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प्रदेश में एक लाख से अधिक श्रमिकों को रोजगार और किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषक सशक्तिकरण योजना को मंजूरी
Thu, 04 Jun 2020 12:13 AM IST
अवधेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: अवधेश कुमार
Updated Thu, 04 Jun 2020 12:13 AM IST
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किसान(फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
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प्रदेश सरकार ने कोविड-19 महामारी के दौरान चुनौती का सामना कर रहे किसानों की मदद के लिए कृषक सशक्तिकरण योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना के अंतर्गत प्रदेश के 1 लाख से अधिक श्रमिकों को तत्काल रोजगार और करीब 50 हजार किसानों को सीधे फायदा मिलेगा। किसानों को चालू वित्त वर्ष में इस योजना के अंतर्गत तैयार उत्पादों की बिक्री से 358 करोड़ रुपये अतिरिक्त आय हो सकेगी।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना महामारी के दौरान दूसरे राज्यों से गांवों को लौट रहे श्रमिकों के लिए रोजगार का अवसर बढ़ाने और किसानों के आय में स्थायी वृद्धि को ध्यान में रखते हुए 7 मई को एक योजना तैयार करने का निर्देश दिया था। नियोजन विभाग के अंतर्गत कार्यरत राज्य जैव ऊर्जा विकास बोर्ड ने मनरेगा कन्वर्जेंस के जरिए मनरेगा जॉब कार्ड धारकों के लिए नियमित रोजगार व स्वरोजगार के अवसरों के सृजन पर केंद्रित कृषक सशक्तिकरण योजना तैयार की।
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना महामारी के दौरान दूसरे राज्यों से गांवों को लौट रहे श्रमिकों के लिए रोजगार का अवसर बढ़ाने और किसानों के आय में स्थायी वृद्धि को ध्यान में रखते हुए 7 मई को एक योजना तैयार करने का निर्देश दिया था। नियोजन विभाग के अंतर्गत कार्यरत राज्य जैव ऊर्जा विकास बोर्ड ने मनरेगा कन्वर्जेंस के जरिए मनरेगा जॉब कार्ड धारकों के लिए नियमित रोजगार व स्वरोजगार के अवसरों के सृजन पर केंद्रित कृषक सशक्तिकरण योजना तैयार की।
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किसानों व ग्रामीण बेरोजगारों को सशक्त करने की तैयारी
इसमें स्पष्ट किया गया है कि किस तरह इस योजना से नियमित रोजगार व आय के अवसर बनेंगे और मुख्यमंत्री की 10 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देगी। इस योजना का क्रियान्वयन फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों की सहायता से होगा और राज्य जैव ऊर्जा विकास बोर्ड इसकी नोडल एजेंसी होगी। राज्य जैव ऊर्जा विकास बोर्ड अब तक 100 से अधिक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों के जरिए कलस्टर एप्रोच में औषधीय व सगंध खेती तथा कृषि में नवाचार से जुड़े तमाम मॉडल प्रोजेक्ट पर काम करवा रहा था। इनमें कई मॉडल की राष्ट्रीय स्तर पर तारीफ हुई है। कृषक समृद्धि योजना में उन्हीं आजमाए प्रयोगों को बड़े स्तर पर लागू कर किसानों व ग्रामीण बेरोजगारों को सशक्त करने की तैयारी है।
शासन ने बोर्ड को ही इस योजना के क्रियान्वयन के लिए नोडल एजेंसी नामित कर दिया है। प्रारंभिक चरण में प्रदेश स्तर पर बड़े पैमाने पर औषधीय व सगंध खेती, टिशू कल्चर बांस, खजूर व सहजन रोपण कार्यक्रम का क्रियान्वयन होगा। प्रमुख सचिव ग्राम विकास मनोज कुमार सिंह ने नई योजना व उसके क्रियान्वयन से संबंधित विस्तृत गाइडलाइन जारी कर कार्यवाही के लिए जिलाधिकारियों को भेज दी है।
इसमें स्पष्ट किया गया है कि किस तरह इस योजना से नियमित रोजगार व आय के अवसर बनेंगे और मुख्यमंत्री की 10 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था में अहम योगदान देगी। इस योजना का क्रियान्वयन फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों की सहायता से होगा और राज्य जैव ऊर्जा विकास बोर्ड इसकी नोडल एजेंसी होगी। राज्य जैव ऊर्जा विकास बोर्ड अब तक 100 से अधिक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियों के जरिए कलस्टर एप्रोच में औषधीय व सगंध खेती तथा कृषि में नवाचार से जुड़े तमाम मॉडल प्रोजेक्ट पर काम करवा रहा था। इनमें कई मॉडल की राष्ट्रीय स्तर पर तारीफ हुई है। कृषक समृद्धि योजना में उन्हीं आजमाए प्रयोगों को बड़े स्तर पर लागू कर किसानों व ग्रामीण बेरोजगारों को सशक्त करने की तैयारी है।
शासन ने बोर्ड को ही इस योजना के क्रियान्वयन के लिए नोडल एजेंसी नामित कर दिया है। प्रारंभिक चरण में प्रदेश स्तर पर बड़े पैमाने पर औषधीय व सगंध खेती, टिशू कल्चर बांस, खजूर व सहजन रोपण कार्यक्रम का क्रियान्वयन होगा। प्रमुख सचिव ग्राम विकास मनोज कुमार सिंह ने नई योजना व उसके क्रियान्वयन से संबंधित विस्तृत गाइडलाइन जारी कर कार्यवाही के लिए जिलाधिकारियों को भेज दी है।
41 जिलों में तत्काल शुरू होगा काम
यह योजना पूरे प्रदेश के लिए तैयार की गई है। पर, फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियां (एफपीसी) वर्तमान में 41 जिलों में ही काम कर रही हैं। इन जिलों में तत्काल प्रभाव से योजना का क्रियान्वयन शुरू हो जाएगा। अन्य जिलों में एफपीसी का गठन कर योजना को आगे बढ़ाया जाएगा।
संगध और औषधीय खेती से 77 हजार बेराजगारों को रोजगार
सरकार ने लेमनग्रास, पामारोजा, सेट्रोनेला, खस, सर्पगंधा, सतावर, गिलोय, गुग्गुल, व बाजार मांग के अनुसार बहुवर्षीय प्रजाति के अन्य पौधों का रोपण की योजना तैयार की है। मनरेगा के अंतर्गत अर्ह जॉब कार्डधारकों की भूमि पर इनकी खेती कराई जाएगी। चालू वित्त वर्ष में 29875 एकड़ क्षेत्र में सगंध व औषधीय खेती की योजना है। इससे करीब इतने ही किसानों को सीधे फायदा होगा। इससे 77027 श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर मनरेगा में 50 दिन का काम मिल सकेगा। इससे किसानों को सीधे तौर पर 358.50 करोड़ रुपये की आय होगी।
नदियों के किनारे बांस लगेंगे इस योजना के अंतर्गत प्रदेश में पहली बार बांस की संस्थागत खेती की योजना तैयार की गई है। प्रदेश में नदियों के किनारे के 11,125 एकड़ बांस रोपण की तैयारी है। इससे 11125 किसानों को सीधे फायदा होगा। इससे 26713 श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सकेगा। इसे सरकार की नदी संरक्षण मुहिम को बल मिलेगा। इसके अलावा बुंदेलखंड में खजूर की खेती की योजना बनाई गई है। इसके लिए सेंट्रल आरिड जोन रिसर्च इंस्टीट्यूट जोधपुर व कृषि विश्वविद्यालय आणंद गुजरात से टिशू कल्चर खजूर के पौधे मंगाने की योजना है। इसी तरह 5000 एकड़ सहजन लगाने का प्रस्ताव है। इसके लिए तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय के अधीन पेरियाकुलम इंस्टीट्यूट ऑफ हार्टिकल्चर रिसर्च से उच्च गुणवता के पीकेएम-1 व पीकेएम-2 प्रजाति की व्यवस्था की जाएगी।
खेती से उपज बिक्री तक मदद पाएंगे किसान फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियां मनरेगा कार्ड धारक लाभार्थी किसान का चिह्नांकन, किसानों का प्रशिक्षण, पौधरोपण, उपज तैयार करने व उत्पाद की बिक्री में सहयोग करेंगे। योजना में उत्पदित वस्तुओं का विक्रय संबंधित एफपीसी बोर्ड के समन्वय से करेगा। राज्य जैव विकास बोर्ड मेट व तकनीकी सहायक को मापांकन के संबंध में प्रशिक्षण देगा। यही प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार करेगा और प्रशिक्षण साहित्य उपलब्ध कराएगा।
यह योजना पूरे प्रदेश के लिए तैयार की गई है। पर, फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियां (एफपीसी) वर्तमान में 41 जिलों में ही काम कर रही हैं। इन जिलों में तत्काल प्रभाव से योजना का क्रियान्वयन शुरू हो जाएगा। अन्य जिलों में एफपीसी का गठन कर योजना को आगे बढ़ाया जाएगा।
संगध और औषधीय खेती से 77 हजार बेराजगारों को रोजगार
सरकार ने लेमनग्रास, पामारोजा, सेट्रोनेला, खस, सर्पगंधा, सतावर, गिलोय, गुग्गुल, व बाजार मांग के अनुसार बहुवर्षीय प्रजाति के अन्य पौधों का रोपण की योजना तैयार की है। मनरेगा के अंतर्गत अर्ह जॉब कार्डधारकों की भूमि पर इनकी खेती कराई जाएगी। चालू वित्त वर्ष में 29875 एकड़ क्षेत्र में सगंध व औषधीय खेती की योजना है। इससे करीब इतने ही किसानों को सीधे फायदा होगा। इससे 77027 श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर मनरेगा में 50 दिन का काम मिल सकेगा। इससे किसानों को सीधे तौर पर 358.50 करोड़ रुपये की आय होगी।
नदियों के किनारे बांस लगेंगे इस योजना के अंतर्गत प्रदेश में पहली बार बांस की संस्थागत खेती की योजना तैयार की गई है। प्रदेश में नदियों के किनारे के 11,125 एकड़ बांस रोपण की तैयारी है। इससे 11125 किसानों को सीधे फायदा होगा। इससे 26713 श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सकेगा। इसे सरकार की नदी संरक्षण मुहिम को बल मिलेगा। इसके अलावा बुंदेलखंड में खजूर की खेती की योजना बनाई गई है। इसके लिए सेंट्रल आरिड जोन रिसर्च इंस्टीट्यूट जोधपुर व कृषि विश्वविद्यालय आणंद गुजरात से टिशू कल्चर खजूर के पौधे मंगाने की योजना है। इसी तरह 5000 एकड़ सहजन लगाने का प्रस्ताव है। इसके लिए तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय के अधीन पेरियाकुलम इंस्टीट्यूट ऑफ हार्टिकल्चर रिसर्च से उच्च गुणवता के पीकेएम-1 व पीकेएम-2 प्रजाति की व्यवस्था की जाएगी।
खेती से उपज बिक्री तक मदद पाएंगे किसान फार्मर प्रोड्यूसर कंपनियां मनरेगा कार्ड धारक लाभार्थी किसान का चिह्नांकन, किसानों का प्रशिक्षण, पौधरोपण, उपज तैयार करने व उत्पाद की बिक्री में सहयोग करेंगे। योजना में उत्पदित वस्तुओं का विक्रय संबंधित एफपीसी बोर्ड के समन्वय से करेगा। राज्य जैव विकास बोर्ड मेट व तकनीकी सहायक को मापांकन के संबंध में प्रशिक्षण देगा। यही प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार करेगा और प्रशिक्षण साहित्य उपलब्ध कराएगा।