड़ी थी जो किसी करिश्मे से कम नहीं थी।
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कई ग्रामीण लोग लखनऊ में बाबा हजारा के दर्शन के लिए आए जब बाबा ने फैजाबाद जाने से मना कर दिया। बाबा के योग साधना देख नवाब ने पाया कि बाबा कड़ी धूप में ही सूखे नीम के पेड़ के नीचे पूजा और साधना में लीन रहते थे।

कुछ समय बाद देखा गया कि पूरी तरह सूख चुका नीम का पेड़ हरा भरा हो चुका था उसमें डालियां और नए पत्ते आ चुके थे जो बाबा को उनकी साधना के दौरान अन्य लोगों को भी छाया प्रदान करते थे।

बाबा हजारा ने अपनी अंतिम सांस उसी नीम के पेड़ के नीचे सन् 1799 में ली जिसके बाद वहीं पर उनकी समाधि बना दी गई। इसके बाद बाबा का कार्यभार बाबा अमृता दास ने संभाला जिन्होंने अपने गुरू की समाधि का निर्माण करवाया था।

जला हुआ शॉल कैसे पहुंचा बेगम के पास
बात 1775-1797 की है नवाब असफ-उद-दौला बाबा की सेवा के लिए कड़ाके की ठंड में उनसे शिष्टïाचार मुलाकात के लिए पहुंचे। कड़ाके की ठंड में भी बाबा शरीर को बिना ढके योग साधना में लीन थे।

इसे देख नवाब ने उनके शरीर को हीरे मोती से जड़े दोसाला से ढक़ दिया। बाबा ने नवाब को आशीर्वाद देते हुए उसके उपहार को स्वीकार कर लिया और पूजा के लिए बनाए गए हवन कुंड में शॉल को डालकर भस्म कर दिया।

फिर उन्होंने कहा कि मुझे तन को ढक़ने के लिए वस्त्र की नहीं राख की जरूरत है क्योंकि प्राकृतिक वस्त्र में जो खुशी मिलती है वो किसी और वस्त्र में नहीं। इसके बाद नवाब जब अपने महल में आए तो बेगम ने बताया कि आप शॉल यहीं छोड़ गए थे।


शॉल देखकर नवाब के होश उड़ गए क्योंकि जो शॉल आग की लपटों में धू-धू कर जल रहा था वो महल में कैसे आ गया। नवाब बाबा की शक्तियों के बारे में समझ गए थे और उन्हें आभास हो चला था कि वो कोई आम इंसान नहीं हैं।

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