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अयोध्या : दान में ली गई महर्षि विद्यापीठ की 21 बीघा जमीन निरस्त, राज्य सरकार के पक्ष में जाएगी जमीन
Fri, 07 Jan 2022 03:55 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अयोध्या
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Fri, 07 Jan 2022 03:55 PM IST
सार
महर्षि विद्यापीठ की 21 बीघे जमीन का यह मामला एआरओ कोर्ट पर चल रहा था। इसमें से लगभग 19 बीघे से अधिक जमीन दान स्वरूप प्राप्त की गई थी जबकि लगभग दो बीघे जमीन संधिपत्र के आधार पर ली गई थी।
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राम जन्मभूमि परिसर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
महर्षि विद्यापीठ की लगभग 21 बीघा जमीन के बहुचर्चित मामले में एआरओ कोर्ट ने फैसला कर दिया है। महर्षि विद्यापीठ से दान में ली गई इस जमीन को खारिज कर दिया गया। इसे राज्य सरकार में निहित करने का फैसला किया गया है। जमीन का खारिज दाखिल करने वाले तत्कालीन नायब तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई भी होगी।
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महर्षि विद्यापीठ की 21 बीघा जमीन का यह मामला एआरओ कोर्ट पर चल रहा था। इसमें से लगभग 19 बीघे से अधिक जमीन दान स्वरूप प्राप्त की गई थी जबकि लगभग दो बीघे जमीन संधिपत्र के आधार पर ली गई थी। जमीन अनुसूचित जाति के रोंघई नामक व्यक्ति से महर्षि विद्यापीठ ने दान और संधिपत्र के आधार पर ली गई थी। शिकायत पर इसकी जांच लगभग साल पहले तत्कालीन अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व व अपर आयुक्त ने की थी। टीम ने अपनी जांच में पाया कि महर्षि विद्यापीठ ने नियमों के अनुसार जमीन नहीं प्राप्त की। इसकी रिपोर्ट तत्कालीन डीएम को भेजी गई थी। डीएम ने कमिश्नर और कमिश्नर ने राजस्व परिषद को रिपोर्ट भेजी थी।
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राजस्व परिषद की अनुमति के बाद यहां जिला शासकीय अधिवक्ता अनिल अग्रवाल ने इसके खिलाफ राज्य सरकार की ओर से अब से लगभग 11 महीने पहले एआरओ कोर्ट में वाद दाखिल किया था। एआरओ भान सिंह ने अब इस मामले में फैसला सुना दिया है। बताया गया है कि अनुसूचित जाति के व्यक्ति से दान या संधि के आधार पर जमीन लिए जाने के लिए नियमों का पालन नहीं किया गया। अनुसूचित जाति के व्यक्ति से जमीन लेने के लिए जिलाधिकारी से अनुमति अनिवार्य होती है लेकिन रोंघई से जमीन लेने में इसका पालन नहीं किया गया। कोर्ट ने महर्षि विद्यापीठ की इस जमीन को राज्य सरकार के पक्ष में निहित करने के आदेश के साथ ही तत्कालीन नायब तहसीलदार के खिलाफ कार्रवाई भी प्रस्तावित कर दी है।
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