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'दंगा पीड़ितों के लिए बुलाया जाय संसद का विशेष सत्र'

Thu, 24 Oct 2013 06:33 PM IST
राजेंद्र सिंह/लखनऊ
राजेंद्र सिंह/लखनऊ Updated Thu, 24 Oct 2013 06:33 PM IST
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azam khan statement on muzaffarnagar riots victims

सपा महासचिव और नगर विकास मंत्री आजम खां ने कहा कि मुजफ्फरनगर दंगे के बहुत सारे पीड़ित राहत शिविरों से अपने गांवों में लौटना नहीं चाहते हैं। उनके पुनर्वास की नीति दो दिन में बन जाएगी।

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उन्होंने मुजफ्फरनगर हिंसा के लिए केंद्र सरकार को दोषी ठहराते हुए कहा कि सांप्रदायिक हिंसा निरोधक बिल पास हो हो गया होता तो वहां दंगा न होता।

उन्होंने इस बिल को पारित कराने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की।

आजम खां ने बुधवार को अखबारनवीसों से कहा, अल्पसंख्यकों की हिफाजत की जिम्मेदारी राज्यों से ज्यादा केंद्र सरकार की है।

कांग्रेस के आला नेताओं ने खाद्य सुरक्षा बिल पास कराकर 2014 के लोकसभा चुनाव में वोटों की फसल काटने के लिए टोपी-पगड़ी तक विरोधी दलों के नेताओं के पैरों में रख दी। खाने से ज्यादा जरूरी जान-माल है।
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पढ़ें-उठी दंगा पीड़ितों के लिए आवास की मांग
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लोगों की जान-माल की हिफाजत के लिए कांग्रेस ने नौ साल पहले सांप्रदायिक दंगा विरोधी बिल पास कराने का वादा किया था।

इस बिल के पास होने के बाद जुल्म करने वालों को कड़ी सजा मिलती। संसद में यह बिल पारित हो गया होता तो कश्मीर, यूपी, भिवंडी और असम में लोगों की जानमाल की सुरक्षा हो गई होती। मुमकिन था कि मुजफ्फरनगर में दंगा न होता।


एक सवाल के जवाब में आजम खां ने कहा, मुजफ्फरनगर के राहत कैंपों में रह रहे ऐसे लोग अपने गांवों में लौटने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं, दूसरे वर्ग की आबादी के बीच जिनके पांच-सात घर हैं।

जिनके नजदीकी हिंसा में मारे गए हैं, ऐसे पीड़ितों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी। दो रोज नें उनके पुनर्वास की पॉलिसी सामने आ जाएगी।

राहत कैंपों पर मदरसों का कब्जा होने और लोगों की वापसी न होने संबंधी मंत्रियों की समिति की रिपोर्ट पर आजम खां ने सीधे तौर पर टिप्पणी नहीं की। कुरेदने पर इतना जरूर कहा कि ऐसा है तो सरकार इसे संजीदगी से लेगी।

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