फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   another blackbuck dies in lucknow zoo, toll reaches 18

जहरीले चारे की 18वीं शिकार बनी मादा हिरन

Tue, 17 Sep 2013 12:51 PM IST
आशुतोष मिश्र/लखनऊ
आशुतोष मिश्र/लखनऊ Updated Tue, 17 Sep 2013 12:51 PM IST
विज्ञापन
another blackbuck dies in lucknow zoo, toll reaches 18

मंगलवार तड़के लखनऊ चिड़ियाघर में एक और सफेद मादा ब्लैकबक ने दम तोड़ दिया।

विज्ञापन


पिछले 48 घंटों से उसे इंटेंसिव केयर में रखा गया था, लेकिन डॉक्टरों की टीम उसकी जान बचाने में नाकामयाब साबित हुए।

इसकी मौत की वजह भी जहरीला चारा ही बताई जा रही है। ऐसे में, चिड़ियाघर में अब तक मरे काले हिरनों की संख्या बढ़कर 18 हो गई है।

गौरतलब है कि पिछले दिनों जांच में पाया गया था कि के काले हिरनों की मौत जहरीला चारा खाने से हुई थी। आईवीआरआई बरेली से आई सैंपल रिपोर्ट के मुताबिक हिरनों को दिए गए चारे में एचसीएन (हाइड्रो साइनिक एसिड) पौधों में पनपने एक प्रकार का विष पाए जाने की आशंका जताई जा रही है।

जानकारी के मुताबिक अक्सर कम बारिश में पैदा हुई मक्का प्रजाति के पौधों में यह विष पाया जाता है। रिपोर्ट के बाद से जू प्रशासन में हड़कंप मचा हुआ है। उधर शनिवार शाम भी एक और मादा काले हिरन ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
विज्ञापन


इसके साथ ही पिछले 8 दिनों में जू में मरने वाले काले हिरनों की मौत का आंकड़ा 17 तक  पहुंच गया है। लखनऊ जू में संक्रमण के चलते लगातार मर रहे काले हिरनों की मौत थमने का नाम नहीं ले रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


शनिवार को मरी मादा हिरन 8 सितंबर से ही बीमार दिख रही थी। रात हो जाने पर उसका पोस्टमार्टम नहीं किया जा सका। अब उसका पोस्टमार्टम रविवार को किया जाएगा।

इलाज में लगे विशेषज्ञों और चिकित्सकों ने काले हिरन के बाड़े के अलावा अन्य नजदीकी सांभर बाड़े, हाग डियर के बाड़ों को भी हरे रंग के पर्दों से ढकने के अलावा सेनीटाइज करवाने का काम जारी रखा।

विशेषज्ञों ने शनिवार सुबह से ढुलमुल दिख रहे करीब 7 काले हिरनों को डार्ट से दवाएं दीं। शाम तक हिरनों के सभी बाड़े सेनीटाइज करने के साथ ही दो इंच तक मिट्टी हटवाई गई।

चिकित्सकों के मुताबिक विशेषज्ञों की सलाह पर कुछ दवाओं में फेरबदल किया गया है। जू की निदेशक रेणु सिंह ने बताया कि बरेली से आई प्राथमिक जांच रिपोर्ट में हरे चारे में एचसीएन की संभावना जताई गई है।

उन्होंने बताया कि टीम की सलाह पर हिरनों को एंटीबायोटिक और अन्य सहायक दवाएं बढ़ाई गई हैं।

एक हफ्ते तक नहीं चलेगी बालरेल
हिरनों की सेहत में सुधार को देखते हुए विशेषज्ञ अगले सात-आठ दिन तक ऐसे ही हिरनों के बाड़े को हरे पर्दे से ढक कर इलाज करेंगे। इसी के साथ 150 मीटर के इलाके में रोड के दोनों ओर बैरीकेडिंग रहेगी।

इसके चलते करीब एक हफ्ते तक जू में न तो बाल रेल चलेगी और न ही दर्शक चिंपैंजी समेत करीब आधा दर्जन बाड़ों के जानवर देख सकेेंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक लचर और ढुलमुल से दिखने वाले वन्यजीवों की संख्या कम हो रही है। हिरनों में सुधार की प्रवृत्ति भी दिख रही है।


हिरनों के लिए लगे पंखे

उमस भरे माहौल में काले हिरनों को तनाव से बचाने के लिए हिरनों के बाड़े में पंखे लगाए गए हैं। इलाज कर रहे विशेषज्ञों के मुताबिक दिन में तो कोई दिक्कत नहीं रहती लेकिन रात को आसमान पर बादल छाने पर चिपचिपा और उमस भरा माहौल हो जाता है। तब हिरनों को सांस लेने में दिक्कत होती है। इस पर पंखे चलाए जाते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed