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1.76 करोड़ की हेराफेरी में यादव सिंह पर केस चलाने को मंजूरी
Wed, 28 Jul 2021 10:14 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Wed, 28 Jul 2021 10:14 AM IST
सार
वर्ष 2007-11 के बीच नोएडा प्राधिकरण में गुल इंजीनियर्स कंपनी को कुल सात काम दिए गए। यह कंपनी टेंडर पाने की शर्तें पूरी नहीं करती थी। इस मामले में सीबीआई ने जांच की। आरोप सही पाए जाने पर यादव सिंह को जेल भेज दिया गया।
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यादव सिंह
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
यूपी सरकार ने नोएडा अथॉरिटी के तत्कालीन चीफ मेंटिनेंस इंजीनियर (सीएमई-जल) यादव सिंह पर टेंडर में घपला करने के मामले में मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी है। तत्कालीन परियोजना अभियंता वेदपाल और सहायक परियोजना अभियंता एसके अग्रवाल पर भी इन्हीं मामलों में मुकदमा चलेगा।
अपर मुख्य सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास अरविंद कुमार ने बताया कि तय प्रक्रिया के तहत तीनों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी गई है। जांच में पाया गया कि इन प्रकरणों में यादव सिंह ने पद का भी दुरुपयोग किया जिससे नोएडा प्राधिकरण को 1.76 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
वर्ष 2007-11 के बीच नोएडा प्राधिकरण में गुल इंजीनियर्स कंपनी को कुल सात काम दिए गए। यह कंपनी टेंडर पाने की शर्तें पूरी नहीं करती थी। इस मामले में सीबीआई ने जांच की। आरोप सही पाए जाने पर यादव सिंह को जेल भेज दिया गया। सीबीआई के स्तर से चार्जशीट दाखिल करने में देरी हुई तो इसका फायदा यादव सिंह को मिला। उसे कोर्ट से एक साल पहले जमानत मिल गई। औद्योगिक विकास विभाग के आदेश में कहा गया है कि ये दंडनीय है। सरकार इन अपराधों का सक्षम न्यायालय द्वारा संज्ञान करने की स्वीकृति देती है।
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अपर मुख्य सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास अरविंद कुमार ने बताया कि तय प्रक्रिया के तहत तीनों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति दे दी गई है। जांच में पाया गया कि इन प्रकरणों में यादव सिंह ने पद का भी दुरुपयोग किया जिससे नोएडा प्राधिकरण को 1.76 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।
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वर्ष 2007-11 के बीच नोएडा प्राधिकरण में गुल इंजीनियर्स कंपनी को कुल सात काम दिए गए। यह कंपनी टेंडर पाने की शर्तें पूरी नहीं करती थी। इस मामले में सीबीआई ने जांच की। आरोप सही पाए जाने पर यादव सिंह को जेल भेज दिया गया। सीबीआई के स्तर से चार्जशीट दाखिल करने में देरी हुई तो इसका फायदा यादव सिंह को मिला। उसे कोर्ट से एक साल पहले जमानत मिल गई। औद्योगिक विकास विभाग के आदेश में कहा गया है कि ये दंडनीय है। सरकार इन अपराधों का सक्षम न्यायालय द्वारा संज्ञान करने की स्वीकृति देती है।
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