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जवान अपराध करे तो सेना जरूर दर्ज कराए एफआईआर

Wed, 19 Apr 2017 01:55 PM IST
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमरउजाला, लखनऊ Updated Wed, 19 Apr 2017 01:55 PM IST
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armed forces tribunal took big decision for criminal soldiers
डेमो

आर्म्ड फोर्सेज ट्रिब्यूनल (एएफटी) लखनऊ ने भारतीय सेना की तीनों विंग को निर्देश दिए हैं कि वे सेना के किसी भी व्यक्ति पर संज्ञेय अपराधों के मामलों में अनिवार्य रूप से एफआईआर दर्ज करवाएं।

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एयरफोर्स के स्टॉक से केरोसिन व डीजल चोरी के आरोपों में अक्तूबर 2001 में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट मार्शल से सजा पाए कानपुर के सैनिक चंद्रभूषण यादव की अपील को स्वीकार करते हुए एएफटी ने मंगलवार को यह महत्वपूर्ण निर्णय दिया।
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एएफटी ने डिस्ट्रिक्ट कोर्ट मार्शल के फैसले को रद्द करते सैनिक को सभी सेवा लाभ देने के निर्देश दिए हैं। एएफटी के जस्टिस देवी प्रसाद सिंह और एयर मार्शल अनिल चोपड़ा ने कहा कि सेना के स्टाफ से जुड़े कई आपराधिक मामलों में थल सेना, वायुसेना और नौसेना एफआईआर दर्ज नहीं करवाती है।
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संज्ञेय अपराधों में भी ऐसा किया जाता है, जबकि सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व में इन मामलों में एफआईआर दर्ज कराने के लिए निर्देश दिए हैं। सीआरपीसी के सेक्शन 154 में भी इसकी अनिवार्यता बताई गई है। 

सै‌न‌िक की अपील पर सुनाया फैसला

armed forces tribunal took big decision for criminal soldiers
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चंद्रभूषण यादव ने इस मामले में 2010 में याचिका दायर की थी। इस पर ट्रिब्यूनल ने अपने निर्णय में डिस्ट्रिक्ट कोर्ट मार्शल की 25 अक्तूबर 2001 की कार्रवाई को रद्द करते हुए कहा कि चंद्रभूषण को दी गई सजा खारिज की जाती है।

उनकी सेवा पूरे कार्यकाल के लिए जारी मानी जाए। साथ ही जिस दिन वे जिस रैंक से हटाए गए, उसके बाद उन्हें मिलने वाले समस्त सेवा लाभ प्रदान किए जाएं। हालांकि उन्हें वेतन एरियर 50 प्रतिशत प्रदान किया जाएगा। इसके लिए केंद्र सरकार को चार महीने का समय दिया गया है।

साथ ही निर्णय की कॉपी एयरफोर्स सहित थल सेना और नौसेना के चीफ को भी भेजने के लिए कहा गया है ताकि इसमें दिए निर्देशों पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित कराई जा सके और वे अपनी विंग में होने वाले अपराधों में निर्धारित कानूनों के मुताबिक उचित कार्यवाही करें।
 

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