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कला में सिर्फ प्रतिभा नहीं, साधना और संवेदनशीलता भी जरूरी : सोनल मानसिंह

Tue, 22 Sep 2026 02:32 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 22 Sep 2026 02:32 AM IST
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Art requires not just talent, but also dedication and sensitivity: Sonal Mansingh
भातखंडे में पद्मविभूषण डॉ. सोनल मानसिंह ने बताई भाव, दृष्टि और अंग के तालमेल की बारीकियां
लखनऊ। भारतीय शास्त्रीय कला को समझने के लिए केवल नृत्य सीखना काफी नहीं है उसके भाव और परंपरा को भी समझना जरूरी है। पद्मविभूषण डॉ. सोनल मानसिंह ने सोमवार को भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों से संवाद के दौरान कहा कि कलाकार की पहचान उसके निरंतर अभ्यास, अनुशासन और संवेदनशीलता से बनती है। पंडित बिरजू महाराज की स्मृति में स्थापित बिरजू महाराज चेयर के तहत आयोजित विशेष विमर्श और नृत्य कार्यशाला में उन्होंने विद्यार्थियों को कला-साधना के कई पहलुओं से परिचित कराया।
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कार्यक्रम के पहले सत्र में डॉ. सोनल मानसिंह ने वसुधैव कुटुंबकम का उदाहरण देते हुए कहा कि ज्ञान जहां से मिले, उसे ग्रहण करना चाहिए। उन्होंने गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और अनुशासन को भी कला-साधना का जरूरी हिस्सा बताया। उन्होंने नाट्यशास्त्र का संदर्भ देते हुए कहा कि कला केवल मंच पर प्रदर्शन तक सीमित नहीं है। यह जीवन और समाज को समझने का माध्यम भी है। अष्टपदी के जरिए प्रेम और भक्ति के अलग-अलग भावों की चर्चा करते हुए उन्होंने वात्सल्य, सख्य, दास्य और माधुर्य भाव समझाए।
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सिखाया हाथ से दृष्टि और भाव तक का तालमेल

दूसरे सत्र में विद्यार्थियों ने भरतनाट्यम और कथक की प्रस्तुतियां दीं। डॉ. मानसिंह ने यतो हस्तस्ततो दृष्टिः... के जरिये नृत्य में अंग, दृष्टि, मन, भाव और रस के तालमेल को समझाया। कहा कि अच्छा कलाकार बनने के लिए आसपास के जीवन, प्रकृति और लोगों का सजग होकर अवलोकन करना जरूरी है। इससे पहले कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने डॉ. सोनल मानसिंह को अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंट कर किया। कुलसचिव अतुल कुमार ने पुष्पगुच्छ भेंट किया। कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष, शिक्षक, शोधार्थी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।

भातखंडे में पद्मविभूषण डॉ. सोनल मानसिंह ने बताई भाव, दृष्टि और अंग के तालमेल की बारीकियां

भातखंडे में पद्मविभूषण डॉ. सोनल मानसिंह ने बताई भाव, दृष्टि और अंग के तालमेल की बारीकियां

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