बदायूं कांड में नया मोड़, 'मासूम' निकले आरोपी!
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28 मई को बदायूं की दो बहनों के साथ हुए गैंगरेप और मर्डर केस में यूपी पुलिस की नाकामी के बाद सीबीआई को भी कोई अहम कामयाबी नहीं मिल रही है।
काफी जद्दोजहद से आरोपियों को पकड़ने के बाद न तो सीबीआई दोबारा शव निकालकर पोस्टमार्टम करवा पाई, न ही डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट अब तक सामने आ पाई है।
इस दौरान, केस को एक और बड़ा झटका लग गया है। पांचों आरोपियों के लाई डिटेक्टर टेस्ट के नतीजों ने सीबीआई को चौंका दिया है।
आरोपियों ने बोला था सच
लाई डिटेक्टर टेस्ट के दौरान सीबाआई ने आरोपियों से गुनाह पर सवाल किए, तो सबने खुद को मासूम और बेकुसूर बताया था।
बुधवार को आई टेस्ट की रिपोर्ट ने आरोपियों की मासूमियत और बेगुनाही पर मुहर लगा दी है। ऐसे में बिना शव, डीएनए टेस्ट और नारको टेस्ट के केस बेहद पेचीदा हो गया है।
नहीं आई है डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट
बता दें कि हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर डीएनए फिंगरप्रिंट और डाइग्नोस्टिक लैब से जुलाई के आखिरी सप्ताह तक डीएनए टेस्ट की रिपोर्ट आनी थी। फोरेंसिक एक्सपर्ट के तीन सदस्यीय पैनल की सिफारिश पर यह फैसला लिया गया था।
सीबीआई ने स्थानीय डॉक्टरों के जरिए पीड़िताओं के शरीर के अंगों से लिए सैंपल को भी अपने कब्जे में ले लिया है। सीबीआई और मेडिकल बोर्ड की टीम ने रेप पीड़िताओं के परिवार से मुलाकात भी की।
नहीं मिल पाया था शव
सीबीआई को फिर से केस की पुख्ता जांच के लिए दोनों बहनों की लाशें नहीं मिल सकी थी क्योंकि गंगा में जलस्तर बढ़ जाने के चलते दोनों की लाशें निकालना मुश्किल हो गया था।
गौरतलब है कि 28 मई को 14 और 15 साल की दो बहनों का शव गांव के पेड़ से लटका मिला था।
इसके बाद पूरे देश में काफी आक्रोश देखने को मिला था। यूपी पुलिस ने इस मामले में पांच संदिग्धों को गिरफ्तार किया था, लेकिन बाद में दबाव के कारण केस सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया गया।
पहले भी हुआ था लाई डिटेक्टर टेस्ट
सीबीआई ने मामले की जांच में लड़कियों के पिता, उनके एक रिश्तेदार और एक गवाह का नारको टेस्ट भी किया है।
इससे पहले इनका लाई डिटेक्टर टेस्ट और पोलीग्राफ करवाया जा चुका था, लेकिन सीबीआई को मामले की जटिलता साफ करने में कोई खास मदद नहीं मिली थी।