यादें: शंभू की रबड़ी, नौबत की जलेबी व तिवारी की चाट बिना पूरी नहीं होती थी अटल की बात
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अटल बिहारी वाजपेयी खाने के काफी शौकीन। उन्हें न सिर्फ मिठाई पसंद थी बल्कि उन्हें चाट भी काफी पसंद थी। चौक की ठंडाई भी उनकी मनपसंद वस्तुओं में थी। अटल उन दिनों लखनऊ में 'स्वदेश' अखबार संभाल रहे थे। वह अमीनाबाद में कृष्णोगापाल कलंत्री के घर पर रहते थे।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक स्व. भाऊराव देवरस की दुकान के ऊपर स्वदेश का कार्यालय था। दिन भर वहीं पर लखनऊ वालों के साथ अटल की मंडली जमती थी। लखनऊ के पूर्व महापौर डॉ. दाऊजी गुप्ता भी अटल के करीबी रहे। हालांकि अटल जी संघ और जनसंघ के थे लेकिन डॉ. दाऊजी से उनकी खूब छनती।
इसकी एक वजह कृष्णगोपाल कलंत्री के बेटे नरेन्द्र कलंत्री से डॉ. दाऊजी की दोस्ती थी। डॉ. दाऊजी अक्सर नरेन्द्र कलंत्री से मिलने जाते थे। उसी दौरान अटल जी से भी उनकी घनिष्ठता हो गई। दाऊजी बताते हैं कि कोई दिन ऐसा नहीं गुजरता था जब दिन में दो-तीन बार हम लोगों की चौकड़ी न जमती हो।
'तिवारी जी की चाट इंतजार कर रही होगी'
डॉ. दाऊजी गुप्त कहते हैं, 'अमीनाबाद में बताशे वाली गली के पास शंभू हलवाई की रबड़ी, गणेशगंज के नौबत हलवाई की जलेबी और गणेशगंज के ही रामनारायण तिवारी की चाट का स्वाद हम लोगों की जुबान पर ऐसा चढ़ा कि बिना खाए हम लोगों का खाना ही हजम नहीं होता था।'
डॉ. गुप्ता बताते हैं, 'एक दिन हम सभी लोग अटल जी के कमरे के बाहर बैठे इंतजार कर रहे थे। अटल जी काम कर रहे थे। हम लोग चुपचाप इंतजार कर रहे थे कि कब उनका काम खत्म हो और चाट खाई जाए। अचानक अंदर से अटल जी की आवाज आई, 'अब भाई बरदाश्त नहीं हो रहा है। तिवारी जी की चाट इंतजार कर रही होगी।'
कहां है इमरती और चाट
बकौल गुप्त, 'अटल जी बड़े पदों पर भी पहुंच गए लेकिन वह लखनऊ आने पर इन वस्तुओं का स्वाद लिए बिना नहीं रहे। वह विपक्ष के नेता थे। मैं एक दिन उनसे मिलने पहुंचा। शाम का वक्त था। मुझे जैसे ही देखा हाथ बढ़ाते हुए बोले, 'कहां है हमारी रबड़ी और चाट। बिना उसके कोई बात नहीं होगी।'