{"_id":"6004a6a654440f794c71bf96","slug":"answer-from-the-government-called-for-the-closure-of-the-181-women-s-helpline","type":"story","status":"publish","title_hn":"181 वीमेन हेल्पलाइन बंद किए जाने पर सरकार से जवाब तलब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
181 वीमेन हेल्पलाइन बंद किए जाने पर सरकार से जवाब तलब
Mon, 18 Jan 2021 02:35 AM IST
पंकज श्रीवास्तव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: पंकज श्रीवास्तव
Updated Mon, 18 Jan 2021 02:35 AM IST
विज्ञापन
लखनऊ हाईकोर्ट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने 181 वीमेन हेल्पलाइन सेवा बंद किए जाने के मामले में एक पीआईएल पर केंद्र व राज्य सरकार से चार हफ्ते में जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति सौरभ लवानिया की खंडपीठ ने यह आदेश यूपी वर्कर्स फ्रंट के अध्यक्ष दिनकर कपूर की जनहित याचिका पर दिया है।
याची का कहना था कि सरकार ने निर्भया कांड के बाद महिला सुरक्षा के लिए बनी जस्टिस वर्मा कमेटी की संस्तुतियों के आधार पर पूरे देश में 181 वीमेन हेल्पलाइन शुरू की थी। लेकिन इस सेवा को बंद कर उसे पुलिस की सामान्य हेल्पलाइन 112 में समाहित कर दिया। जबकि जमीनी स्तर पर महिलाओं को रेसक्यू वैन व एक कॉल के जरिये तत्काल मदद के साथ ही स्वास्थ्य, संरक्षण व अन्य सुविधाएं 181 वीमेन हेल्पलाइन से मुहैया कराई जा रही थीं। जबकि यूपी महिलाओं के प्रति बढ़ती हिंसा के मामले में देश में शीर्ष स्थान पर है। हाथरस, बदायूं, नोएडा, खीरी से लेकर गोरखपुर तक महिलाओं के साथ हिंसा, बलात्कार, छेड़खानी व हत्या की घटनाएं हो रही हैं।
याचिका में प्रदेश महिलाओं की सुरक्षा के लिए 181 वीमेन हेल्पलाइन सेवा को पूरी क्षमता से चलाने का आग्रह किया गया है। कोर्ट ने याचिका पर जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए केंद्र व राज्य सरकार के वकीलों के आग्रह पर चार हफ्ते के समय दिया है। इसके बाद मामले को सूचीबद्ध करने को कहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
याची का कहना था कि सरकार ने निर्भया कांड के बाद महिला सुरक्षा के लिए बनी जस्टिस वर्मा कमेटी की संस्तुतियों के आधार पर पूरे देश में 181 वीमेन हेल्पलाइन शुरू की थी। लेकिन इस सेवा को बंद कर उसे पुलिस की सामान्य हेल्पलाइन 112 में समाहित कर दिया। जबकि जमीनी स्तर पर महिलाओं को रेसक्यू वैन व एक कॉल के जरिये तत्काल मदद के साथ ही स्वास्थ्य, संरक्षण व अन्य सुविधाएं 181 वीमेन हेल्पलाइन से मुहैया कराई जा रही थीं। जबकि यूपी महिलाओं के प्रति बढ़ती हिंसा के मामले में देश में शीर्ष स्थान पर है। हाथरस, बदायूं, नोएडा, खीरी से लेकर गोरखपुर तक महिलाओं के साथ हिंसा, बलात्कार, छेड़खानी व हत्या की घटनाएं हो रही हैं।
विज्ञापन
याचिका में प्रदेश महिलाओं की सुरक्षा के लिए 181 वीमेन हेल्पलाइन सेवा को पूरी क्षमता से चलाने का आग्रह किया गया है। कोर्ट ने याचिका पर जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए केंद्र व राज्य सरकार के वकीलों के आग्रह पर चार हफ्ते के समय दिया है। इसके बाद मामले को सूचीबद्ध करने को कहा है।
विज्ञापन