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Ayodhya News : ढांचा विध्वंस मामले में निगरानी याचिका पर सुनवाई 18 को, 32 लोगों को दोषी ठहराने की हाईकोर्ट से गुजारिश

Tue, 12 Jul 2022 11:20 PM IST
पंकज श्रीवास्‍तव अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 12 Jul 2022 11:20 PM IST
सार

केंद्र सरकार के दबाव में सीबीआइ ने सत्र अदालत के फैसले के विरुद्ध अपील नहीं दाखिल की जबकि कई मुस्लिम संगठनों ने सीबीआई से अपील दाखिल करने के लिए अनुरोध किया था। मामले की अगली सुनवाई 18 जुलाई को होगी।

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Ayodhya News: Hearing on the monitoring petition in the structure demolition case, on 18th High Court to convict 32 people
लखनऊ हाईकोर्ट

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अयोध्या के विवादित ढांचा विध्वंस मामले में सत्र अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली पुनरीक्षण याचिका पर अगली सुनवाई 18 जुलाई को नियत की है। कोर्ट ने यह आदेश निगरानी याचिका दायर करने वालों के वकीलों के आग्रह पर दिया। कोर्ट ने साफ  कहा कि अगली तारीख पर उनके द्वारा लिए जाने वाले किसी भी आधार पर याचिका की सुनवाई मुल्तवी नहीं की जाएगी।

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याचिका में अभियुक्तों को बरी किए जाने के सत्र अदालत के फैसले को चुनौती दी गई है। साथ ही इस मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती समेत सभी 32 लोगों को दोषी करार दिए जाने की भी गुजारिश की गई है।
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न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की एकल पीठ के समक्ष अयोध्या निवासी हाजी महबूब अहमद व सैयद अखलाक अहमद की ओर से दाखिल याचिका सोमवार को सुनवाई के लिए पेश हुई। याचियों की ओर से मामले को किसी अन्य दिन सुने जाने का अनुरोध किया गया। इस पर कोर्ट ने 18 जुलाई की अगली तारीख तय करते हुए यह भी स्पष्ट किया है कि अगली तारीख पर मामले की सुनवाई टाली नहीं जाएगी। विदित हो कि लखनऊ की  विशेष अदालत (अयोध्या प्रकरण) ने 30 सितंबर 2020 को फैसला सुनाते हुए विवादित ढांचा विध्वंस मामले में पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी, पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली मनोहर जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह, उमा भारती, लोक सभा सदस्यों साक्षी महाराज, लल्लू सिंह व बृजभूषण शरण सिंह समेत सभी अभियुक्तों को बरी कर दिया था।
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याचिका में कहा गया है कि दोनों याची इस मामले में न सिर्फ  गवाह थे बल्कि घटना के पीड़ित भी हैं। उन्होंने विशेष अदालत के समक्ष अर्जी दाखिल कर खुद को सुने जाने की मांग भी की थी लेकिन विशेष अदालत ने उनके प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया। याचियों का यह भी कहना है कि केंद्र सरकार के दबाव में सीबीआइ ने सत्र अदालत के फैसले के विरुद्ध अपील नहीं दाखिल की जबकि कई मुस्लिम संगठनों ने सीबीआई से अपील दाखिल करने के लिए अनुरोध किया था। मामले की अगली सुनवाई 18 जुलाई को होगी।

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