फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   analysis of preferential voting in rajya sabha election

कम आंके जाने और कम वोट पाने वाले के सिर भी बंध सकता है जीत का सेहरा

Thu, 02 Jun 2016 03:13 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 02 Jun 2016 03:13 PM IST
विज्ञापन
analysis of preferential voting in rajya sabha election
आश्वस्त लोगों को म‌िल सकती है मायूसी - फोटो : amar ujala

राज्यसभा व विधान परिषद में उम्मीदवारों के लिए वोटों का कोटा निर्धारित है कि कम से कम इतने मत मिलने वाला ही चुनाव जीतेगा। इसके बावजूद सभी उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला प्रथम वरीयता के मतों से हो पाना मुश्किल ही होता है।

विज्ञापन

 
इसकी वजह से उम्मीदवारों के दूसरी व तीसरी वरीयता के मत गिनकर अन्य उम्मीदवारों के खाते में जोड़ दिए जाते हैं। इसके चलते जीत का सेहरा ऐसे शख्स के सिर भी बंध सकता है, जिसे अभी कम आंका जा रहा है। 
विज्ञापन


दूसरी ओर उन्हें मायूसी मिल सकती है, जो जीत को लेकर खासे आश्वस्त हैं। प्रिफरेंसियल (वरीयता क्रम के अनुसार) मतदान और मतगणना के फार्मूले के कारण किसी पार्टी के विधायकों की संख्या और प्रत्याशियों की संख्या में गुणा-भाग करके जीत व हार के अनुमान लगाना गलत साबित हो सकता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


वरीयता क्रम के फार्मूलेे के चलते प्रथम वरीयता के मतों में भले ही कोई उम्मीदवार सबसे पीछे हो, लेकिन उसे द्वितीय या अन्य वरीयता के ज्यादा वोट मिल जाएं, तो वह प्रतिद्वंद्वियों से आगे निकल सकता है।

राज्यसभा के लिए एक उम्मीदवार को न्यूनतम 34 और विधान परिषद के उम्मीदवार को न्यूनतम 29 वोटों की जरूरत है। राज्यसभा की 11 सीटों के लिए 12 उम्मीदवार मैदान में हैं। 

विधान परिषद की 13 सीटों के लिए 14 उम्मीदवार लड़ रहे हैं। इस लिहाज से राज्यसभा के 12 उम्मीदवारों को प्रति उम्मीदवार 34 वोट के हिसाब से 408 वोट चाहिए, जबकि विधान परिषद में 14 प्रत्याशियों को 406 वोट चाहिए।

विधायकों की संख्या 403 ही है। जाहिर है कुछ को कोटे से कम वोट मिलने ही हैं। ऐसे में अगर किसी उम्मीदवार के एक-दो वोट भी निरस्त हो गए, तो उसके लिए और मुश्किल हो जाएगी।

इस तरह हो सकता है उलटफेर

analysis of preferential voting in rajya sabha election
राज्यसभा - फोटो : amar ujala

राज्यसभा के 12 उम्मीदवारों में पहले प्रथम वरीयता के मतों की गिनती होगी। जो 34 वोटों का कोटा पूरा कर लेंगे वे विजयी घोषित हो जाएंगे। फिर क्रमश: द्वितीय, तृतीय व चतुर्थ वरीयता के मतों की गिनती होगी। इस आधार पर उम्मीदवार विजयी घोषित होते रहेंगे। 

दस उम्मीदवारों की जीत के बाद जो दो उम्मीदवार बचेंगे उनमें जिसके हिस्से में ज्यादा मत आएंगे उन्हें विजयी घोषित कर दिया जाएगा। 

ऐसी स्थिति में अगर किसी को सबसे नीचे 11वीं वरीयता के भी 10वीं वरीयता वाले से ज्यादा मत मिल गए और उसने ऊपर वाले को पछाड़ दिया, तो 10वीं वाला लड़ाई से बाहर हो सकता है और 11वीं वाला जीत जाएगा। भले ही उसका 34 वोट का कोटा न पूरा हुआ हो। 

इस चुनाव में पहली बार नोटा का विकल्प भी विधायकों को मिलेगा। कोई विधायक अगर किसी को वोट नहीं देना चाहता है तो वह नोटा पर मुहर लगा सकेगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed