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कर्ज से मुक्ति और अखंड राजयोग
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Sat, 20 Jul 2013 01:16 PM IST
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शहरों के विकास से जुड़े एक विभाग के ज्योतिषी साहब आजकल खासे चर्चा में हैं। वजह, उनके दफ्तर में फाइलें पड़ी रह जाएं, बाबू बैठे रह जाएं, आगंतुक आएं और ऊंघते रहें लेकिन उनकी व उनके ज्योतिषी गुरु पर कोई फर्क नहीं।
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दोनों पूरे दावे व दबंगई के साथ अपने-अपने ज्योतिष ज्ञान से एक दूसरे की परीक्षा लेते हैं। अब उनके इस ज्योतिषीय शास्त्रार्थ और किस्सों की चर्चा बापू भवन में पूरे चाव से सुनने को मिल सकती है।
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साहब का दर्द है कि उनका दो दशक की नौकरी से मन ऊब गया। 35 लाख का कर्ज सिर पर है। कर्ज चुकता हो तो नौकरी से मुक्ति लें।
गुरु ने मंत्र दे दिया है और उनकी उम्मीदें बढ़ा दी हैं। मगर गुरुजी ने लंबे शास्त्रार्थ के बाद अपनी अपेक्षा भी सामने रख दी है, वह भी पूरी साफगोई से।
गुरुजी की छोटी सी इच्छा है कि वह साहब का भला मुफ्त में करेंगे लेकिन वह उन्हें ऐसे क्लाइंट उपलब्ध कराएं जो एक मुहूर्त के बदले कम से कम 1100, 2100 और 5100 दक्षिणा का बंदोबस्त करा सकें।
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सचिवालय के बड़का साहब लोग हों तो उनकी मुराद पूरा कराने की गारंटी है।