यूपी चुनाव में क्या है 300 सीटों का फेर, यहां छह-छह महीने की शर्त पर बने हैं CM
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यूपी में प्रमुख सियासी दल भले ही 250 या 300 से ज्यादा सीटें जीतने का दावा कर रहे हों, पर सूबे के विधानसभा के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो यह बहुत आसान नहीं है। अतीत पर नजर डालें तो 300 से ज्यादा सीटें जीतने का रिकॉर्ड कांग्रेस और जनता पार्टी के नाम है। कांग्रेस ने दो बार तो जनता पार्टी ने एक बार यह करिश्मा करके दिखाया।
देश को आजादी मिलने के बाद पहले आम चुनाव में कांग्रेस ने 388 सीटें जीतकर रिकॉर्ड बनाया। यह रिकॉर्ड आज तक कोई पार्टी तोड़ नहीं पाई। आपातकाल के बाद 1977 में हुए चुनाव में जनता पार्टी ने 352 सीटें जीतकर सरकार बनाई। कांग्रेस को सिर्फ 47 सीटें मिलीं।
जनता पार्टी की सरकार गिरने के बाद 1980 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने फिर वापसी की और 308 सीटें जीतकर सरकार बनाई। बात 250 से 300 सीटों के बीच की करें तो यह सिर्फ दो बार हुआ है।
इसके अलावा किसी पार्टी को यह इतिहास दोहराने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ। फिर आज न आपातकाल के बाद जैसा माहौल है और न आजादी के बाद की स्थिति और न ही जनता पार्टी द्वारा सरकार न चला पाने के बाद आम आदमी में उपजा गुस्सा। जाहिर है कि गठबंधन के लिए इस आंकड़े को छूना बहुत आसान नहीं।
राम लहर में मिली हैं भाजपा को सर्वाधिक सीटें
राजनीतिक दलों के अब तक के प्रदर्शन पर नजर डालें तो भाजपा को सर्वाधिक 221 सीटें राम लहर में 1991 में मिली हैं। उसके बाद वह कभी इतनी सीटें हासिल नहीं कर पाई। सपा का अधिकतम सीटों का आंकड़ा पिछले चुनाव में 224 का है। बसपा की बात करें तो उसने भी अब तक सर्वाधिक सीटें 2007 में 206 जीती हैं।
250 पार सिर्फ दो बार
तीन सौ से कम और 250 या इससे ज्यादा सीटें जीतने की बात करें तो ऐसा सिर्फ दो बार हुआ है। दोनों रिकॉर्ड कांग्रेस के नाम है।
कांग्रेस ने 1957 में 286 सीटें जीतीं तो दूसरी बार इंदिरा गांधी की हत्या के बाद 1985 में हुए चुनाव में 269 सीटें जीतकर अपनी सीटों का आंकड़ा 250 के पार पहुंचाया।
वर्ष 1962 में कांग्रेस ने सबसे ज्यादा 249 सीटों पर जीत तो हासिल की, पर 250 के आंकड़े को छू पाने से चूक गई। इसके बाद अब तक कोई पार्टी इस आंकड़े के करीब नहीं पहुंची।
40 फीसदी से ज्यादा मतों का रिकॉर्ड भी नहीं टूटा
मत प्रतिशत की बात करें तो विधानसभा चुनाव में तीन मौकों को छोड़कर सरकार बनाने वालों को 40 प्रतिशत भी मत नहीं मिले। सर्वाधिक मत प्रतिशत हासिल करने का रिकॉर्ड जनता पार्टी के नाम है। इस पार्टी को 1977 में 48.04 प्रतिशत मत मिले।
कांग्रेस को 1951 में 48 और 1957 में 42.42 प्रतिशत वोट मिले। इसके अलावा सभी पार्टियां अभी तक 40 प्रतिशत से कम ही वोट हासिल कर सरकार बनाती रही हैं।
सीटें तो ज्यादा पर मुख्यमंत्री नहीं
वैसे तो माना जाता है कि ज्यादा सीटें जीतने वालों को ही सरकार बनाने का मौका मिलता है। पर, विधानसभा के इतिहास में कुछ ऐसे मौके भी आए हैं कि सीटें ज्यादा होने के बावजूद उस दल की सरकार नहीं बन पाई।
वर्ष 1993 में भाजपा ने सबसे ज्यादा 177 सीटें जीती थीं, परंतु सरकार सपा और बसपा गठबंधन ने बनाई। मुलायम सिंह मुख्यमंत्री बने। पर, स्टेट गेस्ट हाउस कांड के बाद यह गठबंधन टूट गया। भाजपा ने बसपा को समर्थन देकर सरकार बनवाई। पर यह दोस्ती भी ज्यादा नहीं चली। इसके बाद 1996 में हुए चुनाव में भाजपा ने सबसे अधिक 174 सीटें जीतीं। पर, उसे सरकार बनाने का राज्यपाल ने न्यौता नहीं दिया।
छह-छह महीने की शर्त पर बने मुख्यमंत्री
इसको लेकर तत्कालीन राज्यपाल रोमेश भंडारी के खिलाफ भाजपा ने धरना-प्रदर्शन भी किया। पर, उन्होंने भाजपा को आमंत्रित नहीं किया। छह महीने किसी पार्टी की सरकार नहीं बनी। बाद में भाजपा व बसपा ने छह-छह महीने के मुख्यमंत्री की शर्त पर गठबंधन करके सरकार बनाई।
हालांकि बसपा की सीटें 67 ही थीं। पर, पहले मुख्यमंत्री मायावती ही बनीं। छह महीने बाद मायावती के मुख्यमंत्री पद न छोड़ने की जिद पर गठबंधन टूट गया। फिर बसपा व कांग्रेस से अलग हुए कुछ विधायकों के समर्थन से भाजपा ने सरकार बनाई।
इसी तरह 2002 में अकेली पार्टी के रूप में सबसे ज्यादा 143 सीटें सपा के हिस्से में आईं। पर, उसे भी सरकार बनाने का मौका नहीं मिला। भाजपा और बसपा ने गठबंधन करके सरकार बना ली।
हालांकि इस बार भी दोनों की दोस्ती ज्यादा नहीं निभी और अलगाव हो गया। इसके बाद मुलायम सिंह यादव ने बसपा, भाजपा व कांग्रेस के विधायकों को तोड़कर उनके समर्थन से सरकार बनाई।
यहां देखें, कैसा रहा पार्टियों का प्रदर्शन
वर्ष--सबसे ज्यादा सीटें--मत प्रतिशत
1951--कांग्रेस--388--48
1957--कांग्रेस--286--42.42
1962--कांग्रेस--249--36.45
1967--कांग्रेस--199--32.20
1969--कांग्रेस--211--33.78
1974--कांग्रेस--215--34.04
1977--जनता पार्टी--352--48.04
1980--कांग्रेस--309--37.76
1985--कांग्रेस--269--39.25
1989--जनता दल--208--35.27
1991--भाजपा--221--31.76
1993--भाजपा--177--33.30
1996--भाजपा--174--33.31
2002--सपा--143--26.27
2007--बसपा--206--30.43
2012--सपा--224--29.29