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पंजीयन, संस्तुति में खेल, मरीजों को राहत देने में ‘आयुष्मान’ फेल, वसूले जा रहे रुपये
Wed, 02 Oct 2019 03:18 PM IST
Amulya Rastogi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: Amulya Rastogi
Updated Wed, 02 Oct 2019 03:18 PM IST
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ayushman yojna
- फोटो : amar ujala
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आयुष्मान योजना के तहत मरीजों से पैसा ऐंठने का नया खेल चल रहा है। कभी पंजीयन में सर्वर फेल तो कभी मुख्यालय से संस्तुति में हो रही देरी के बहाने मरीजों की जेब काटी जा रही है। राजधानी में लगातार इस तरह की शिकायतें मिल रही हैं।
आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को अस्पताल आते ही मुफ्त में इलाज देने का दावा किया जाता है, लेकिन हकीकत एकदम अलग है। राजधानी में मरीजों के साथ पंजीयन और संस्तुति का खेल खेला जा रहा है। मरीज कार्ड देकर सभी औपचारिकताएं पूरी कर लेता है।
इसके बाद भी उससे जांच और इलाज के नाम पर रुपये वसूले जाते हैं। इतना ही नहीं कुछ दिन रुपये वसूलने के बाद उसी मरीज को आयुष्मान में भी दिखाया जा रहा है। इस तरह के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग जांच की दुहाई देकर मामले से पल्ला झाड़ ले रहा है।
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आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को अस्पताल आते ही मुफ्त में इलाज देने का दावा किया जाता है, लेकिन हकीकत एकदम अलग है। राजधानी में मरीजों के साथ पंजीयन और संस्तुति का खेल खेला जा रहा है। मरीज कार्ड देकर सभी औपचारिकताएं पूरी कर लेता है।
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इसके बाद भी उससे जांच और इलाज के नाम पर रुपये वसूले जाते हैं। इतना ही नहीं कुछ दिन रुपये वसूलने के बाद उसी मरीज को आयुष्मान में भी दिखाया जा रहा है। इस तरह के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग जांच की दुहाई देकर मामले से पल्ला झाड़ ले रहा है।
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केस 1
उन्नाव के कटरा निवासी राकेश गुप्ता को लिवर संबंधी दिक्कत है। वह हरदोई रोड स्थित निजी मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में भर्ती हैं। उनके पास आयुष्मान भारत का आरोग्य कार्ड है। उनके बेटे ने बताया कि करीब 15 दिन पहले भर्ती कराया गया। आयुष्मान के तहत पंजीयन कराने के बाद बताया गया कि अभी कुछ रुपये जमा कर दो। मुख्यालय से इलाज की अनुमति मिलते ही आयुष्मान में इलाज शुरू कर दिया जाएगा। पांच दिन बीतने पर दोबारा पूछा तो पता चला आयुष्मान में पंजीयन नहीं हो पाया है। आयुष्मान के कॉल सेंटर पर पूछा गया तो बताया गया कि दोबारा पंजीयन कराओ। इस तरह अब तक करीब 35 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं लेकिन योजना में इलाज नहीं मिल पाया है।
केस 2
ट्रांसपोर्टनगर निवासी संतोष सड़क दुर्घटना में घायल हो गए। परिवारीजन उन्हें लेकर आलमबाग स्थित निजी अस्पताल पहुंचे। यहां आयुष्मान का कार्ड दिया गया। अस्पताल के कर्मचारियों ने कहा कि अभी कंप्यूटर नहीं चल रहा है। नगद जमा करा कर इलाज शुरू कराओ। अगले दिन योजना में शामिल कर लिया जाएगा। अगले दिन पंजीयन कराया गया। शाम तक फिर छह हजार रुपये जमा कराए। ऑपरेशन हो गया। चार दिन तक अस्पताल में रहने के बाद संतोष डिस्चार्ज होकर घर पहुंच गए। डिस्चार्ज होते वक्त बताया गया कि आयुष्मान मुख्यालय से अभी तक संस्तुति नहीं हुई है। बिना वहां से इजाजत मिले आयुष्मान का लाभ नहीं दिया जा सकता है।
केस 2
ट्रांसपोर्टनगर निवासी संतोष सड़क दुर्घटना में घायल हो गए। परिवारीजन उन्हें लेकर आलमबाग स्थित निजी अस्पताल पहुंचे। यहां आयुष्मान का कार्ड दिया गया। अस्पताल के कर्मचारियों ने कहा कि अभी कंप्यूटर नहीं चल रहा है। नगद जमा करा कर इलाज शुरू कराओ। अगले दिन योजना में शामिल कर लिया जाएगा। अगले दिन पंजीयन कराया गया। शाम तक फिर छह हजार रुपये जमा कराए। ऑपरेशन हो गया। चार दिन तक अस्पताल में रहने के बाद संतोष डिस्चार्ज होकर घर पहुंच गए। डिस्चार्ज होते वक्त बताया गया कि आयुष्मान मुख्यालय से अभी तक संस्तुति नहीं हुई है। बिना वहां से इजाजत मिले आयुष्मान का लाभ नहीं दिया जा सकता है।
अस्पताल में वसूलेंगे तीन गुना जुर्माना
आयुष्मान योजना को सही तरीके से लागू कराने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। योजना में कार्ड दिखाने और बताने मात्र से ही मुफ्त इलाज शुरू हो जाना चाहिए। यदि कार्ड होने के बाद भी कोई अस्पताल रुपये ले रहा है तो लाभार्थी उसकी जानकारी दें। आयुष्मान कार्डधारक किसी भी कीमत पर अस्पताल में रुपये जमा न करें। फोन से या लिखित शिकायत करें। संबंधित अस्पताल से तीन गुना जुर्माना वसूला जाएगा। कुछ अस्पतालों पर इस तरह की पेनाल्टी लगाई गई है। इन दोनों मामलों की भी जांच कराई जाएगी।
- डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ
पाठकों के सवालों का जवाब
- डॉ. नरेंद्र अग्रवाल, सीएमओ
पाठकों के सवालों का जवाब
- जनगणना 2011 के अनुसार, जिन लोगों को आयुष्मान का लाभार्थी माना गया है, उनका गोल्डन कार्ड बन रहा है। नए लाभार्थियों को चयन अभी नहीं हो रहा है।
- गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए लाभार्थी सूचीबद्ध सरकारी या निजी अस्पताल जाएं। वहां मौजूद आरोग्य मित्र निशुल्क बनवाएंगे। इसी तरह जन सुविधा केंद्र में 30 रुपये देेकर बनवा सकते हैं।
- कार्ड बनवाने के लिए लाभार्थी अपने साथ राशन कार्ड या प्रधानमंत्री पत्र (यह पत्र आशा, एएनएम के माध्यम से लाभार्थियों को बांटा गया है) एवं आधार कार्ड लेकर जाएं। जिन लोगों का नाम सूची में होगा, उन्हीं का कार्ड बनेगा।
- गोल्डन कार्ड में कि सी तरह की त्रुटि है। किसी का नाम सही अथवा गलत है। पात्र व्यक्ति के स्थान पर अपात्र व्यक्ति का गोल्डन कार्ड जारी हो गया है तो इस स्थिति में लाभार्थी को आवेदन पत्र लिखना होगा। सभी साक्ष्य के साथ सीएमओ कार्यालय के नोडल अधिकारी, एबी-पीएमजेएवाई को भेजना होगा। यहां जांच करके साचीज को भेजा जाएगा। फिर गलत कार्ड नष्ट करने व सुधारने का आदेश होगा।
हमें बताएं अपनी समस्या और सुझाव
आयुष्मान योजना में लाभार्थियों को अब भी कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए अमर उजाला ने एक अभियान शुरूआत की है। इसका उद्देश्य योजना में आ रही समस्याओं को सामने लाना और उसके निराकरण की दिशा में काम करना है, जिससे लाभार्थियों को ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल सके। यदि आपकी कोई शिकायत, सुझाव हों तो हमें बताएं।
व्हाट्सएप - 8859108092 (दोपहर 11 बजे से तीन बजे तक)
मेल - chandrab@knp.amarujala.com
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