एमसीआई की तरह कार्य करेगा अटल चिकित्सा विश्वविद्यालय, चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता में होगा सुधार
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पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी के नाम से बनने वाला चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रदेश में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की तरह ही कार्य करेगा। मेडिकल पाठ्यक्रम एमसीआई से ही नियंत्रित होंगे लेकिन प्रदेश स्तर पर इसकी निगरानी अटल चिविवि करेगा।
सभी मेडिकल कॉलेज, पैरामेडिकल और नर्सिंग कॉलेज एक ही छत के नीचे आने से इनकी शिक्षा गुणवत्ता में सुधार होगा। पाठ्यक्रम ही नहीं संस्थानों में चलने वाली कक्षाओं तक पर विश्वविद्यालय से नजर रखी जाएगी। स्टेट मेडिकल फैकल्टी से चलने वाले पाठ्यक्रम भी अटल बिहारी चिकित्सा विवि से नियंत्रित किए जाएंगे।
किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के बाद प्रदेश में स्व. अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विश्वविद्यालय से प्रदेश के मेडिकल एजुकेशन के क्षेत्र में बड़ा परिवर्तन होगा। केजीएमयू और सैफई चिविवि अपने एक्ट से संचालित होते हैं और अपनी डिग्री देते हैं। केजीएमयू से नए खुले मेडिकल और कई निजी नर्सिंग कॉलेज को सम्बद्धता दी गई है।
अटल बिहारी चिकित्सा विवि के आने से अब राजकीय मेडिकल कॉलेजों के साथ ही निजी क्षेत्र के 40 मेडिकल, 17 डेंटल, 299 नर्सिंग व पैरामेडिकल कॉलेजों को संबद्धता दी जाएगी। अभी ये कॉलेज अपने-अपने क्षेत्र के शिक्षा विश्वविद्यालयों से संबद्ध थे और वहीं से इनकी डिग्री दी जाती थी। आने वाले समय में चिकित्सा क्षेत्र की अधिकतर डिग्री, डिप्लोमा अटल बिहारी चिविवि से नियंत्रित होंगे।
अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विवि भी सभी मेडिकल कॉलेजों पर रखेगा नजर
चिकित्सा शिक्षा विभाग के अनुसार मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने मेडिकल कॉलेजों की शैक्षिक गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए एक आईटी सेल का गठन किया गया है। ये सेल प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों के लेक्चर थिएटर की भी लाइव निगरानी और स्क्रीनिंग करती है। जिससे वहां के शिक्षक और उसके पढ़ाने की क्षमता, छात्रों की उपस्थिति भी एमसीआई से छुप नहीं पाती। गड़बड़ी करने वाले कॉलेज के संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों के पास आईटी सेल का अलर्ट पहुंच जाता है।
इसी तरह अटल बिहारी वाजपेयी चिकित्सा विवि भी सभी मेडिकल कॉलेजों पर रखेगा, जिससे शैक्षिक गुणवत्ता को सुधारा जा सके। नर्सिंग, टेक्नीशियन, ओटी टेक्नीशियन जैसे विशेषज्ञता वाले पाठ्यक्रमों की गुणवत्ता के सुधार के लिए भी चिकित्सा विवि प्रयास करेगा। मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के दिशा-निर्देशन में मेडिकल कॉलेज की ग्रेडिंग भी की जा सकेगी।
गुणवत्ता सुधार सबसे बड़ी चुनौती
प्रदेश में 6210 मेडिकल छात्रों, 2016 डेंटल छात्रों 12544 नर्सिंग व पैरामेडिकल छात्रों का प्रतिवर्ष पंजीकरण होता है। लगभग 2900 डिग्री और 29 हजार से पैरामेडिकल डिप्लोमा पाठ्यक्रम लगभग 34 विशेषज्ञताओं में चलाए जाते हैं। अधिकतर पैरामेडिकल और नर्सिंग पाठ्यक्रम स्टेट मेडिकल फैकल्टी से नियंत्रित होते हैं। नए चिकित्सा विवि के लिए इन पर नियंत्रण और गुणवत्ता में सुधार बड़ी चुनौती होगा।
एक नजर अटल चिविवि के क्षेत्रफल पर
प्रशासकीय भवन का-क्षेत्रफल 27,540 वर्ग मीटर
ऑडिटोरियम 1500 क्षमता युक्त - क्षेत्रफल 12,600 वर्ग मीटर
पुस्तकालय- दो लाख किताबें होंगी, 100 कम्प्यूटर व ई-लाइब्रेरी भी
खेल का मैदान व क्लॉक टॉवर - क्षेत्रफल 740 वर्गमीटर
एम्फीथिएटर 1000 व्यक्तियों की क्षमता होगी। क्षेत्रफल 500 वर्ग मीटर
अतिथि गृह 16 कमरे, चार उच्च श्रेणी कमरे- क्षेत्रफल 2730 वर्गमीटर
ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट से होगा निर्माण, हरियाली का रखा जाएगा विशेष ध्यान
65 फीसदी ऊर्जा की बचत सौर ऊर्जा से होगी
अटल जी की याद में लघु संग्रहालय भी बनेगा
200 करोड़ रुपये खर्च होंगे भवन निर्माण में