स्पेशल स्टोरी: फादर्स डे पर ये कहानियां जरूर छू लेंगी आपका दिल
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जब एक अच्छे दोस्त की जरूरत लगी तो भी वह पास ही खड़े मिले। रविवार को फादर्स डे मनाने के लिए राजधानी वासियों ने अलग-अलग तैयारी की है।
हमने राजधानी के कुछ चर्चित लोगों के परिवार में जाकर यह जाना कि वह जितने सफल अपने प्रोफेशन में हैं क्या उतने ही अच्छे पिता भी? तो सभी तरफ से बस एक ही जवाब मिला कि उनके पापा जैसा कोई नहीं...
बेटा : विकास विक्रम सिंह, अधिवक्ता, हाईकोर्ट लखनऊ बेंच
पिता : डॉ. एसपी सिंह, प्राचार्य, नेशनल पीजी कॉलेज
वर्ष 2000 में नेशनल पीजी कॉलेज और लखनऊ यूनिवर्सिटी में बीकॉम का आवेदन किया। नेशनल पीजी कॉलेज की लिस्ट में मेरा नाम नहीं आया।
पहले सोचा कि शायद पापा वहां प्रिंसिपल हैं तो कुछ फायदा मिल जाएगा, लेकिन उन्होंने कोई भी फेवर करने से साफ इंकार कर दिया। बाद में मैंने एलयू से बीकॉम किया। उस समय थोड़ा बुरा लगा, लेकिन पापा की ईमानदारी को सैल्यूट करता हूं।
यह कहना है कि हाईकोर्ट में अधिवक्ता विकास विक्रम सिंह का। विकास कहते हैं कि बहुत से लोग उनके पिता को सख्त समझते हैं, लेकिन असल में वह बहुत ही इमोशनल व्यक्ति हैं। 2000 में ही बीकॉम की क्लासेज शुरू हुए एक सप्ताह ही बीता था और मुझे बाइक की जरूरत थी।
पापा से कभी कह नहीं पाया, लेकिन एक दिन जब मैं घर पहुंचा तो देखा कि सामने मेरे लिए नई बाइक खड़ी थी। जब कभी पापा शहर से बाहर हों तो मुझे उलझन रहती है।
सीख : पापा से ईमानदारी और अनुशासन सीखा। हर साल कोर्ट के बहुत से साथी नेशनल कॉलेज में किसी के एडमिशन का बोलते हैं, लेकिन मैं उन्हें साफ कहता हूं कि उन्होंने तो मेरा ही एडमिशन नहीं किया था।
पिता ने सिखाया हर मोड़ पर सीखो
पिता: डॉ. आरके गुप्ता, सिविल हॉस्पिटल
मेरी सफलता में पिता डॉ. आरके गुप्ता का बड़ा योगदान है। उनकी कही एक बात ने मुझे हर परीक्षा में सफलता दिला दी। यूपीएससी की तैयारी कर रहा था।
पिता से कुछ मार्गदर्शन मांगा तो उन्होंने बस यही कहा कि मेहनत करने के साथ हर चीज से सीखो। यदि उम्र में कोई छोटा व्यक्ति अच्छा सुझाव दे तो अपना लो। बस इसके बाद मेरी तैयारी का स्वरूप ही बदल गया। अपने अंदर एक नई ऊर्जा महसूस हुई। यह कहना है रेलवे में असिस्टेंट ऑपरेशन मैनेजर आदित्य गुप्ता का।
आदित्य ने बताया कि जब भी वह किसी मुसीबत में आए तो उन्हें थामने वाला सबसे पहला हाथ पिता का रहा। आदित्य के अनुसार उनके पिता को घूमने का बहुत शौक है। इसलिए वह पिता को देश के हर टूरिस्ट प्लेस की सैर करवाना चाहते हैं। इसके अलावा वह अपने पिता को यूरोप टूर कराने की भी प्लानिंग कर रहे हैं।
आदित्य ने बताया कि अपने डॉॅक्टरी पेशे को निभाने के लिए वह कई बार परिवार को समय नहीं दे पाए, लेकिन इससे किसी बुरा नहीं लगा। बल्कि हमेशा अच्छा लगा कि वह दूसरों की इतनी परवाह करते हैं।
सीख : पापा कहते हैं कि व्यक्ति की पहचान उसके व्यक्तित्व से होती है। दूसरे के प्रति सरल स्वभाव और मृदुल होने से ही कोई दूसरों पर अपनी छाप छोड़ जाता है। उनकी इस सीख से नए दोस्त बनाता चल रहा हूं।