Ayodhya: संतों को वितरित किया जाने लगा ध्वजारोहण समारोह का निमंत्रण पत्र, बोले- ये सौभाग्यशाली क्षण
अयोध्या में 25 नवंबर को होने वाले ध्वजारोहण समारोह के लिए संतों को आमंत्रित करने के लिए निमंत्रण पत्र भेजा जाने लगा है। इस पर संतों ने कहा कि ये हमारे जीवन का बेहद सौभाग्यशाली क्षण है।
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प्रभु श्रीराम का भव्य मंदिर बनकर तैयार हो गया है। 25 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंदिर निर्माण पूरा होने का संदेश पूरे विश्व को देंगे। ऐसे में अयोध्या के लिए 25 नवंबर का दिन इतिहास के स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा। इस दिन विवाह पंचमी के साथ हनुमान जी का दिन मंगलवार भी है। ऐसे शुभ योग में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में धर्म ध्वज की स्थापना होने जा रही है, जिसका निमंत्रण पत्र भी अब अयोध्या के संत महंतों को दिया जा रहा है। निमंत्रण पत्र में कुछ नियम भी बताए गए हैं। एक गुप्त कोड भी अंकित किया गया है।
निमंत्रण पत्र के अनुसार 25 नवंबर के दिन सभी अतिथियों को रामपथ के बिरला धर्मशाला के सामने रामानंद द्वार से मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा। प्रातः 8:00 बजे से प्रवेश प्रारंभ होगा, जो 10:00 तक चलेगा। 10:00 बजे प्रवेश द्वार बंद हो जाएगा। अतिथियों से निमंत्रण पत्र के माध्यम से यह भी निवेदन किया गया है कि वह अपने निमंत्रण पत्र के साथ आधार कार्ड जरूर लेकर आएं। तपस्वी जी की छावनी में निमंत्रण पत्र जगद्गुरु परमहंस महाराज को पहला निमंत्रण मिला जिसके बाद परमहंस आचार्य ने उत्साह व्यक्त करते हुए ट्रस्ट का आभार जताया है।
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परमहंस आचार्य ने कहा कि यह अवसर केवल धार्मिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक होगा। उन्होंने बताया कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से उन्हें ध्वजारोहण कार्यक्रम का निमंत्रण पत्र डाक के माध्यम से प्राप्त हुआ है। उन्होंने इसे अपने जीवन का अत्यंत सौभाग्यपूर्ण क्षण बताया। कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी युग पुरुष हैं, जिन्होंने सनातन संस्कृति का गौरव विश्वभर में स्थापित किया है। आज पूरी दुनिया यह मान रही है कि शांति का मार्ग केवल सनातन धर्म से ही संभव है। पीएम मोदी ने राम मंदिर का भूमि पूजन किया, प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराई और अब उनके ही हाथों धर्म ध्वज की स्थापना होगी।
परमहंस आचार्य ने इसे 500 वर्षों के लंबे संघर्ष की पूर्णता का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि अयोध्या में यह आयोजन न केवल श्रद्धा का प्रतीक होगा बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी बनेगा।
25 नवंबर को आयोजित होने वाले इस पवित्र समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी उपस्थित रहेंगी। अयोध्या इस दिन एक बार फिर आस्था, भक्ति और सनातन संस्कृति के उल्लास में सराबोर होगी।
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