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रामालय के स्वर्ण-संग्रह-सपर्या अभियान पर कसेगा शिंकजा, रामलला के लिए स्वर्ण दान लेने से ट्रस्टी खफा

Mon, 17 Feb 2020 10:16 AM IST
शाहरुख खान धीरेंद्र सिंह, अमर उजाला, अयोध्या
धीरेंद्र सिंह, अमर उजाला, अयोध्या Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 17 Feb 2020 10:16 AM IST
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ayodhya ram mandir Trustees angry over taking gold donation for Ram Lalla
रामलला के लिए स्वर्ण दान लेने से ट्रस्टी खफा - फोटो : अमर उजाला
विराजमान रामलला का भव्य मंदिर बनाने के लिए श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अधिकृत किए जाने के बाद भी पुराने ट्रस्टों ने इस निमित्त चंदा-दान लेने का मोह नहीं त्यागा है। अलबत्ता वाराणसी में ज्योतिष पीठाधीश्वर व द्वारकाशारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की अगुवाई वाले रामालय ट्रस्ट ने स्वर्ण-संग्रह-सपर्या अभियान शुरू कर दिया है। 
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इसके तहत राममंदिर के लिए हर गांव से कम से कम एक ग्राम सोना दान का लक्ष्य रखा गया है। इस अभियान को लेकर नवगठित ट्रस्ट के संयोजक ट्रस्टी व जिलाधिकारी अनुज कुमार झा ने गलत ठहराया है। आजीवन ट्रस्टी डॉ अनिल मिश्र ने मामले को नई दिल्ली में 19 फरवरी को ट्रस्ट की होने वाली बैठक में उठाने का एलान किया है। 
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अयोध्या में राम मंदिर बनाने के लिए 5 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की घोषणा की थी। 15 सदस्यीय यह ट्रस्ट 9 नवंबर 2019 को विराजमान रामलला के पक्ष में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार बना है। कोर्ट का आदेश था कि %अयोध्या एक्ट की धारा 6 और 7 के तहत केंद्र सरकार फैसले की तारीख से 3 महीने के अंदर बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज का गठन करेगी। फिर जमीन ट्रस्ट को दे दी जाएगी। 
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मंदिर निर्माण कैसे होगा, यह बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज तय करेगा। गृह मंत्रालय की ओर से जारी गजट नोटिफिकेशन में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को राम मंदिर निर्माण से जुड़े हर फैसले लेने का स्वतंत्र रूप से अधिकार है। यह ट्रस्ट श्रद्धालुओं के लिए सभी तरह की सुविधाएं जैसे- अन्नक्षेत्र, किचन, गौशाला, प्रदर्शनी, म्यूजियम और सराय का इंतजाम करने के साथ किसी भी व्यक्ति, संस्था से दान, अनुदान, अचल संपत्ति और सहायता स्वीकार करेगा। 

इस बीच 7 फरवरी को अयोध्या श्रीराम जन्मभूमि रामालय न्यास के सचिव स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्वर्ण संग्रह सपर्या अभियान शुरू कर दिया। इसमें विराजमान रामलला के भव्य बालमंदिर के लिए राम-राम ग्राम-ग्राम योजना के तहत प्रत्येक गांव से कम से कम एक ग्राम स्वर्ण संग्रह का लक्ष्य रथा गया है। बकायदा वसूली के लिए 15 स्थान तय करके स्वर्णाधायक नियुक्त किए गए हैं। 

दान देने वालों को रामालय प्रमाण पत्र के साथ सम्मानित कर रहा है। अभियान के लिए चार पेज का पंपलेट प्रकाशित किया गया है, जिसके मुख्य पेज पर योतिष पीठाधीश्वर व द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती की तस्वीर प्रस्तावित स्वर्णालय के सामने पूजा की मुद्रा में है। 

स्वर्ण दान अभियान कहीं से गलत नहीं: अविमुक्तेश्वरानंद
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि रामालय ट्रस्ट को जगतगुरु स्वरूपानंद जी ने ढाई दशक पहले ही अयोध्या एक्ट के तहत चारों शंकराचार्य, चारों वैष्णवाचार्य, तेरह अखाड़ा प्रमुखों व अन्य संस्था प्रमुखों को एक साथ मिलाकर किया था। सरकार को नया ट्रस्ट बनाने के बजाय इसी ट्रस्ट को राममंदिर निर्माण का अधिकार देना चाहिए था। सरकार के निर्णय को कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी हो रही है। 

इसके पहले रामलला के लिए 24 फुट चौड़ा, 24 फुट लंबा व 25 फीट ऊंचा मंदिर बनाकर स्वर्ण जड़ित चंदन के सिंहासन पर रामलला को विराजमान किया जाएगा। ताकि मंदिर निर्माम होने तक इसी स्वर्णालय श्रीरामलला में दर्शन-पूजन अनवरत चलता रहे। यह मंदिर लेकर महाराज जी खुद जल्द ही अयोध्या जाएंगे। यह अभियान कहीं से गलत नहीं है। ऑनलाइन स्वर्णदान के लिए क्यूआर कोड भी है। जिसे स्कैन करके लोग दान देने आगे आ रहे हैं। 

स्वर्ण संग्रह सपर्या अभियान पूरी तरह अवैधानिक: डॉ मिश्र

वाराणसी से कई भक्तों ने रामालय ट्रस्ट की ओर से स्वर्ण संग्रह सपर्या अभियान चलाने की जानकारी दी है। यह पूरी तरह अवैधानिक है। जब सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ट्रस्ट का गठन हो गया है, तो पुराना ट्रस्ट कैसे चंदा ले सकता है। यह तत्काल रूकना चाहिए। 19 फरवरी को नई दिल्ली में ट्रस्ट की बैठक में मुद्दा उठाएंगे। यह भी मांग होगी कि तीनों पुराने ट्रस्टों की ओर से राममंदिर के लिए एकत्रित दान व संपत्ति को नए ट्रस्ट में फ्रीज किया जाए, ताकि भक्तों की मंशा फलीभूत हो सके। 
- डॉ अनिल मिश्र, ट्रस्टी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र

किसी भी पुराने ट्रस्ट को चंदा-दान लेने का औचित्य नहीं: डीएम
सुप्रीम कोर्ट से रामलला के पक्ष में आदेश आने के बाद से ही किसी भी पुराने ट्रस्ट को चंदा-दान लेने का औचित्य नहीं है। जब सरकार ने नया ट्रस्ट गठित कर दिया है तो रामालय की ओर से स्वर्ण संग्रह अभियान पूरी तरह गलत है। इसे नई दिल्ली में ट्रस्ट की बैठक में रखा जाएगा। साथ ही जिलाधिकारी वाराणसी से भी मामले में बात की जाएगी। 
- अनुज कुमार झा, जिलाधिकारी/संयोजक ट्रस्टी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र

न्यास की कार्यशाला में चंदा वसूली बंद
- विहिप के प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि श्रीरामजन्मभूमि न्यास की ओर से राममंदिर निर्माण के लिए अब न्यास की कार्यशाला व कारसेवकरपुरम में मंदिर मॉडल के सामने चंदा की रसीदें नहीं कट रही है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के ट्रस्टी डॉ अनिल मिश्र ने भी कहा कि न्यास अब चंदा-दान नहीं ले रहा है। मंदिर मॉडल के सामने दान पात्र में भक्तों के दान को सुरक्षित रखा जा रहा है, जिसे नए ट्रस्ट को समर्पित किया जाएगा।
 
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