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किस लग्न में कितने बजे करें होलिका दहन, जानने के लिए पढ़ें खबर

Mon, 19 Feb 2018 01:55 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Mon, 19 Feb 2018 01:55 PM IST
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auspicious time for holika dahan
- फोटो : demo pic
इस बार होलिका दहल एक मार्च को सात बजे के बाद ही करें। पूर्णिमा का मान एक मार्च को सुबह 7 बजकर 53 मिनट से दो मार्च की सुबह 6 बजे तक है जबकि भद्रा काल शाम 6 बजकर 58 मिनट के बाद ही खत्म होगा।
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ऐसे में होलिका दहन के लिए एक मार्च को शाम 7 बजे के बाद करना श्रेयस्कर रहेगा, जो अगले दिन सुबह 6 बजे तक पूर्णिमा का मान रहने तक करना उत्तम है। इस बार होलिका दहन में भद्रा काल लोगों को पशोपेश में नहीं डालेगा।
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पं. इंदीवर त्रिपाठी ने बताया कि बृहस्पतिवार सुबह 7:53 बजे से पूर्णिमा का मान शुरू हो जाएगा। ये लगभग 22 घंटे रहेगा। उन्होंने बताया कि चूंकि भद्रा बृहस्पतिवार शाम 6:58 बजे ही खत्म हो चुकी होगी, इसलिए भद्रा का संकट भी नहीं रहेगा। शाम को निशा मुख प्रदोष काल से लेकर निशीथ काल तक होलिका दहन करना उत्तम रहेगा। विभिन्न लोकरीति के अनुसार लोग ठंडी होली का भी पूजन करेंगे।
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रंग गुलाल से सजने लगे बाजार

auspicious time for holika dahan
रंग-गुलाल की दुकान - फोटो : amar ujala
होलिका दहन की तीन प्रमुख शर्तें
1- पूर्णिमा की तिथि हो।
2- रात का समय हो।
3- भद्रा बीत चुकी हो।
- आचार्य प्रदीप (निर्णय सिंधु के अनुसार)

होलिका पूजन में डुंडिका देवी का पूजन सूर्यास्त के बाद करना चाहिए। अबीर गुलाल मिश्रित जल से होलिका का पूजन करना चाहिए। उपले, नए अनाज की बालियां चढ़ानी चाहिए। होलिका दहन के बाद सुबह गन्ने को भूनने के साथ ही होलिका में मिष्ठान्न अर्पित करना चाहिए। होलिका में नए अनाज की भुनी बालियां और गन्ने भूनकर चूसने के लिए घर लाने चाहिए।

होली का खुमार धीरे-धीरे बाजारों में तारी होने लगा है। भले ही होली के अभी ग्यारह दिन बचे हो, लेकिन शहर के प्रमुख बाजारों में रंग-गुलाल संग रंग-बिरंगी पिचकारियां लोगों को लुभाने लगी है।

कार्टून कैरेक्टर की खास पिचकारियां बच्चों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है तो गुलाल के चटख रंग लोगों को लुभा रहे हैं। बसंत पंचमी से चौराहों पर लगी अरंड की डाल की होलिका का आकार भी अब धीरे-धीरे बढ़ने लगा है।
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