सद्भाव की अयोध्या : कलीम और कासिम बना रहे खड़ाऊं, मल्लो, गुलाबो, सब्बो गूथ रहीं मालाएं
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विवादित स्थल के ठीक पीछे आलमगंज कटरा के लगभग सभी घरों में बहू-बेटियां फूलों की माला गूथ रही हैं। यहां मल्लो, गुलाबो, सब्बो के हाथ तेजी से चल रहे हैं। कहती हैं बात करेंगे तो काम रुक जाएगा।
परिवार के बली मोहम्मद, अब्दुल अजीज, नेहाल कहते हैं इन्हें काम करने दीजिए साहब। अब दीपोत्सव की भी मांग है। आगे कार्तिक-परिक्रमा मेला और फिर फैसला आने वाला है... काम और बढ़ जाएगा। बस, आपलोग बाहर से आने वाले अवांछनीय तत्वों को रोक दीजिए, हमारी आशंकाएं खत्म हो जाएंगी।
सुप्रीम कोर्ट से आगामी कुछ दिनों में आने वाले फैसले को लेकर बाहर चाहे जितनी अफवाहें हों लेकिन, मुस्लिम बहुल सुतहटी, रायगंज, बुराईकुआं, राजघाट में भी यही माहौल है। शायद ही कोई घर हो जहां मंदिरों के लिए माला न बन रही हो।
सुतहटी मोहल्ले में गरीबुल निशां और उनकी बेटी नाजरा बानो हनुमान गढ़ी के लिए फूलों की मालाएं तैयार कर रही हैं। उनके बराबर में कासिम के घर प्रसाद के लिए गत्ते के डिब्बे तैयार हो रहे हैं। नेहाल कहते हैं, दीपोत्सव ने माहौल बदला है। अब मांग बढ़ने से दूना रेट बहू-बेटियों को मिलता है। आलमगंज कटरा के बली मोहम्मद कहते हैं कि अब फैसला आने दीजिए, अयोध्या का विकास इतनी तेज होगा कि कोई कल्पना नहीं कर सकता।
25 से 29 तक दीपोत्सव मनाया जाएगा तो 5 नवंबर से कार्तिक व परिक्रमा मेला में आने वाले 25 लाख भक्तों के लिए हिंदू-मुस्लिम दोनों कारोबारी संसाधन जुटाने में व्यस्त हैं। यहां का अर्थशास्त्र पर्यटकों-भक्तों पर टिका है।
बाबू बाजार में संत-महंतों के लिए खड़ाऊं और पोथी रखने के लिए रेहल बनाने वाले सगे मोहम्मद सलीम खुश हैं। सलीम कहते हैं, अयोध्या कलंक मिटने वाला है, सुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही यहां 1992 से चल रही सियासत से अयोध्या उबर जाएगी।
दो पीढ़ियों से खड़ाऊं बनाने वाले कलीम खुश इसलिए हैं कि माहौल ठीक है, यूं भी अयोध्या के लोग कभी माहौल खराब नहीं करते हैं, जब भी दिक्कत हुई बाहरी लोगों ने पैदा की।