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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Amar Ujala Short Film Competition : Young filmmakers gave a big message from short films, selected producers directors chose special topics of common man

अमर उजाला लघु फिल्म प्रतियोगिता : छोटी फिल्मों से युवा फिल्म निर्माताओं ने दिया बड़ा संदेश, चयनित निर्माता-निर्देशकों ने चुने आम आदमी के खास विषय

Sun, 03 Apr 2022 05:00 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ।
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ। Published by: योगेश साहू Updated Sun, 03 Apr 2022 05:00 AM IST
सार

प्रयागराज से दिल्ली होते हुए मुंबई की राह पकड़ी। पहले एक विज्ञापन एजेंसी के आइडिएशन विभाग में विज्ञापन लिखे। फिर एक प्रतिष्ठित कंटेंट स्टूडियो में सह निर्माता बने। अब स्वतंत्र विषयवस्तु रचनाकार हैं। शाम्भव की लेखन, संभाषण और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में गहन रुचि है। उनकी बनाई फिल्म किताबी कीड़ा का सार है ‘एक मशहूर लाइब्रेरी के अमर शब्दों का रस अब एक कीड़ा पीता है।

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Amar Ujala Short Film Competition : Young filmmakers gave a big message from short films, selected producers directors chose special topics of common man
अमर उजाला 'हिंदी हैं हम' प्रतियोगिता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एक अनूठा अभियान ‘हिंदी हैं हम’ के तहत आयोजित लघु फिल्म प्रतियोगिता में विजयी प्रतिभागियों का अलंकरण समारोह रविवार को आयोजित किया जा रहा है। यह समारोह डालीबाग स्थित गन्ना संस्थान के सभागार में शाम पांच बजे से शुरू होगा। इस अभियान के तहत आयोजित प्रतियोगिता में एक हजार से अधिक प्रविष्टियां प्राप्त हुईं। प्रविष्टियों को तीन स्तर पर परखने के बाद उच्चस्तरीय आंतरिक जूरी ने अंतिम सिफारिशें कीं। इसके बाद बाह्य जूरी ने उसपर अपना निर्णय दिया।

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बाह्य जूरी का प्रतिनिधित्व डिस्कवरी की प्रबंध निदेशक मेघा टाटा ने किया। हिंदी हैं हम, प्रतियोगिता की विषय वस्तु थी, जिस पर दो मिनट की फिल्म बनाकर भेजनी थी। जिन फिल्मों का चयन किया गया है, उनकी एक खास बात ये रही कि ये सभी आम आदमी के बीच के खास विषय हैं। आइए जानते हैं सम्मानित होने वाले फिल्म निर्माताओं और उनकी फिल्मों के बारे में।
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गौरव मिश्रा और हिंदी माथे की बिंदी
फिल्म मेकर गौरव मिश्रा रेगमाल फिल्म्स के बैनर तले देशभर में एड फिल्म और डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के माध्यम से कहानियां सुनाते हैं। गौरव ने व्हिस्लिंग वुड्स मुंबई से फिल्म निर्देशन की पढ़ाई की है। साथ ही लखनऊ से दाना-पानी के नाम से देश के कई राज्यों में सोशल कैंपेन भी चलाते हैं। ‘हिंदी माथे की बिंदी’ नामक फिल्म बनाकर पांच लाख रुपये का सर्वोच्च पुरस्कार जीता। फिल्म में दिखाया है कि विद्यालय का आखिरी आदमी, जो सिर्फ कक्षाओं को बंद करने, उनकी सार-संभाल और देखभाल करने के लिए है, जब अपने काम को अंजाम देता हुआ अचानक ब्लैक बोर्ड देखता है तो उसके हाथ में आया चॉक उसे सबसे बड़ा शिक्षक बना देता है।
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विशेष सम्मान के लिए चयनित फिल्म मेकर और उनकी फिल्में
शाम्भव पांडे और किताबी कीड़ा

प्रयागराज से दिल्ली होते हुए मुंबई की राह पकड़ी। पहले एक विज्ञापन एजेंसी के आइडिएशन विभाग में विज्ञापन लिखे। फिर एक प्रतिष्ठित कंटेंट स्टूडियो में सह निर्माता बने। अब स्वतंत्र विषयवस्तु रचनाकार हैं। शाम्भव की लेखन, संभाषण और हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत में गहन रुचि है। उनकी बनाई फिल्म किताबी कीड़ा का सार है ‘एक मशहूर लाइब्रेरी के अमर शब्दों का रस अब एक कीड़ा पीता है। धुरंधर पढ़ाकुओं की राह देखती अद्भुत दुनिया में अब वही रहता है।’

शिवेंद्र प्रताप सिंह और धन्यवाद
फिल्मकार, लेखक, पूर्व सिविल सेवक और फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान पुणे से प्रशिक्षित हैं शिवेंद्र प्रताप सिंह। नवोदित फिल्म निर्देशक के रूप में शिवेंद्र की पहली फिल्म द पॉपकॉर्न को 42 से ज्यादा देशों में देखा और सराहा गया। इसे कई पुरस्कारों से नवाजा गया है। लखनऊ और मुंबई के बीच में कुछ उल्लेखनीय प्रोजेक्ट पर काम किया है। पुरस्कार के लिए चुनी गई फिल्म ‘धन्यवाद’ का संदेश है कि जिंदगी को सिर्फ शब्द नहीं चाहिए होते हैं, जिंदगी को चाहिए ऐसी भाषा जो दिल को छू ले।

अक्षांश योगेश्वर और गाय से ज्ञान तक
प्रयागराज से मुंबई पहुंचे और फिल्म सिनेमेटोग्राफर के रूप में अक्षांश योगेश्वर ने खास पहचान बनाई। कई कलात्मक लघु फिल्मों के साथ-साथ कुछ फीचर फिल्मों का फिल्मांकन किया। कई कला संस्थानों से पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हैं। कई महत्वपूर्ण धारावाहिकों तथा वेब सीरीज का फिल्मांकन और संपादन किया है। प्रतियोगिता में पुरस्कार के लिए चुनी गई फिल्म ‘गाय से ज्ञान तक’ बताती है कि आगे बढ़ने की होड़ में कई बार हम अपनी संस्कृति की भाषा से दूर हो जाते हैं और हमारी स्थिति हास्यास्पद हो जाती है।

नवीन अग्रवाल और सुकून
उत्तरांचल में जन्मे, राजस्थान में शिक्षित एवं अमेरिका में सॉफ्टवेयर के पेशे में कार्यरत नवीन अग्रवाल बचपन से ही हिंदी कविता, कहानी, लेखन-पठन में रुचि लेते रहे हैं। बदलते समय के साथ फिल्म एवं डिजिटल कथा चित्रों को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बना रहे हैं। पुरस्कार के लिए चुनी गई फिल्म सुकून में उनका विषय है कि एक प्रवासी जब दूसरे देश से आता है तो उसका सुकून कहां से आता है।

यशवर्धन और मदर टंग
जयपुर और मुंबई स्थित लेखक और फिल्म मेकर हैं यशवर्धन। कॉलेज के दिनों से लेकर अब तक कुल 30 से ज्यादा लघु फिल्में बनाईं, जो मुंबई, यूके और कतर एशियन फेस्टिवल आदि में भी विजेता रह चुकी हैं। आजकल डिज्नी प्लस व हॉट स्टार के लिए बतौर क्रिएटिव डायरेक्टर व लेखक काम कर रहे हैं। यशवर्धन की बनाई पुरस्कृत फिल्म मदर टंग बताती है कि मां की तरह साथ देती है भाषा। मातृभाषा दुनिया की सबसे अनमोल भाषा होती है और सबसे ताकतवर भी।

उल्लेखनीय लघु फिल्मों को विशेष प्रमाण पत्र केलिए चुना गया 
इस कैटेगरी में ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह की जा नहीं पाएंगे आप, नमन राठी की अनुवादक -एक कहानी, सूर्य कर्ण गुप्ता की अंग्रेजी जलेबी, सौरभ कुमार की अखबार, रवि कुमार आर्या की द लास्ट अटेम्प्ट।


इन्हें भी सराहा गया
एसआर शाह की क्या आप हिंदुस्तानी हैं, प्रतीक त्रिपाठी की परवरिश, योगेश अरोरा की घर-घाट, प्रखर विश्वानी की हिंदी हैं, अरविंद कुमार की आह्वान, शांतनु सिंधु की कविता पाठ।

यह भी पढ़ें : अमर उजाला : लघु फिल्मों का प्रीमियर और सम्मान समारोह आज, फिल्म निर्देशक डॉ. चंद्रप्रकाश द्विवेदी देंगे व्याख्यान

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