यूपी को मिला ऑफर, 'सूबे को ब्रांड बनाइए, हम करेंगे मदद'
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
दुनिया के तमाम देश यह जानते हैं कि ताजमहल भारत में है, लेकिन यह नहीं जानते कि ताज आगरा में है और आगरा यूपी में है। ऐसे हालात में पहला काम दुनिया में यूपी को ब्रांड के तौर पर पेश करना होगा। फिर निवेश और कारोबार में यूपी के लिए अवसर बढ़ने में देर नहीं लगेगी।
सूबे के लिए यह संदेश निकलकर आया दुनिया के नौ देशों में कार्यरत भारतीय राजदूतों के साथ संवाद में। केंद्र सरकार की पहल पर पहली बार ये राजदूत व हाई कमिश्नर राज्यों के निवेश व कारोबार के अवसरों को जानने और विदेशों में उपलब्ध अवसरों को राज्यों के साथ साझा करने निकले हैं।
तीन दिनी यात्रा पर बुधवार को उज्बेकिस्तान, बुल्गारिया, पोलैंड, ईरान, ओमान, ब्रुनोई, जार्डन, अंगोला व ताइपे के राजदूत व उच्चायुक्त राजधानी पहुंचे। इस दल ने गोमतीनगर के एक होटल में प्रदेश के औद्योगिक संगठनों व राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया।
प्रमुख सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास संजय अग्रवाल की अध्यक्षता में आयोजित इस संवाद में पीएचडी चैंबर, सीआईआई, आईआईए के प्रतिनिधियों ने विचार रखे।
यह भी बताया कि यूपी में किस तरह आ सकता है निवेश
राजदूतों ने सूबे के निवेशकों को न सिर्फ विदेशों में अवसर के बारे में बताया, बल्कि यह भी समझाया कि यूपी में बाहर से निवेश किस तरह से आ सकता है। उन्होंने निर्यात प्रोत्साहन व विदेशी पूंजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
ब्रुनोई में कारोबार के बड़े अवसर
ब्रुनोई में भारत की उच्चायुक्त नगमा एम मलिक ने कहा कि ब्रुनोई में हैंडीक्राफ्ट, टेक्सटाइल्स, फार्मा, लेदर व ज्वेलरी सेक्टर में बड़े पैमाने पर कारोबार के अवसर हैं, मगर वहां के लोग चेन्नई, हैदराबाद और ताजमहल को तो जानते हैं लेकिन यूपी को नहीं जानते। इसलिए यूपी की ब्रांडिंग की जरूरत है। उन्होंने वहां लगने वाले ट्रेड फेयर में यूपी की भागीदारी का सुझाव दिया।
जार्डन में कृषि क्षेत्र में बड़े अवसर
जार्डन में राजदूत शुभदर्शिनी त्रिपाठी ने बताया कि भारत में उर्वरक की 65 फीसदी जरूरत जार्डन पूरी करता है। वह भारत का तीसरा सबसे बड़ा कारोबारी पार्टनर है। कृषि क्षेत्र में उससे साझेदारी की बड़ी संभावना है।
यूपी को बड़े इंटरनेशनल एयरपोर्ट की जरूरत
इंडिया-ताइपे एसोसिएशन के महानिदेशक मनीष चौहान ने कहा कि यूपी ने ब्रांडिंग की जो पहल की है, वह रुकनी नहीं चाहिए। यूपी में निवेश के लिए बड़े इंटरनेशनल एयरपोर्ट की आवश्यकता है, जहां से विदेशों से सीधे कनेक्टिविटी हो। उन्होंने ताइवानी कंपनियों द्वारा यूपी में इलेक्ट्रॉनिक मैन्यूफैक्चरिंग जोन में निवेश के संबंध में अपनी भूमिका निभाने की बात की।
चाबहार समझौते से ट्रेड में बढ़ेंगे अवसर
ईरान में भारत के राजदूत सौरभ कुमार ने कहा कि ईरान से इस समय निवेश लाना संभव नहीं है। वह खुद निवेश आकर्षित कर रहा है, पर वहां से ट्रेड व पर्यटन में बड़ी संभावनाएं हैं। प्रधानमंत्री की हाल ही ईरान यात्रा के दौरान चाबहार समझौते से ट्रेड में बड़ी संभावनाएं बढ़ी हैं। यूपी को इसका फायदा उठाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि नवरोज के दौरान बड़ी संख्या में ईरान से लोग भारत आते हैं लेकिन यूपी आने वाले बहुत कम होते हैं। यूपी केटूरिज्म के बारे में जानकारी देकर पर्यटकों को आकर्षित किया जा सकता है।
मेडिकल टूरिज्म के लिए पहल करें
ओमान में भारतीय राजदूत इंद्रमणि पांडेय ने कहा कि मस्कट से तमाम लोग इलाज के लिए कोचीन, त्रिवेंद्रम, बंगलूरू आते हैं लेकिन लखनऊ नहीं आते। उन्होंने मेडिकल टूरिज्म के नजरिये से इसे देखने और लखनऊ में बेहतर सुविधाओं वाले हॉस्पिटल को इस ओर आगे आने की सलाह दी।
बुल्गारिया में हिंदी शिक्षक चाहिए
बुल्गारिया में भारत के राजदूत राजेश कुमार सचदेवा ने कहा कि बुल्गारिया में हिंदी भाषा के शिक्षकों की बड़ी आवश्यकता है। साथ ही वहां स्प्रीचुअल टूरिज्म तेजी से बढ़ रहा है। कल्चरल एक्सचेंज प्रोग्राम के जरिये इन अवसरों का लाभ उठाया जा सकता है।
पोलैंड में आईटी प्रोफेशनल्स के लिए मौका
पोलैंड में भारत के राजदूत अजय बिसारिया ने कहा कि वहां सिलिकॉन वैली की तरह सूचना प्रौद्योगिकी से संबंधित क्षेत्र का विकास किया जा रहा है। इसमें यूपी से आईटी की शिक्षा प्राप्त युवाओं को रोजगार मिल सकता है।
अंगोला में निवेश के अच्छे अवसर
अंगोला में भारत के राजदूत सुशील कुमार सिंघल ने कहा कि वहां जमीन बहुत है लेकिन पैसे व तकनीक की कमी है। सूबे के निवेशक वहां निवेश कर अच्छा लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
इस पर प्रमुख सचिव अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास संजय अग्रवाल का कहना है कि पहली बार एक साथ नौ देशों के राजदूत प्रदेश में आए हैं। इस दल का मुख्य मकसद केंद्र व राज्य सरकार के निवेश के प्रयासों की जानकारी लेने के साथ ही विदेशी पूंजी निवेश व निर्यात के प्रोत्साहन के लिए वातावरण तैयार करना है। राज्य सरकार इसका पूरा लाभ उठाएगी।