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श्रीरामजन्मभूमि विवाद: अयोध्या पहुंचा मध्यस्थता पैनल, हेलीकॉप्टर से आए श्री श्री रविशंकर

Tue, 12 Mar 2019 10:58 AM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या Published by: ishwar ashish Updated Tue, 12 Mar 2019 10:58 AM IST
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Ayodhya land dispute case Mediators will first meet in Ayodhya today
अयोध्या पहुंचे श्री श्री रविशंकर - फोटो : amar ujala

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अयोध्या भूमि विवाद का हल मध्यस्थता के जरिए तलाशने की कवायद आज से शुरू हो रही है। इसके लिए शीर्ष कोर्ट द्वारा गठित मध्यस्थता पैनल मंगलवार को अयोध्या पहुंच चुका है। सबसे पहले मध्यस्थता कमेटी के अध्यक्ष इब्राहीम फलीमुल्लाह और सदस्य वरिष्ठ अधिवक्ता श्री राम पंचू अवध विश्वविद्यालय के आईईटी गेस्ट हाउस पहुंचे। जबकि आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर अपने हेलीकॉप्टर से राम की नगरी में उतरे।

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बताया जा रहा है कि आज शाम को एक अनौपचारिक बैठक हो सकती है और कल से औपचारिक तौर पर बैठकों का सिलसिला शुरू हो जाएगा। पक्ष-विपक्ष समेत मामले से जुड़े अधिवक्ताओं में मध्यस्थता का खाका कैसा होगा, किसे कमेटी बुलाएगी, क्या-क्या दस्तावेज सौंपे जाने हैं, इसे लेकर सरगर्मी तेज होती दिख रही है।
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दूसरी तरफ मध्यस्थता को लेकर दोनों पक्षों सहित संत-धर्माचार्यों की राय अलग-अलग है। मुस्लिम पक्ष के इकबाल अंसारी ने जहां मध्यस्थता से मामले के समाधान की उम्मीद कम जताते हैं, वहीं हाजी महबूब सहित महंत धर्मदास व निर्मोही अखाड़ा मध्यस्थता का स्वागत करते हुए वार्ता को तैयार हैं। जबकि विश्व हिंदू परिषद सहित रामनगरी के संत-धर्माचार्यों ने स्पष्ट कर दिया गया है कि हम कोर्ट का तो सम्मान करते हैं, लेकिन राममंदिर के नाम पर कोई समझौता नहीं होगा। 

मध्यस्थता के स्वरूप की जानकारी नहीं

पक्षकार निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास ने कहा कि अभी उन्हें मध्यस्थता के स्वरूप की कोई जानकारी नहीं है। कोर्ट की मध्यस्थता की पहल सराहनीय है। 

निर्मोही अखाड़ा तो पहले से ही आपसी सुलह-समझौते के पक्ष में रहा है। बातचीत का विरोध करने वाले इस बात से डरे हैं कि मामला हल हो गया तो, उनकी दुकान बंद हो जाएगी।

वार्ता से हल हो सकते हैं विवाद
हिंदू पक्षकार महंत धर्मदास कहते हैं कि वार्ता से अक्सर बड़े-बड़े विवाद हल हो जाते हैं। रामजन्म भूमि पर मंदिर बने, अयोध्या के बाहर मस्जिद बने हमें एतराज नहीं है। अयोध्या गंगा-जमुनी तहजीब की नगरी है, यहां हिंदु-मुस्लिम एक साथ प्रेम से रहते है। समाधान कुछ इस तरह होना चाहिए कि जिसका संदेश पूरे विश्व में जाए, तहजीब और मजबूत हो।

मध्यस्थता से हल होगा मामला, इस पर संशय

मुस्लिम पक्षकार इकबाल अंसारी कहते हैं कि कोर्ट ने मध्यस्थता के लिए पैनल बनाया है। हम कोर्ट का सम्मान करते हैं लेकिन जो पैनल बनाया गया है, वह यह मामला हल करने में कामयाब होगा, इसमें संशय है। पैनल में शामिल श्रीश्री रविशंकर को लेकर अयोध्या में विरोध के स्वर मुखर हो रहे है। ऐसे में अभी से मध्यस्थता को लेकर कुछ कहना ठीक नहीं है।

मध्यस्थता से बढ़ेगी समाधान की उम्मीद
मुस्लिम पक्षकार हाजी महबूब कहते हैं कि मध्यस्थता की पहल 13 मार्च से शुरू हो जाएगी। हमें वार्ता के लिए सूचना दी जा चुकी है। वार्ता का स्वरूप क्या होगा, यह अभी तय नहीं है। मध्यस्थता की पहल कोर्ट ने की है यह स्वागतयोग्य है, उम्मीद है कि इससे समाधान की रास्ता खुलेगा। कोर्ट जो निर्णय देगी, वह हम मानने को तैयार हैं।

मध्यस्थता टीम के क्रियाकलाप पर रहेगी नजर
विहिप के प्रांतीय मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने कहा कि मध्यस्थता के लिए क्या किया जा रहा है, किससे वार्ता होगी, इस पर दृष्टि रखी जाएगी। मंदिर के अतिरिक्त हिंदू समाज कुछ और स्वीकार करेगा, इस पर संशय है। हिंदू समाज अपने पूर्वजों के बलिदान पर समझौता नहीं करने वाला है। जहां रामलला विराजमान हैं, उसको छोड़कर कुछ सोचा जाएगा तो हम विचार कर सकते हैं।
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