राज्यपाल पद संभालते ही सबसे पहले बालगृह पहुंची आनंदी बेन, व्यवस्था सुधारने के दिए निर्देश
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यूपी के राज्यपाल का पदभार संभालने के पहले ही दिन आनंदीबेन पटेल ने सोमवार शाम राजकीय बालगृह शिशु का दौरा किया। दत्तक गृह व शिशु गृह का निरीक्षण करते हुए उन्होंने बच्चों के खान-पान, शिक्षा व चिकित्सा सुविधाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने बच्चों को दुलारते हुए फल व चॉकलेट भी बांटी।
राज्यपाल ने सबसे पहले गार्ड रूम व परामर्श केंद्र का निरीक्षण किया। इसके बाद शिक्षक कक्ष पहुंचीं। यहां बच्चों ने अपने हाथ से बनाए कार्ड, पुष्प देकर गीत के साथ उनका स्वागत किया। बच्चों ने उन्हें ‘बच्चे मन के सच्चे’ और ‘एक कौआ प्यासा था’ गीत सुनाया। इस दौरान बच्चों के एक सुर व साथ-साथ न गा पाने पर राज्यपाल ने शिक्षकों से नाराजगी जताई।
इस पर शिक्षकों ने कहा कि बच्चों का स्थानांतरण व घर वापसी से यह समस्या हो जाती है। मासूमों से बातचीत के दौरान कुछ के शरीर पर दाने देख कर उन्होंने अधीक्षिका मंजू वर्मा से सवाल भी किए।
दत्तक गृह में 27 नवजात मिले। वहीं, अन्य कक्षों में 59 बच्चे रह रहे थे। इसके बाद राज्यपाल ने संस्था में बने किचन व डाइनिंग हॉल का निरीक्षण कर मेन्यू चार्ट भी देखा।
संस्था की अधीक्षिका से बच्चों को दिए जा रहे पोषक आहार के बारे में जानकारी लेते हुए स्पेशल बच्चों को विशेष पोषक आहार देने के निर्देश दिए। राज्यपाल ने शिशुओं के संस्था में प्रवेश व गोद लेने की प्रक्रिया के बारे में अधीक्षिका व सोशल वर्कर से पूछताछ की।
सामग्री के रूप में लिया जाता है दान
अधीक्षिका मंजू वर्मा ने राज्यपाल को बताया कि संस्था में नकद नहीं बल्कि सामग्री के रूप में दान लिया जाता है। राज्यपाल ने संस्था में विशेषज्ञ मनोरोग चिकित्सक व त्वचा रोग विशेषज्ञ का दौरा करवाने व स्पेशल देखरेख वाले बच्चों के लिए मानसिक व शारीरिक गतिविधियां बढ़ाने के लिए उपकरणों की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर डीएम कौशल राज शर्मा, जिला प्रोबेशन अधिकारी सुधाकर शरण पांडेय, बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष कुलदीप रंजन व सदस्य सुधा रानी के अलावा संस्था के कर्मचारी उपस्थित रहे।
छात्राओं को बचाने के लिए उफनती नर्मदा में कूद पड़ी थीं आनंदीबेन
यूपी का राज्यपाल बनने के पहले ही दिन वे निराश्रित बच्चों से मिलने पहुंच गईं। वैसे, बच्चों से उनका गहरा लगाव रहा है। बात वर्ष 1987 की है जब वे अहमदाबाद के मोहिनीबा कन्या विद्यालय में प्रधानाचार्य थीं। स्कूल पिकनिक के दौरान दो छात्राएं नर्मदा नदी में गिर गईं। उन्हें डूबता देख आनंदीबेन भी उफनती नदी में कूद पड़ीं और दोनों को सुरक्षित बाहर निकाल लाईं। इसके लिए उन्हें गुजरात सरकार ने वीरता पुरस्कार से नवाजा।
यह खबर अखबारों में छपी तो नरेंद्र मोदी (अब प्रधानमंत्री) ने उन्हें भाजपा से जुड़ने और महिलाओं को पार्टी के साथ जोड़ने के लिए मनाया। आनंदीबेन कई मौकों पर इसका जिक्र कर चुकी हैं।