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Lucknow News: राहुल गांधी की सांसद निधि का काम देखने वाला बाबू निलंबित
Tue, 10 Dec 2024 01:14 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
संवाद न्यूज एजेंसी, लखनऊ
Updated Tue, 10 Dec 2024 01:14 AM IST
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रायबरेली। जिला विकास एवं समन्वय अनुश्रवण समिति (दिशा) की बैठक में लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष व सांसद राहुल गांधी के सामने सांसद निधि के करोड़ों रुपये भारत सरकार को वापस करने का मामला उठने के बाद कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो गई है। जांच में प्रथम दृष्टया लापरवाही, अनुशासनहीनता की पुष्टि होने के बाद सीडीओ ने सांसद निधि का पटल देख रहे बाबू को निलंबित कर दिया है। उसे डीडीओ कार्यालय से संबद्ध करके इस मामले की अंतिम जांच उपायुक्त मनरेगा को सौंपी गई है।
जिले में सांसद निधि से शुरू कराए गए 85 कार्य लापरवाही के कारण अब तक पूरे नहीं हो सके हैं। निधि से पहली किस्त देकर कार्यों को शुरू कराने के बाद शेष निधि भारत सरकार को वापस कर दी गई थी। दूसरी किस्त समय से न मिल पाने के कारण करीब 40 कार्य अधूरे रह गए। साथ ही, जिले में सांसद निधि के 29 कार्यों को अब शुरू नहीं कराया गया। दिशा की बैठक में यह मुद्दा उठने के बाद डीआरडीए में मसला गरमा गया। सीडीओ के निर्देश पर डीआरडीए के परियोजना निदेशक सतीश प्रसाद मिश्रा ने जांच की।
जांच में पाया कि सांसद निधि का पटल देख रहे हंस कुमार आर्या ने समय से पत्रावलियों को स्वीकृति के लिए समक्ष अधिकारियों के सामने प्रस्तुत ही नहीं किया। साथ ही संबंधित रजिस्टर भी मांगने पर उपलब्ध नहीं कराया। सांसद निधि के कार्यों से संबंधित पत्रों को भी सीधे उच्चाधिकारियों को संबोधित करके भेजा।
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जांच रिपोर्ट मिलने के बाद सीडीओ ने बाबू हंस कुमार आर्या को निलंबित करके डीडीओ कार्यालय से संबद्ध कर दिया है। उपायुक्त मनरेगा को मामले की अंतिम जांच सौंपी गई है। चर्चा है कि भारत सरकार को निधि वापस किए जाने के मामले में भी डीआरडीए की किरकिरी हो चुकी है।
सांसद निधि के कार्यों को लेकर डीआरडीए के परियोजना निदेशक से जांच कराई गई। जांच में संबंधित बाबू के खिलाफ कई मामले मिलने के बाद उसे निलंबित कर दिया गया है। बाबू को डीडीओ कार्यालय से संबद्ध करके उपायुक्त मनरेगा को अंतिम जांच सौपी गई है।
अर्पित उपाध्याय, मुख्य विकास अधिकारी
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जिले में सांसद निधि से शुरू कराए गए 85 कार्य लापरवाही के कारण अब तक पूरे नहीं हो सके हैं। निधि से पहली किस्त देकर कार्यों को शुरू कराने के बाद शेष निधि भारत सरकार को वापस कर दी गई थी। दूसरी किस्त समय से न मिल पाने के कारण करीब 40 कार्य अधूरे रह गए। साथ ही, जिले में सांसद निधि के 29 कार्यों को अब शुरू नहीं कराया गया। दिशा की बैठक में यह मुद्दा उठने के बाद डीआरडीए में मसला गरमा गया। सीडीओ के निर्देश पर डीआरडीए के परियोजना निदेशक सतीश प्रसाद मिश्रा ने जांच की।
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जांच में पाया कि सांसद निधि का पटल देख रहे हंस कुमार आर्या ने समय से पत्रावलियों को स्वीकृति के लिए समक्ष अधिकारियों के सामने प्रस्तुत ही नहीं किया। साथ ही संबंधित रजिस्टर भी मांगने पर उपलब्ध नहीं कराया। सांसद निधि के कार्यों से संबंधित पत्रों को भी सीधे उच्चाधिकारियों को संबोधित करके भेजा।
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जांच रिपोर्ट मिलने के बाद सीडीओ ने बाबू हंस कुमार आर्या को निलंबित करके डीडीओ कार्यालय से संबद्ध कर दिया है। उपायुक्त मनरेगा को मामले की अंतिम जांच सौंपी गई है। चर्चा है कि भारत सरकार को निधि वापस किए जाने के मामले में भी डीआरडीए की किरकिरी हो चुकी है।
सांसद निधि के कार्यों को लेकर डीआरडीए के परियोजना निदेशक से जांच कराई गई। जांच में संबंधित बाबू के खिलाफ कई मामले मिलने के बाद उसे निलंबित कर दिया गया है। बाबू को डीडीओ कार्यालय से संबद्ध करके उपायुक्त मनरेगा को अंतिम जांच सौपी गई है।
अर्पित उपाध्याय, मुख्य विकास अधिकारी