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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Amar Ujala Samvad MP Sudhanshu Trivedi gave answer on question of journey from Ram Mandir to Rashtra Mandir

Amar Ujala Samvad: सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राम मंदिर से राष्ट्र मंदिर के सफर के सवाल पर दिया ये जवाब

Mon, 26 Feb 2024 03:54 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Mon, 26 Feb 2024 03:54 PM IST
सार

राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राम मंदिर कोई इमारत नहीं है। यह हमारी सांस्कृति यात्रा है। यह यात्रा एक वैज्ञानिक है। राम मंदिर से जुड़ी जितनी भी घटनाएं हैं उनकी तारीखों का एक वैज्ञानिक महत्व है।

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Amar Ujala Samvad MP Sudhanshu Trivedi gave answer on question of journey from Ram Mandir to Rashtra Mandir
MP Sudhanshu Trivedi - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि देखिए उस दिन की इस्तुती के लिए जो हम इस दिन यहां एकत्र हुए है और उसके लिए मैं सबसे पहले एक पंक्ति कहना चाहूंगा। आपने आचार्य मिथलेश नंदिनी जी को बुलाया जो धर्म के ज्ञान के प्रतीक हैं। मैं राजनीति के क्षेत्र से आता हूं जो कर्म की प्रतीक है, योगीराज जी उपासना का प्रतीक हैं। यदि ज्ञान, कर्म और उपासना तीनों राम की स्तुति के लिए उपस्थित हों तो भारतीय संस्कृति का अमर उजाला प्रस्तुत होने का समय आ गया है।
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इस दौरान उन्होंने कहा कि कष्ट हो जाए तो हे राम, अचूक है तो राम बाण, भरोसा है तो राम भरोसे। राजनीति में हैं तो आया राम, गया राम। दो भाई दिख जाएं तो राम-लक्ष्मण की जोड़ी। नव दंपती दिखें तो कहते हैं कि राम-सीता की जोड़ी। प्रसिद्ध गीत की पंक्ति याद आती है
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जन जन के मन में राम रमे, और प्राण-प्राण में सीता है।
हर हृदय की धड़कन रामायण, पग-पग पर बनी पुनीता है।
यदि राम नहीं हैं सांसों में, तो प्राणों का घट रीता है। 
तो नर नाहर श्री पुरुषोत्तम का हम मंदिर भव्य बनाएंगे। 
सौगंध राम की खाते हैं हम मंदिर वहीं बनाएंगे।

उन्होंने कहा कि 22 जनवरी को सौगंध पूर्ण हुई। अद्भुत आनंद था। जिस दिन पहली कार सेवा हुई और जब 9 नवंबर 2019 को फैसला आया तब देवउत्थानी एकादशी थी। भगवान राम का जब राज्याभिषेक हुआ था, तब सुग्रीव, निषाद राज का पहले राज्याभिषेक हुआ, माता शबरी का सम्मान हुआ। राम को समझने के लिए यही दृष्टि चाहिए। सोइ जानइ जेहि देहु जनाई। जानत तुम्हहि तुम्हइ होइ जाई॥ 22 जनवरी का मुहूर्त 84 सेकंड का था। कोई धर्म संस्कृति बताइए जो इतनी सटीक गणना कर सकती हो। हमारी घड़ी ग्रहों की स्थिति पर चलती है। हम कहते हैं- ब्रह्मा आयु द्वितीय परार्धे। 155 ट्रिलियन वर्षों की गणना कोई और सकता है?
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राम मंदिर कोई इमारत नहीं: सुधांशु त्रिवेदी
राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि राम मंदिर कोई इमारत नहीं है। यह हमारी सांस्कृति यात्रा है। यह यात्रा एक वैज्ञानिक है। राम मंदिर से जुड़ी जितनी भी घटनाएं हैं उनकी तारीखों का एक वैज्ञानिक महत्व है। इसका एक सामाजिक और राजनीतिक महत्व है। इसका एक अर्थशास्त्री महत्व है। राम कालचक्र की पूरी गति पूरी करके आए हैं। अपने मंदिर में आने से पहले वह लाखों लोगों को घर और शौचायल देकर आए हैं।

सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि योगीराज जी के लिए कहना चाहूंगा। एक प्रतिमा में सजीवता थी, बस गई सुछवि आंखों में, वो एक लकीर हृदय पर, अलग हो गई लाखों में। राम मंदिर कोई एक इमारत नहीं थी, यह भारत के विकास की कालजयी यात्रा थी। राम मंदिर का विषय जिस तरह से आगे बढ़ा, उसी तरह से भारत आगे बढ़ा। तारीख कालचक्र की गति थी। मुगलों के जमाने और अंग्रेजों के जमाने के रिकॉर्ड को दीमक ने नहीं खाया। सब यथावत थे। पहली एफआईआर 1858 में हुई। निहंग सिखों ने जन्मभूमि पर यज्ञ हवन किया। 

 

मस्जिद-ए-जन्मस्थान पर राम-राम लिख दिया। नीचे दस्तखत थे मुतव्वली मस्जिद-ए-जन्मस्थान। 1936 में भीषण संघर्ष हुआ। तब अंग्रेजों ने नमाज पर रोक लगा दी। 1947 में देश आजाद हुआ। 1948 में रामलला प्रकट हुआ। 1986 में ताला खुला था। 1990-92 आंदोलन चरम पर था। तब भारत में अर्थव्यवस्था बदली। नई अर्थव्यवस्था की शुरुआत हुई। 2003 में खुदाई में खंभे निकले। तब विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ गया। प्राण प्रतिष्ठा के समय 620 अरब का विदेशी मुद्रा भंडार है। चार करोड़ गरीबों को गरीब आवास देकर रामलला नए मंदिर में विराजे हैं। 54 करोड़ लोगों को जनधन अकाउंट और नई संसद देकर रामलला विराजे हैं। चांद के अछूते हिस्से को छूने वाला पहला देश बनाकर आए हैं।

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